बिहार : नितीश का जनादेश के साथ विश्वासघात : वामपंथ

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पटना, 27 जुलाई। बिहार के छह वामदलों की बैठक आज यहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य कार्यालय में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी), के राज्य सचिव अवधेष कुमार की अध्यक्षता में हुई। बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव सत्य नारायण सिंह, एम. जब्बार आलम और अखिलेष कुमार, सी.पी.आई. (एम) के राज्य सचिव अवधेष कुमार, सर्वोदय शर्मा और गणेष शंकर सिंह, माले के कृष्णदेव यादव और मीना तिवारी, एस.यू.सी.आई. के राजकुमार चैधरी और साधना मिश्रा, फारवर्ड ब्लाॅक के अमरीका महतो तथा आर.एस.पी. के वीरेन्द्र ठाकुर शामिल थे। बैठक में बिहार के ताजा घटनाक्रमपर विचार विमर्ष हुआ। विचारोपरान्त निम्नलिखित संयुक्त बयान प्रेस को जारी किया महागठबंधन सरकार के मुखिया नीतीष कुमार द्वारा नाटकीय ढ़ंग से इस्तीफा देकर भाजपा के साथ मिलकर फिर सरकार बनाना बिहार के मतदाता द्वारा 2015 के विधान सभा चुनाव में दिये गये जनादेष के साथ विष्वासघात है। भाजपा के साथ मिलकर सरकार के गठन से नीतीष कुमार का घोर अवसरवादी चेहरा उजागर हुआ। नीतीष कुमार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की बात कर रहे हैं किन्तु स्वयं उनका यह कदम चरम दर्जें का राजनीतिक भ्रष्टाचार है। यदि नीतीष कुमार राजनीतिक रूप से ईमानदार होते तो भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने से पहले वे इस्तीफा देने के बाद नया जनादेष लेने जनता के बीच जाते । बिहार की जनता ने केन्द्र की राजग सरकार की जनविरोधी आर्थिक नीतियों और साम्प्रदायिकता के खिलाफ राजद, जदयू, कांग्रेस के महागठबंधन को अपना समर्थन दिया था। 


पिछले 20 महीनों के शासन काल में जहाँ नीतीष कुमार ने एक ओर जनविरोधी आर्थिक नीतियों को लागू करते हुए अपने गैर जनतांत्रिक रवैये का परिचय दिया, वहीं वे नोटबंदी, जीएसटी जैसे मुद्दों पर केन्द्र सरकार का समर्थन करते रहे। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के समय विरोधी पक्ष के उम्मीदवार का विरोध करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ समर्थित भाजपा उम्मीदवार श्री रामनाथ कोंविद का समर्थन किया, जबकि नीतीष कुमार जी ने शुरूआती दौर में भाजपा के राष्ट्रपति उम्मीदवार को हराने के लिए विपक्ष का साझा उम्मीदवार खड़ा करने का सुझाव दिया था। एक समय संघ मुक्त भारत का नारा देने वाले नीतीष कुमार ने आज आगे बढ़कर महागठबंधन को तोड़ा और खुद  साम्प्रदायिक संघ परिवार की गोद में जा बैठे। बिहार की धर्मनिरपेक्ष एवं जनतांत्रिक जनता नीतीष कुमार को इस विष्वासघात के लिए कभी माफ नहीं करेगी।  महागठबंधन के दूसरे दलों राजद और कांग्रेस ने भी राजनीतिक अस्थिरता को समाप्त करने और जनादेष का पालन करने के उद्देष्य से समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। इस पूरे राजनीतिक षड्यंत्र में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और खासकर सुषील मोदी ने नीतीष कुमार से मिलकर योजनाबद्ध तरीके से महागठबंधन की सरकार गिराने का काम किया। भाजपा और केन्द्र सरकार गैर भाजपा शासित राज्यों में गैर भाजपा सरकारों को गिराने की कार्यनीति की दिषा में यह एक कड़ी है। तमाम वामपंथी एवं जनवादी शक्तियाँ अपील करती है कि नव-उदारवादी नीतियों पर चलने वाले, सत्तालोलुप एवं भ्रष्ट क्षेत्रीय दलों से भाजपा के खिलाफ किसी संघर्ष की उम्मीद किये बगैर वे जनता के ज्वलंत मुद्दों को लेकर स्वतंत्र एवं संयुक्त जन आंदोलन तेज करें और भाजपा की कारपोरेटपरस्त और आक्रामक साम्प्रदायिक नीतियों को बदलने के लिए वैकल्पिक नीतियों के आधार पर संघर्ष को आगे बढ़ाये।

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