दुमका : बाबा के दरबार से खाली हाथ कोई नहीं लौटता, बाबा सबकी सुनतें हैं

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) राजकीय श्रावणी मेला वासुकिनाथ धाम में प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में बाबा पर जलार्पण करते हुए श्रद्धालु बाबा की नगरी से शांखा, पेड़ा, चूड़ा, इलायचीदाना, सिन्दुर, टिकली, हाथकड़ा, बाजूबंद, पीतल व काँसा का वर्तन, पूजा सामग्री, दीपक, तसला, साजी इत्यादि खरीदना नहीं भूलते। बाबा की नगरी से ऐसी वस्तु की खरीददारी वे अवश्य करते जिसका स्मरण कई-कई वर्षों तक के लिये बना रहे। अलग-अलग अलग-अलग भाषा-संस्कृति, वेशभूषा, परिधान, बोलचाल व रीति-रिवाज से ओतप्रोत गेरुवावस्त्रधारी बमांे  की दुनिया इस स्थान पर बिल्कुल बदल जाती है। नागेश ज्योर्तिलिंग की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु भक्त बाबा से घर-परिवार व अपने-परायों के लिये मन्नतें मांगने से नहीं चूकते। कोई पुत्र-पुत्री के लिये नौकरी-विवाह की मांग करता है तो कोई असाध्य बीमारियों से छुटकारा पाने के लिये। कोई घर-बाहर की चिंता-अशांति से निजात पाना चाहता है तो कोई पारिवारिक उलझनों से मुक्ति चाहता है। किसी को बेटा चाहिए तो किसी को बेटी। कोई अगले वर्ष भी इसी खुशी से बाबा पर जलार्पण का आर्शीवाद चाहता है तो कोई बाबा के दरबार में ही अपनी अंतिम इच्छा चाहता है। बाबा अपने भक्तों को नाराज नहीं करते। सभी भक्तों को कमोबेश उनकी इच्छा के अनुरुप परिणाम प्राप्त होता है। महिला हो, पुरुष हो, बच्चे हों या फिर बूढ़े। सबकी अपनी-अपनी मनोकामनाएँ। फौजदारी बाबा बासुकिनाथ के दरबार में महिलाओं को को शांखा चूड़ी काफी पसंद आ रहा है। पूरे मेला क्षेत्र में शांखा सहित पेड़ा, चूड़ा, इलायचीदाना, सिन्दुर, टिकली पीतल, काँसा, तांबा के उपकरणों सहित अन्य वस्तुओं की हजारों दूकानें सजी पड़ी हैं। उड़ीसा से बाबा की नगरी पहुँचे कांवरिया विकास का कहना है, श्रावण माह में प्रत्येक वर्ष वे शांखा बेचने वासुकिनाथ धाम आते हैं। शांखा की खरीददारी के लिये महिलाओं की भारी भीड़ उनके दूकान पर प्रतिदिन देखी जा रही है। यहाँ पहुँचने वाली महिला श्रद्धालु उनकी दूकान को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखती हैं। वे शांखा खरीदती हैं। उनके अनुसार 100 रु से लेकर 1000 रु तक का जोड़ा शांखा उनकी दूकान में उपलब्ध है। श्रद्धालु बड़ी मात्रा में खरीदकर वापस जाते हैं। श्रावणी मेले के दौरान वासुकिनाथधाम में पूरे एक महीने यहां आने वाले श्रद्धालु अपने घर लौटते वक्त पेड़ा और चुड़ा की खूब करते हैं खरीददारी। वासुकिनाथधाम का पेड़ा और चुड़ा की बात ही कुछ और है विष्वास न हो तो एक बार खा कर देखिए। देष दुनिया और अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालु यहाँ से पेड़ा चूड़ा खरीदकर ही वापस जाते है। श्रावणी मेले के दौरान प्रत्येक दिन यहाँ कई क्विंटल पेड़ा और चूड़ा की बिक्री होती है। 

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