बिहार में बाढ़ का रौद्र रूप, सेना जुटी मदद में

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पटना 14 अगस्त, नेपाल एवं बिहार के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार जारी मूसलाधार बारिश के कारण राज्य की सभी प्रमुख नदियों के खतरे के निशान से ऊपर रहने से 11 जिलों में बाढ़ के रौद्र रूप को देखते हुये युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य में सेना के साथ ही राष्ट्रीय आपदा बल (एनडीआरएफ) को लगा दिया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि पूर्णिया जिले में बाढ़ से प्रभावित लोगों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए वायुसेना के दो हेलीकॉप्टर लगाये गये हैं। हेलीकॉप्टर के माध्यम से पीड़िताें के बीच खाद्य सामग्री के साथ ही रोजमर्रा की आवश्यक सामग्री भी गिराई जा रही है। जगह-जगह राहत शिविर भी बनाये गये हैं। इसी तरह किशनगंज जिले में बचाव एवं राहत कार्यों में प्रशासन की मदद के लिए कल रात ही पटना के दानापुर सैनिक छावनी से सेना के जवानों को भेजा गया है। सेना के जवान जिले के दूर-दराज के प्रभावित इलाकों में लोगों की हरसंभव मदद कर रहे हैं। सेना के साथ चिकित्सकों का चलंत दस्ता भी इलाके में दौरा कर रहा है। वहीं, कटिहार जिले में मदद के लिए सेना की तीन कंपनियाें को लगाया गया है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज सर्वाधिक प्रभावित अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया जिले का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग और सामान्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों में केंद्र सरकार की ओर से की गई त्वरित मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आई सेना और एनडीआरएफ की टीमों को प्रभावित जिलों में तैनात कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों में और तेजी लाई जाएगी। कोसी, गंडक, कमला बलान, बागमती और महानंदा नदी के खतरे के निशान से ऊपर रहने के साथ ही आये उफान से अररिया, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, खगड़िया, सुपौल, सहरसा, मधुबनी, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और सीतामढ़ी जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई हैं। इन जिलों में लाखो लोग बाढ़ की चपेट में हैं। प्रभावित इलाकों के लोग ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों पर शरण लिये हुये हैं। 



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सूत्रों के अनुसार, हालांकि पिछले कुछ देर से रुक-रुक कर हो रही बारिश से प्रभावित जिलों में नदियों के जलस्तर में थोड़ी कमी देखी जा रही है। वहीं, बारिश से बेघर हुये लोगों के साथ ही पशुओं को काफी कठिनाई हो रही है। प्रभावित इलाकों में सबसे अधिक कठिनाई पशुओं के चारे की बनी हुई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से सेना की सात कंपनी के अलावा 690 जवान और 72 नौकाओं के साथ एनडीआरएफ की 22 टीम तथा 440 जवान और 72 नाैकाओं के साथ राज्य आपदा बल (एसडीआरएफ) की 13 टीम को लगाया गया है। एनडीआरएफ की कुछ टीम को सीतामढ़ी, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर जिले में भी बचाव कार्य में लगाया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सकों की छुट्टी रद्द कर दी गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, लगातार हो रही भारी बारिश तथा बराजों से छोड़े गये अतिरिक्त पानी के कारण कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान और महानंदा नदी उफान पर है। डुमरियाघाट में गंडक का जलस्तर आज लाल निशान से 88, बेनीबाद में बागमती का 88, झंझारपुर में कमला बलान का 269, कोसी का बसुआ में 132 और बलतारा में 183, महानंदा नदी ढेंगराघाट में 251 और झावा में 250 सेंटीमीटर ऊपर है। इसी तरह गंगा समेत राज्य की आठ नदियों के जलस्तर में 17 स्थानों पर लगातार वृद्धि हो रही है। गंगा पटना के गांधीघाट और भागलपुर के कहलगांव में, घाघरा सारण के छपरा में, गंडक मोतिहारी के चटिया, गोपालगंज के डुमरियाघाट एवं मुजफ्फरपुर के रेवाघाट में, बूढ़ी गंडक मोतिहारी के लालबगियाघाट, मुजफ्फरपुर के अहिरवलिया और सिकंदरपुर में, बागमती मुजफ्फरपुर के बेनीबाद और दरभंगा के हायाघाट में, अधवारा समूह दरभंगा के कमतौल एवं एकमीघाट में, कोसी खगड़िया के बलतारा और कटिहार के कुरसेला में तथा महानंदा नदी का जलस्तर पूर्णिया के ढेंगराघाट एवं कटिहार के झावा में बढ़ रहा है। आयोग के अनुसार नेपाल में कोसी नदी पर बने बारा बराज से आज एक लाख 92 हजार 900 क्यूसेक और बिहार में वीरपुर बराज से दो लाख 63 हजार 100 क्यूसेक तथा गंडक नदी में बाल्मीकिनगर बराज से तीन लाख 47 हजार 400 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वहीं, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के पूर्वानुमान कहा है कि बिहार की सभी नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में साधारण से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। वहीं, केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कमला बलान नदी में अप्रत्याशित पानी छोड़े जाने से नदी के दायां तटबंध के 73.54 किलोमीटर एवं 74.6 किलोमीटर पर बांध क्षतिग्रस्त हो गया है। महानंदा नदी के जलस्तर में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण कटिहार के मीनापुर प्रखंड में डगरुआ के निकट, कदवा प्रखंड के शिवगंज गांव में और गुढ़ौनी प्रखंड में आजमनगर के निकट महानंदा नदी का दायां तटबंध टूट गया है। सूत्रों ने बताया कि इसी तरह परमान नदी के जलस्तर में हुई भारी वृद्धि के कारण पूर्णिया जिले के पीपरपाती और एकमा गांव के निकट खाताहट तटबंध तथा बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से भादाडीह गांव के निकट नदी का तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया है। क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मति के लिए जल संसाधन विभाग के अभियंता लगे हुये हैं। अन्य सभी तटबंध सुरक्षित हैं। कटिहार से प्राप्त सूचना के अनुसार, बाढ़ के कारण जिले के 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुये हैं। जिले के अमदाबाद, मनिहारी, आजमनगर, बलरामपुर, कदवा और डंडखोरा पंचायत पूरी तरह बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं, कदवा और आजमनगर प्रखंड में बाढ़ की चपेट में आ जान से एक वृद्ध समेत तीन लोगों को मौत हुई है। कटिहार स्टेशन परिसर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से एहतियात के तौर पर कल से ही ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया है। 



