अंडमान निकोबार वन एंव वृक्षारोपण विकास निगम होगा बंद


  

andaman-nicobar-plantation-development-corporation-to-be-closedनयी दिल्ली 16अगस्त, सरकार ने साेलह वर्षों से भी अधिक समय से घाटे में चल रहे पोर्ट ब्लेयर स्थित ‘अंडमान और निकोबार द्वीप समूह वन और वृक्षारोपण विकास निगम’ को बंद करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस सार्वजनिक उपक्रम को बंद करने और उसमें काम करने वाले सभी कर्मचारियों की देनदारियों का भुगतान करने का फैसला लिया गया। सरकार का मानना है कि इस फैसले से केन्द्र की ओर से एनआईएफपीडीसीएल को अब तक दिया जाता रहा रिण बंद किया जा सकेगा और निगम की परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए उसमें कार्यरत कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति (वीआरएस)तथा इच्छुक कर्मचारियाें को वीएसएस पैकेज की पेशकश और वीआरएस और वीएसएस का विकल्प नहीं चुनने वाले कर्मचारियों की 1947 के औद्योगिक विवाद निबटारा कानून 1947 के तहत छंटनी या यदि फिर कोई अन्य विकल्प है तो उनके तहत देनदारियों का निबटान करना तय किया गया है। निगम में इस समय 836 कर्मचारी कार्यरत हैं। निगम को बंद करने के पहले इसके कर्मचारियों की वीएसएस पैकेज की देनदारियां निबटाने के लिए केन्द्र सरकार 125.72 करोड़ रुपए बजटीय सहायता के रूप में देगी। वीएसएस पैकेज के तहत कर्मचारियों को भुगतान 2007 के वेतनमान के आधार पर किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निगम को निगम को बंद करने के बाद 31 मार्च, 2017 को देय ब्‍याज पर रोक लगाने के साथ-साथ एएनआईएफपीडीसीएल को भारत सरकार की ओर से दिए गए 186.83 करोड़ रुपये के ऋणों और 185.18 करोड़ रुपये के अर्जित ब्‍याज को बट्टे खाते में डाल दिया जाएगा। निगम की अचल परिसंपत्तियां जैसे संयंत्र,मशीनरी,वाहन,कार्यालय फर्नीचर आदि को निलाम किया जाएगा। वन और पर्यावरण मंत्रालय निगम की इन परिसपंत्तियों का स्थानांतरण और बिक्री एनबीसीसी लिमिटेड के जरिए करेगा। एनएआईएफपीडीसीएल का गठन अंडमान निकोबार द्वीप समूह में वानिकी विकास और प्रबंधन के लिए 1977 में किया गया था। लेकिन 2001 और 2002 में उच्चतम न्यायालय द्वारा द्वीप समूह में वानिकी गतिविधियों पर रोक लगाने का ओदश जारी करने के बाद से निगम घाटे में जाने लगा और अपने कर्मचारियों को वेतन और भत्ते देने में असमर्थ होने लगा लिहाजा सरकार ने इस बंद करने का फैसला लिया है। 




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