नौ दिन बाद बेंगलोर से लौटे कांग्रेस के 44 विधायक,

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अहमदाबाद, 07 अगस्त, गुजरात में कल होने वाले राज्यसभा चुनाव, जिसमें देश के तीन दिग्गज नेता मैदान में हैं, को लेकर जबरदस्त राजनीतिक गहमागहमी के बीच खरीदफरोख्त की डर से बेंगलोर के निकट गत 29 जुलाई से एक रिसार्ट में रखे गये कांग्रेस के 44 विधायक आज सुबह वापस लौट आये। सुबह यहां सरदार वल्लभ भाई पटेल हवाई अड्डे पर पहुंचे सभी विधायकों को कडी सुरक्षा के बीच एक लग्जरी बस में मध्य गुजरात के आणंद के पास स्थित निजानंद रिसार्ट में रखा गया है। बेंगलोर रवाना होने से पहले भी इनमें से कुुछ को इसी फार्म हाऊस में रखा गया था। वहीं उनके परिजन आज रक्षाबंधन पर उनसे मिले। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया की सभी को कल वहीं से मतदान के लिए राजधानी गांधीनगर ले जाया जाएगा। मतदान के बाद सभी कल से ही शुरू हो रहे विधानसभा के संक्षिप्त दो दिवसीय सत्र की कार्यवाही में भी भाग लेंगे। तीन सीटों के लिए हो रहे उक्त चुनाव में भाजपा की ओर से इसके अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और कांग्रेस छोड कर भाजपा में आये बलवंतसिंह राजपूत तीन उम्मीदवार हैं जबकि कांग्रेस के एकमात्र उम्मीदवार के तौर पर श्रीमती सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल मैदान में हैं। 27 और 28 जुलाई को कांग्रेस के 57 में से 6 विधायकों के इस्तीफे के बाद इनमें से तीन भाजपा में शामिल हो गये थे जिनमें से एक श्री राजपूत भी हैं। इसके बाद ही कांग्रेस ने सत्तारूढ भाजपा पर हर तरह के दबाव के जरिये इसके विधायकों की खरादफरोख्त के प्रयास का आरोप लगाते हुए 44 विधायकों को बेंगलोर भेज दिया था। 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के एक बागी समेत 122, कांग्रेस के 51 तथा राकांपा के दो और जदयू का एक विधायक है। श्री शाह और श्रीमती ईरानी की जीत लगभग पक्की है। श्री राजपूत तथा श्री पटेल, जो पांचवी बार राज्यसभा में चुने जाने के लिए मैदान में हैं, के बीच मुकाबला है। श्री पटेल ने जीत के लिए जरूरी 45 का आंकडा होने का दावा किया है। उन्होंने राकांपा के दो विधायकाें के शुरू में श्री पटेल का समर्थन करने के दावे के बाद अब इसको लेकर अनिश्चितता की स्थिति है और ये भाजपा को भी समर्थन दे सकते हैं। गुजरात परिवर्तन पार्टी की टिकट पर चुने गये भाजपा (दल के विलय के चलते) के एक बागी नलिन कोटडिया के श्री पटेल को समर्थन देने की संभावना है। चुनाव में नोटा यानी उपरोक्त में से कोई नहीं का विकल्प होने से भी परिदृश्य रोचक हो गया है।

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