पूर्णिया से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, महानंदा, कोठी, कनकई और परमार नदियो में उफान से आई बाढ़ के कारण जिले में आठ लाख से अधिक लोग प्रभावित हुये हैं। तीन प्रखड़ वायसी, बैसा और अमोर में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गयी है। जिलाधिकारी प्रदीप कुमार झा ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित इलाकों में राज्य आपदा बल (एसडीआरएफ ) को लगाया गया है। प्रभावित लोगों के लिये तत्काल दस राहत शिविर लगाये गये हैं, जहां चिकित्सकों की तैनाती गयी है। इसी तरह पशु चिकित्कों को भी राहत कार्य में लगाया गया है। जिले में रेल एवं सड़क यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया है। वहीं, अररिया और किशनगंज में बाढ़ ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। दरभंगा के जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि कमला बलान नदी का दायां तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे तीन प्रखंड के 15 पंचायतों में बाढ़ का पानी घुसने से करीब एक लाख लोग प्रभावित हुये हैं। संबंधित अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के साथ आपात बैठक की गई है। जिला प्रशासन राहत कार्य में लग गया है। सहरसा से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, जिले के नभट्टा, महिषी, सलखुआ और सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के पूर्वी कोसी तटबंध के आसपास का इलाका पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गया है। रेलवे सूत्रों ने बताया कि पूर्व-मध्य रेलवे के सहरसा-मानसी रेलखंड के खानगो हॉल्ट के निकट रेलवे ट्रैक पर पानी का दबाव बना हुआ है। सुपौल से प्राप्त सूचना के अनुसार, जिले के छह प्रखंड सुपौल, किशनपुर, सरायगढ़-भपटियाही, मरौना और बसंतपुर में बाढ़ का पानी घुस जाने से करीब दो लाख 60 हजार 689 लोग प्रभावित हुये हैं। राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं। सूत्रों ने बताया कि जदिया के निकट सुरसर नदी की तेज धारा से सुपौल-अररिया सड़क मार्ग 376ई पर एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। खगड़िया से प्राप्त सूचना के अनुसार, जिले के अलौली, खगड़िया, मानसी, चौथम, परवत्ता, बेलदौर और गोगरी प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से करीब दो लाख लोग प्रभावित हुये हैं। जिला प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थाना पर पहुंचाया जा रहा है। समस्तीपुर से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, कोसी कमला और करेह नदियों के जलस्तर मे वृद्वि से जिले के बिथान प्रखंड के चार पंचायतो के करीब 20 गांवों मे बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से करीब चालीस हजार लोग प्रभावित हुये हैं। इन गांवों के लोग पशु और अपने समानों के साथ ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं। वहीं, बिथान थाना क्षेत्र के तेलनी ढाला के पास करेह नदी मे सिया राम महतो (60 वर्ष) की डूबकर मौत हो गई। बेतिया से प्राप्त सूचना के अनुसार, पश्चिम चंपारण जिले के 15 प्रखंडों के बाढ़ की चपेट में आने से करीब 20 लाख लोग प्रभावित हुये हैं। जिले के बगहा 2, रामनगर, नरकटियागंज, मैनाटांड़, लौरिया, सिकटा, चनपटिया, मझौलिया, नौतन, बैरिया, पिपरासी, ठकराहां, भितहां एवं मधुबनी एवं योगापट्टी प्रखंड में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पूर्व-मध्य रेलवे के मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज-गोरखपुर रेलखंड में आज भी ट्रेनों का परिचालन ठप रहा। बाढ़ से जिले में अबतक आठ लोगों की मौत का अनुमान है इनमें से अभी तक पांच के शव बरामद किये जा चुके हैं जबकि तीन अभी भी लापता हैं। शिवहर से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, बगमती नदी का तटबंध टूट जाने से जिले में शिवहर और पुरनहिया प्रखंड के 12 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। शिवहर शहर में भी बाढ़ का पानी अस्पताल और थाना में दो फुट ऊपर बह रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग 104 और राज्य उच्च पथ 54 पर पानी का बहाव तेज होने से शिवहर का मोतिहारी और सीतामढ़ी से सड़क संपर्क टूट गया है। वहीं, मंडल कारा अधीक्षक अनिल कुमार दास ने बताया कि बाढ़ का पानी जेल में घुस जाने के कारण कैदियों को ऊपरी मंजिल पर शिफ्ट किया गया है। 
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