बिहार के 14 जिलों में बाढ़ की विभीषिका, 84 लोगों की मौत

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पटना 16 अगस्त, नेपाल और बिहार में पिछले चार दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण राज्य के 14 जिलों में बाढ़ की विभीषिका झेल रहे 90 लाख से अधिक लोगों को युद्ध स्तर पर राहत पहुंचाने में जुटे सेना के जवानों को कड़ी मसक्कत करनी पड़ रही है और बाढ में अबतक 84 लोगों की मौत हो चुकी है। आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि बाढ़ के कारण पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार, मधेपुरा, सुपौल, पूर्वी एवं पश्चिम चंपारण, दरभंगा, मधबुनी, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर और सारण जिलों के 97 प्रखंड प्रभावित हुए हैं। इन जिलों में करीब 90 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। सूत्रों ने बताया कि इन 14 जिलों में राष्ट्रीय आपदा बल (एनडीआरएफ) की 22 टीम के 949 जवान अपनी 100 नौकाओं और राज्य आपदा बल (एसडीआरएफ) की 15 टीम के 421 जवान अपनी 82 नौकाओं के साथ 24 घंटे राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ चिकित्सकों के चलंत दस्ता को भी प्रभावित इलाकों में लगाया गया है । सूत्रों ने बताया कि इसी तरह सेना की सात कंपनियों को प्रभावित इलाकों में दो दिन पूर्व से ही लगा दिया गया है। सेना के 630 जवान अपनी 70 नौकाओं के साथ 24 घंटे प्रभावित इलाकों में राहत कार्य में लगे हैं। बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित सीतामढ़ी, मधुबनी, पश्चिम एवं पूर्वी चंपारण जिले के निचले इलाकों में सेना की तीन कंपनियों को विशेष तौर पर लगाया गया है। बाढ़ प्रभावित 14 जिलों में फंसे हुए लोगों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए वायुसेना के दो हेलीकॉप्टर दो दिन पूर्व से ही लगा हुआ है। वहीं, एक अन्य हेलीकॉप्टर पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटा है। हेलीकॉप्टर से सूखे खाद्य सामग्रियों के साथ ही रोजमर्रा के लिये इस्तेमाल होने वाले सामानों को बाढ़ पीड़ितों के बीच गिराये जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से 261 राहत शिविर लगाये गये हैं। कई जिलों में इन शिविरों के अलावा पशु राहत शिविर भी ऊंचे स्थानों पर बनाये गये हैं। प्रभावित इलाकों से अबतक दो लाख 25 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। राहत शिविरों में लोगों को मुफ्त भोजन की व्यवस्था की गयी है। साथ ही शिविरों के निकट चिकित्सकों की भी तैनाती की गयी है । 


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किशनगंज जिले में बाढ़ के पानी से चार तथा कटिहार जिले में दो लोगों की डूबकर मौत होने की सूचना मिली है। इसके अलावा अररिया, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चम्पारण और कटिहार जिले में पानी की तेज धार की चपेट में आ जाने से कुछ पशुओं की भी मौत हो गयी है। इसके अलावा बाढ़ में डूबने तथा सर्पदंश से किशनगंज में 10, अररिया में 20, पूर्वी चंपारण में 11, सुपौल, मधुबनी एवं कटिहार में चार-चार , पश्चिम चंपारण में 14, दरभंगा में तीन और सीतामढ़ी जिले में सात लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। हालांकि आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बाढ़ से अबतक 51 लोगों की मौत होने की पुष्टि की गयी है। बाढ़ के कारण पश्चिम चंपारण जिले का गोरखपुर से रेल संपर्क अभी भी टूटा हुआ है वहीं किशनगंज रेलवे स्टेशन के निकट रेल पटरी पर बाढ़ का पानी आ जाने से पिछले तीन दिनों से रेल परिचालन ठप है। किशनगंज में राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी के तेज बहाव के कारण उत्तर पूर्वी भारत का संपर्क टूट गया है। इसी तरह मुजफ्फरपुर जिले में बागमती नदी के रिंग बांध के क्षतिग्रस्त हो जाने से गायघाट के तीन पंचायतों का कल से ही जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। शिवदाहा पंचायत पूरी तरह से टापू नजर आ रहा है और यहां के लोगों को नौकाओं की मदद से ऊंचे स्थानों पर ले जाया गया है। निकट के कुछ अन्य गांवों में भी बाढ़ का पानी फैल गया है। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा साहेबगंज में लाल निशान से 34, कमला बलान झंझारपुर में 158, अधवारा समूह कमतौल में 120, कोसी बलतारा में 213, बागमती बेनीबाद में 75, महानंदा ढ़ेंगरा घाट में 125 और गंडक नदी डुमरिया घाट में 133 सेंटीमीटर ऊपर है। इसके अलावा गंगा, घाघरा, गंडक, बुढ़ी गंडक, अधवारा समूह और कोसी नदी के जलस्तर में कुछ स्थानों पर जहां लगातार वृद्धि हो रही है वहीं कुछ स्थानों पर इसमें कमी भी देखी जा रही है। केन्द्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के सूत्रों ने बताया कि गंडक नदी में आये उफान के कारण गोपालगंज जिले के बरौली प्रखंड में सलेमपुर छरकी क्षतिग्रस्त हो गया। क्षतिग्रस्त स्थल पर सिंचाई विभाग के अभियंता मरम्मति कार्य के बाद लगातार चौकसी बरत रहे हैं। इस बीच मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के पूर्वानुमान में कहा है कि बिहार की सभी नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में साधारण से मध्यम वर्षा होने की संभावना है । 

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