हत्या के आरोपी नीतीश ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दिखावा कर इस्तीफा दिया : लालू

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पटना 26 जुलाई, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने केंद्रीय जांच ब्यूरोे(सीबीआई) के प्राथमिकी दर्ज करने के बाद श्री तेजस्वी प्रसाद यादव के उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच आज श्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिये जाने पर कहा कि हत्या के आरोपी श्री कुमार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दिखावा कर इस्तीफा दिया है और अब बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का अधिकार राजद का है। श्री यादव ने राज्य में तेजी से बदल रहे राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर यहां अपने आवास पर राजद विधायकों के साथ मंथन करने के बाद जल्दीबाजी में बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया और कहा कि श्री कुमार के खिलाफ अदालत परिसर में सीताराम सिंह की हत्या के आरोप में भारतीय दंड विधान की धारा 302 एवं 307 के साथ ही आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत पटना जिले में बाढ़ अनुमंडल के पंडारक थाना में 16 नवंबर 1991 को मामला दर्ज है। उन्होंने कहा कि हत्या के आरोपी श्री कुमार किस हैसियत से मुख्यमंत्री के पद पर बैठे हुये थे। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दिखावा कर अपने पद से इस्तीफा दिया है। राजद अध्यक्ष ने कहा कि हत्या का आरोप होने के बावजूद श्री कुमार मुख्यमंत्री बन सकते हैं। वहीं, श्री कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड (जदयू) तेजस्वी से सीबीआई की उस प्राथमिकी के आधार पर इस्तीफे की मांग कर रही थी जब वह नाबालिग थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दिखावा करने वाले श्री कुमार को हत्या के इस मामले का जनता के बीच भंडाफोड़ होने का डर था इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि श्री कुमार के इस्तीफे के बाद बड़ी पार्टी होने के कारण सरकार बनाने का अधिकार राजद का है। 


श्री मोदी ने कहा कि श्री कुमार से उनकी भी बात हुई है और उन्होंने भाजपा के समर्थन को स्वीकार किया है । उन्होंने कहा कि भाजपा ने श्री कुमार को बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया है ।  भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने कहा कि केन्द्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के त्यागपत्र देने के बाद की परिस्थितियों पर पार्टी विधायकों की राय शुमारी के लिये तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में उनके अलावा भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुशील कुमार मोदी और विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रेम कुमार शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विधायकों से विचार-विमर्श कर समिति इस निर्णय पर पहुंची कि राज्य को राजनीतिक अस्थिरता से बचाने के लिए श्री कुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया जाये। श्री राय ने कहा कि समिति की राय से केन्द्रीय नेतृत्व को अवगत करा दिया गया है । उन्होंने कहा कि बिहार भाजपा के विधायक श्री कुमार के नेतृत्व को स्वीकार करते हैं। पार्टी उन्हें सरकार बनाने के लिए समर्थन का ऐलान करती है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि श्री कुमार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष का निर्णय लिया है पार्टी इसका स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी श्री कुमार के इस कदम का स्वागत किया है और इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी इसके लिए उन्हें तहे दिल से धन्यवाद दिया है। गौरतलब है कि 243 सदस्यी बिहार विधानसभा में बहुमत के लिए 122 विधायकों की जरूरत है । श्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के 71 और भाजपा के 53, उसकी सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के दो-दो विधायक और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के एक विधायक हैं । ऐसे में जदयू और भाजपा तथा उसके सहयोगी दलों के विधायकों की संख्या 129 हो जाती है जो बहुमत के लिए जरूरी जादुई आंकड़े से अधिक है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 80 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन उसके समर्थन में 27 विधायकों वाली कांग्रेस ही खड़ी है। विधानसभा में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा माले) के तीन और चार निर्दलीय सदस्य हैं। 

राजद अध्यक्ष ने कहा कि जब श्री कुमार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग हुये थे तब उन्होंने कहा था कि वह मिट्टी में मिल जाएंगे लेकिन दुबारा इस गठबंधन में शामिल नहीं होंगे। साथ ही यह भी कहा था कि सभी धर्मनिरपेक्ष शक्तियां मिलकर ‘संघमुक्त’ भारत का निर्माण करेंगे। उन्होंने कहा कि वह हमेशा कहते रहे हैं कि श्री कुमार भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारों पर काम कर रहे हैं, जो आज उनके इस्तीफे से साबित हो गया। उन्होंने कहा, “मैंने श्री कुमार को स्पष्ट रूप से कह दिया था कि वह महागठबंधन सरकार का कार्यकाल पूरा करें उन पर किसी तरह का दबाव नहीं होगा। राजद के विधायकों एवं मंत्रियों ने कभी भी शासन के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं किया।” श्री यादव ने कहा कि तेजस्वी के खिलाफ दर्ज किये गये फर्जी मामले को लेकर श्री कुमार ने स्वयं कभी इस्तीफे के लिए नहीं कहा। उन्होंने कहा, “आज भी मेरी बात श्री कुमार से हुई और तेजस्वी ने भी उनसे पहले बात की थी लेकिन उन्होंने कभी इस्तीफे के लिए नहीं कहा था।” राजद अध्यक्ष ने कहा, “श्री कुमार ने सांप्रदायिक ताकतों से आशीर्वाद लेकर इस्तीफा दे ही दिया और अब वह सरकार चलाने लायक भी नहीं रहे तो मेरी राजद, जदयू और कांग्रेस विधायकों से अपील है कि वह मिलकर नये मुख्यमंत्री का चयन कर लें, और वह नाम न तो श्री कुमार होगा और न ही तेजस्वी का।” उन्होंने कहा कि वह राज्य पर राष्ट्रपति शासन थोपने के पक्ष में नहीं हैं इसलिये तीनों दल मिलकर नये मुख्यमंत्री का चयन कर लें ताकि सरकार सुचारू रूप से चलती रहे। 

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