ट्रैकमेनों के 50 हजार रिक्त पद शीघ्र भरे जायें : संसदीय समिति

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नयी दिल्ली 10 अगस्त,  संसद की एक स्थायी समिति ने रेलमार्गों के आधुनिकीकरण एवं रखरखाव में कमी की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिये रेलवे को करीब दो हज़ार नयी ट्रैक मशीनों की खरीद प्रक्रिया तेज करने तथा ट्रैकमैनों के 50 हज़ार से अधिक रिक्त पदों को तुरंत भरने काे कहा है। संसद की रेलवे अभिसमय समिति की दोनों सदनों में आज पेश की गयी एक रिपोर्ट में रेलमार्गों के आधुनिकीकरण एवं रखरखाव के काम की गति तेज करने पर बल दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च 2016 के अनुसार देश में 66687 रूट किलोमीटर और 119630 ट्रैक किलोमीटर रेललाइन थी, जिसमें ब्रॉड गेज में 60551 रूट किलोमीटर और 112388 ट्रैक किलोमीटर लाइन थी। सैम पित्रोदा की अध्यक्षता वाले एक विशेषज्ञ समूह की सिफारिश के अनुसार 19000 किलोमीटर रूट किलोमीटर ट्रैक का आधुनिकीकरण करने की जरूरत है। इस हिसाब से चार से पांच हजार किलोमीटर ट्रैक हर साल आधुनिकीकृत करने की जरूरत है। समिति ने माना कि एक अप्रैल 2017 को 7546 किलोमीटर ट्रैक के पुनरुद्धार की योजना को मंजूरी दी गयी है। अल्पकालिक लक्ष्य के तहत 2017-18 में 3600 किलोमीटर और शेष भाग 2018-19 में आधुनिकीकृत किया जायेगा। रेलवे ट्रैक के रखरखाव को पूरी तरह से मशीनीकृत करने के लिये 2805 ट्रैक मशीनों की जरूरत है। 31 मार्च 2017 की स्थिति के अनुसार विभिन्न रेलज़ोन में 834 ट्रैक मशीनें हैं। एक मास्टर प्लान के मुताबिक 2024 तक बाकी 1971 मशीनें 18760 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी जानी हैं। समिति ने कहा कि ट्रैक मशीनों की खरीद प्रक्रिया तेज की जाये ताकि तय समय से पहले ही ट्रैक रखरखाव का काम पूरी तरह से यांत्रिक किया जा सके। समिति ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि पटरियों का रखरखाव का काम करने वाले ट्रैकमेनों की संख्या तय पदों की तुलना में बहुत कम है। जनवरी 2017 में ट्रैकमेनों के 50608 पद रिक्त थे। इसके अलावा ट्रैक के विस्तार के बावजूद उस अनुपात में पदों की संख्या नहीं बढ़ायी गयी। समिति ने रेलवे बोर्ड से कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लें और इन पदाें को शीघ्रातिशीघ्र भरा जाये।

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