100 साल से ज्यादा पुरानी इमारत गिरी, 21 लोगों की मौत

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मुंबई, 31 अगस्त, दक्षिण मुंबई के भिंडी बाजार में 117 साल पुरानी पांच मंजिला एक जर्जर इमारत के आज गिर जाने से 21 लोगों की मौत हो गई और 12 अन्य जख्मी हो गए। इस इमारत में आवास, गोदाम और एक प्लेस्कूल था। अधिकारियों ने बताया कि आठ से 10 लोगों के अब भी इस इमारत के मलबे में फंसे होने की आशंका है। 34 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया जिनमें से 21 ने या तो सरकारी जे जे अस्पताल में लाए जाने से पहले ही दम तोड़ दिया या उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई। इनमें पांच महिलाएं शामिल हैं। यह त्रासदी ऐसे समय में हुई है जब मात्र दो दिन पहले शहर में मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था, सड़क, रेल एवं हवाई सेवाएं ठप हो गई थीं, घरों में पानी भर गया था और कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई थी। कई लोगों को संदेह है कि पहले से ही जीर्ण शीर्ण इमारत को बारिश के कारण और नुकसान हुआ और वह इसी कारण ढह गई। बचाव अभियान के दौरान पांच दमकलकर्मी और एक एनडीआरएफ जवान भी जख्मी हुआ । उन्हें भी जे. जे. अस्पताल ले जाया गया । इनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है और चार अन्य को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। दमकल कर्मियों ने बताया कि क्षत-विक्षत हुसैनी इमारत में करीब नौ परिवार रहते थे। इसमें एक प्ले स्कूल भी थी। इस प्ले स्कूल में बच्चों के पहुंचने के कुछ ही मिनटों पहले इस इमारत के ढहने से कई बच्चे बाल बाल बच गए। राज्य के आवास मंत्री रवींद्र वायकर ने कहा कि इस इमारत को वर्ष 2011 में पुनर्विकास के लिए मंजूरी मिली थी और इसे खाली कराया जाना था।


मुख्यमंत्री देंवेद्र फडणवीस ने घटनास्थल का दौरा किया और राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा इस मामले की जांच कराए जाने के आदेश दिए। उन्होंने मृतकों के करीबी परिजन को पांच-पांच लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया। उन्होंने यह भी कहा कि घायल हुए लोगों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘संबंधित एजेंसियों ने पुनर्विकास परियोजना को मंजूरी दी थी और इस इमारत को ढहाया जाना था। इसे ढहाए जाने की अंतिम मंजूरी मई 2016 में दी गई थी लेकिन कुछ परिवारों ने इस इमारत में ही ठहरने का विकल्प चुना जिसके कारण लोगों की जान गई।’’ शहर के प्रमुख दमकल अधिकारी प्रभात राहंगदले ने पीटीआई भाषा को बताया कि बचाव अभियान रातभर जारी रहेगा। अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक पूरा मलबा साफ नहीं कर लिया जाता और सभी जीवितों एवं शवों को बाहर नहीं निकाल लिया जाता। अभियान में 90 सदस्यीय राष्ट्रीय आपदा मोचन बल भी शामिल है। कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि इमारत के तंग कमरों में नौ परिवारों के करीब 40 लोग रहते थे और इस इमारत को महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) की ओर से ‘‘असुरक्षित’’ घोषित किया गया था । सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट (एसबीयूटी) को इस इमारत के पुनर्विकास का काम कराना था। ट्रस्ट ने कहा कि इमारत में कुल 13 किरायेदार रहते थे जिसमें 12 रिहायशी और एक वाणिज्यिक थे । उनमें से ट्रस्ट ने सात परिवारों को 2013-14 में ही दूसरे मकान में भेज दिया था ।
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