पाकिस्तान में शरीफ के इस्तीफे से गहराया राजनीतिक संकट

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इस्लामाबाद, 28 जुलाई, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पनामा गेट मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आज दोषी करार देते हुए पद के अयोग्य ठहराया। श्री शरीफ ने इसके बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय खंड पीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। खंड पीठ ने श्री शरीफ को दोषी करार देते हुए उन्हेंं प्रधानमंत्री पद के अयोग्य घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच कर रही संयुक्त जांच समिति (जेआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाते हुए पाकिस्तान मुस्लिम लीग :नवाज: (पीएमएल-एन)के अध्यक्ष श्री शरीफ और वित्त मंत्री इशाक डार को भी अयोग्य घाेषित कर दिया। इसके अलावा न्यायालय ने नेशनल असेंबली के सदस्य कैप्टन मुहम्मद सफदर को भी पद के अयोग्य ठहराया है। जेआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि श्री शरीफ के परिवार के पास आय के घोषित स्रोत से बहुत अधिक संपत्ति है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) को आदेश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर श्री शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज करें। पनामागेट मामले की जांच के लिए छह मई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छह सदस्यीय संयुक्त जांच दल (जेआईटी) का गठन किया गया था। तय समय सीमा के भीतर जेआईटी ने 10 जुलाई को यह रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी। मामले की सुनवाई 21 जुलाई को पूरी हो गयी थी और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। गौरतलब है कि पिछले साल पनामा पेपर्स लीक मामले में श्री शरीफ और उनके परिवार के सदस्यों के नाम का खुलासा होने के बाद से ही पाकिस्‍तान में विपक्षी दलों की ओर से प्रधानमंत्री पद से श्री शरीफ को हटाये जाने की मांग हो रही है। श्री शरीफ और उनके परिवार पर विदेश में संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाये गये थे। प्रधानमंत्री के तौर पर श्री शरीफ का यह तीसरा कार्यकाल था और यह तीसरी बार है जब 67 वर्षीय श्री शरीफ का प्रधानमंत्री का कार्यकाल बीच में ही खत्म हो गया। श्री शरीफ पाकिस्तान के सबसे रसूखदार सियासी परिवार और सत्तारूढ़ पार्टी पीएमएल-एन के मुखिया हैं। इस्पात कारोबारी-सह-राजनीतिज्ञ श्री शरीफ पहली बार 1990 से 1993 के बीच प्रधानमंत्री रहे। पहले कार्यकाल के दौरान श्री शरीफ के तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इसाक खान के साथ गहरे मतभेद हो गए,जिसके बाद खान ने अप्रैल, 1993 में नेशनल असेंबली को भंग कर दिया था। उनका दूसरा कार्यकाल 1997 में शुरू हुआ जो 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ द्वारा तख्तापलट किए जाने के बाद खत्म हो गया। श्री शरीफ जून, 2013 में तीसरी बार सत्ता में आये लेकिन पनामागेट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज उन्हें अयोग्य ठहरा दिया जो उनके राजनीतिक जीवन के लिए बहुत बड़ा झटका है। अपने तीसरे कार्यकाल में श्री शरीफ ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे :सीपेक: सहित कई विकास परियोजनाओं को शुरू किया। उनकी एक और बड़ी उपलब्धि सैन्य अभियान ‘जर्ब-ए-अज्ब’ है जिसे 2014 में शुरू किया गया था। सेना के इस अभियान का उद्देश्य उत्तरी वजीरिस्तान और दक्षिण वजीरिस्तान से आतंकवादियों का सफाया करना था।

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