आपदा के दौरान नुकसान को कम करने वाली तकनीक की जरूरत : नीतीश कुमार

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पटना 21 जुलाई, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि प्राकृतिक आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए ऐसी तकनीक को अपनाने की जरूरत है जिससे नुकसान कम से कम हो। श्री कुमार ने राजधानी के अधिवेशन भवन में बिहार राज्य आपदा जोखिम न्यूनीकरण मंच 2017 को संबोधित करते हुये कहा, “प्राकृतिक आपदा को कोई नहीं रोक सकता। आपदा से जान-माल का नुकसान होता है। यह नुकसान कम से कम हो, हमारा यही लक्ष्य है। हमें यह लक्ष्य निर्धारित करना चाहिये कि कैसे आपदा के प्रभाव को कम कर सकें। हमें आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये हमेशा प्रयत्नशील रहना चाहिये।” मुख्यमंत्री ने बिहार को बहुआपदा प्रभावित राज्य बताया और कहा कि राज्य में विचित्र स्थिति है। प्रदेश बाढ़ एवं सुखाड़ दोनों से प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि यदि बिहार में वर्षा कम हो फिर भी पड़ोसी देश या अन्य राज्यों में हो रही वर्षा से बिहार प्रभावित होता है। यदि नेपाल में भारी वर्षा हुयी तो नेपाल से निकलने वाली नदियों में उफान आयेगा। यदि मध्यप्रदेश एवं झारखंड में अधिक बारिश हुयी तो दक्षिण बिहार में बाढ़ की स्थिति बन जायेगी। इसी तरह यदि उत्तराखंड में अधिक वर्षा हुयी तो गंगा में उफान आ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को हर साल बाढ़ और सुखाड़ से लड़ने के लिये तैयार रहना पड़ता है। 


श्री कुमार ने कहा कि वर्ष 2008 की कोसी त्रासदी के एक साल पहले वर्ष 2007 में भी बिहार में भीषण बाढ़ आयी थी। बाढ़ से 22 जिले और 2.5 करोड़ लोग प्रभावित हुये थे। लोगों को राहत पहुंचाया गया, आपदा प्रबंधन का कार्य किया गया। राहत कार्य के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आयीं। उन्होंने कहा कि पहले कहा जाता था कि राज्य में 86 प्रतिशत छोटे एवं सीमान्त किसान हैं लेकिन राहत कार्य के दौरान पता चला कि उनकी संख्या लगभग 96 प्रतिशत है। उसी समय यह तय किया गया कि सब चीजों के लिये मापदंड बनाये जाएंगे। किस स्थिति में क्या करना है, इसके लिये एसओपी बनाया जायेगा। आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता देने के कार्य की शुरूआत की गयी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गुजरात का भूकंप, ओडिशा में आये तूफान के बाद आपदा प्रबंधन के विषय पर चर्चा होने लगी कि सिर्फ राहत कार्य से काम नहीं चलेगा। उन्होंने वर्ष 2008 की कोसी त्रासदी की चर्चा करते हुए कहा कि इस प्रलंयकारी बाढ़ का कारण नेपाल में कोसी नदी पर बने बांध का टूटना था। त्रासदी के एक पखवाड़े तक निरंतर लगकर कर प्रभावितों को राहत पहुंचाई गयी। पहली बार इतने बड़े स्तर पर राहत शिविर बनाये गये। श्री कुमार ने प्रदेश में वज्रपात की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि वज्रपात के संबंध में पहले से कोई पूर्वानुमान नहीं होने से अधिक नुकसान होता है। आन्ध्रप्रदेश ने एक तकनीक विकसीत की है जिसके माध्यम से वज्रपात के तीस मिनट पूर्व उससे संबंधित जानकारी मिल जाती है। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से उक्त तकनीक को जल्द से जल्द बिहार लाने का निर्देश देते हुए कहा कि यदि वज्रपात से पूर्व उसकी जानकारी मिल जाती है तो उस क्षेत्र के लोगों को सचेत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देत हुए कहा, “तत्काल इस तकनीक को बिहार में लाइये, देर नहीं कीजिये, पूरा नेटवर्क तैयार कीजिये। तकनीक को बिहार लाने में जो भी राशि व्यय होगी, वह मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जायेगा।” 


श्री कुमार ने कहा कि राज्य के स्कूली बच्चों को भूकम्प एवं आग जैसी चीजों के बारे में संवेदनशील बनाया जा रहा है। बच्चों को आपदा की स्थिति में बचाव की जानकारी और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि प्रदेश के स्कूली बच्चों को सही ढंग से प्रशिक्षित किया जाये तो वे अन्य लोगों को भी इसके बारे में बतायेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 2.5 करोड़ स्कूली बच्चे हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षित कर दिया जाता है तो निश्चित तौर सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने अगलगी की चर्चा करते हुए कहा, “पिछले वर्ष अप्रैल माह में बिहार में अगलगी की अप्रत्याशित घटनायें घटी। जब इस संदर्भ में जानकारी ली गयी तो पता चला कि ज्यादातर अगलगी की घटनायें 11 बजे पूर्वाह्न से 4 बजे अपराह्न के बीच होती है, जिसका मुख्य कारण खाना पकाना था। इसके लिए सरकार ने एक एडवाइजरी जारी की। सरकार का उतरदायित्व आमलोगों के प्रति है। हम हमेशा उनकी सुविधा एवं बेहतरी के लिये काम करते रहेंगे। आपदा जोखिम न्यूनीकरण ऐसी चीज है, जिसका आभास सभी लोगों के मन में होना चाहिये।” श्री कुमार ने कहा कि डिजास्टर रोडमैप के क्रियान्वयन में जन-जन को शामिल करना होगा। हर क्षेत्र में कोई न कोई आपदा का खतरा है, खतरों के बारे में सोच विकसित करने, उसका नुकसान कम से कम हो, इन सबको ध्यान में रखते हुये 15 साल के लिये आपदा रोडमैप बनाया गया है। उन्होंने आशा जताई कि कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों के बीच चर्चा के सकारात्मक परिणाम निकलेंगे।इस मौके पर मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन के पारंपरिक ज्ञान पर लिखित पुस्तक ‘धरोहर’ का विमोचन किया तथा  संबल ऐप का लोकार्पण किया। श्री कुमार ने मकर सक्रांति पतंगोत्सव के दिन घटित भीषण नाव दुर्घटना में उत्कृष्ट बचाव कार्य करने के लिये राजेन्द्र सहनी, आशुतोष कुमार, संदीप सहनी, सोनू सहनी, जामुन सहनी और पंकज कुमार को पुरस्कृत किया। समारोह को आपदा प्रबंधन मंत्री चन्द्रशेखर, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ब्यासजी, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य डॉ0 उदय कान्त मिश्रा समेत अन्य लोगों ने भी संबोधित किया। 
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