शिवसेना का गोपालकृष्ण पर याकूब को मृत्युदंड से बचाने की कोशिश का आरोप

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नयी दिल्ली 17 जुलाई, शिवसेना ने उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के प्रत्याशी गोपालकृष्ण गांधी की उम्मीदवारी पर यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया है कि उन्होंने मुंबई बम विस्फोट के साजिशकर्ता याकूब मेमन को ‘मृत्युदंड’ से बचाने की कोशिश की थी । शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने श्री गांधी को उपराष्ट्र्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधा है और उन्हें बाकायदा संबोधित करते हुए कहा कि आपने श्री गोपालकृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद का प्रत्याशी चुना है , जिन्होंने याकूब मेमन को मौत की सजा से बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल किया था । श्री राउत ने एक ट्वीट कर सवाल किया ,‘ क्या अाप गोपालकृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति के पद पर देखना चाहते हैं जिन्होंने 1993 के मुुंबई बम विस्फोटों के साजिशकर्ता याकूब मूेनन की फांसी की सजा का विरोध किया था । ’ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने श्री गाँधी पर लगाये गये शिवसेना के इस आरोप को सही बताया है । उन्होंने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि श्री गाँधी निजी तौर पर एक सभ्य व्यक्ति हैं, लेकिन उनके सिद्धांत महात्मा गाँधी के सिद्धांतों से मेल नहीं खाते है। उन्होंने श्री गोपालकृष्ण गाँधी को वामपंथी करार देते हुए कहा कि उनके नाम में ‘गाँधी ’ लगा होने के कारण ही उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है। इस बीच कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने शिवसेना के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी बेतुकी बात कर रही है । उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले का सच सामने लाएगी । उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में जब मेमन को मौत की सजा सुनायी गयी थी तो महात्मा गांधी के पौत्र श्री गांधी ने उसकी इस सजा का यह कहकर विरोध किया था कि याकूब मेमन को माफ करना पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि होगी । श्री गांधी ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखकर कहा था कि याकूब मेमन को जीवनदान देना पूर्व राष्ट्रपति कलाम के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी जो अपने पीछे मानवता की विरासत छोड़ गये हैं । उन्होंने यह भी लिखा था कि याकूब मेमन न्यायपालिका के समक्ष खुद पेश हुआ था जबकि वह आसानी से भागकर न्याय व्यवस्था से बच सकता था । भारतीय खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने इस बात का जिक्र किया था कि याकूब ने कानूनी प्रक्रिया के दौरान पूरा सहयोग किया ,इसलिए उसके मामले में ‘मौत की सजा ’अनुचित होगी । आतंकवाद निरोधक एवं विध्वसंकारी गतिविधियां (टाडा )की एक विशेष अदालत ने मेमन को 27 जुलाई 2007 को मुंबई बम विस्फोटों में लिप्त होेने का दोषी करार दिया था । इस मामले के मुख्य संदिग्ध टाइगर मेमन के भाई याकूब को 30 जुलाई 2015 को नागपुर की जेल में फांसी की सजा दी गयी थी ।

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