बिहार में बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा पांच सौ के पार

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पटना 29 अगस्त,  बिहार में बाढ़ग्रस्त 19 जिलों में सरकार की ओर से युद्ध स्तर पर जारी राहत एवं बचाव कार्य के बीच जहां अबतक 514 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं करीब एक करोड़ 71 लाख प्रभावित हुये हैं। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि गंगा समेत राज्य की सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर अधिकतर स्थानों पर या तो स्थिर है या फिर उनमें कमी का रुख देखा जा रहा है । हालांकि कई स्थानों पर गंगा ,घाघरा, बूढ़ी गंडक एवं बागमती नदी खतरे के लाल निशान से अब भी उपर बह रही है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में रह रहे लोगों के लिये इस बात की राहत है कि पिछले 24 घंटों के दौरान मामूली वर्षा हुयी है । राज्य के बाढ़ग्रस्त 19 जिलों पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार, मधेपुरा, सुपौल, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सहरसा, खगड़िया, सारण, सीवान एवं समस्तीपुर में आई बाढ़ में अबतक 514 लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ की इस विभीषिका में सबसे अधिक 95 लोगों की मौत अररिया जिले में हुई है। वहीं, मृतकों की संख्या सीतामढ़ी में 47, पश्चिम चंपारण में 42, कटिहार में 40, पूर्वी चंपारण में 32, मधुबनी, सुपौल एवं मधेपुरा में क्रमश: 28 ,16, 29, दरभंगा में 37, किशनगंज में 24, पूर्णिया में 44, गोपालगंज में 20 लोगों की मौत हुयी है । 


आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बाढ़ से अबतक एक करोड़ 71 लाख लोग प्रभावित हुये हैं। सबसे अधिक 24.08 लाख लोग पूर्वी चंपारण में प्रभावित हुये हैं। वहीं, पूर्णिया में प्रभावित हुये लोगों की संख्या 12.31 लाख, अररिया में 17.5 लाख, कटिहार में 20.08 लाख, दरभंगा में 21.21 लाख, सुपौल में 3.98 लाख, पश्चिम चंपारण में 7.19 लाख, मुजफ्फरपुर में 8.69 लाख, किशनगंज में 10.10 लाख, मधेपुरा में 3.38 की आबादी प्रभावित है । बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है तथा अबतक कुल 116 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जिसमें एक लाख 38 हजार 602 लोगों ने शरण ली है। राहत शिविर में नहीं रहे रहे बाढ़ प्रभावितों के लिए 435 सामुदायिक रसोईघर चलाए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक दवाएं, ब्लीचिंग पाउडर एवं सर्पदंश से संबंधित दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दी गई हैं। वहीं प्रभावित पशुओं के टीकाकरण एवं चारे की भी व्यवस्था की जा रही है। इसबीच केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर गांधीघाट में 78, हाथीदह में 97, कहलगांव में 37 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं गंडक नदी का जलस्तर डुमरियाघाट में 18, बूढ़ी गंडक अहिरवलिया में 86, अधवारा समूह कमतौल में 08 और महानंदा नदी का जलस्तर झावा में खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर नीचे रिकॉर्ड किया गया। आयोग का कहना है कि इन नदियों के जलस्तर या तो स्थिर रहेगा या फिर उनमें गिरावट का रुख आयेगा । हालांकि इनमें से कई नदियों का जलस्तर कई जगहों पर अब भी उपर बना हुआ है । वहीं, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के पूर्वानुमान में बताया कि बिहार के सभी नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में हल्की वर्षा होने की संभावना है। 


बिहार सरकार ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिये एक हजार 935 करोड़ रुपये स्वीकृत किये हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया। बैठक के संबंध में जानकारी देते हुए मंत्रिमंडल सचिवालय के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने बताया कि बाढ़ के मद्देनजर बिहार आकस्मिकता निधि से 1935 करोड़ रुपये अग्रिम की स्वीकृति दी गयी है। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के अंदर सभी पीड़ित परिवार को अनुदान राहत का छह हजार रुपया दे दिया जायेगा । इनमें तीन हजार रुपये खाद्यान के लिये दिये गये हैं जबकि शेष तीन हजार रुपये कपड़े और बर्तन के लिये हैं । इससे पूर्व शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद राज्य को 500 करोड़ रुपए की सहायता दी थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को दो लाख रुपए एवं गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपए की सहायता देने का भी ऐलान किया गया था। प्रधानमंत्री ने नुकसान के आकलन के लिए एक केंद्रीय दल भेजने का भी आश्वासन दिया था। साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली ढांचे को शीघ्र ठीक करने के लिए भी केन्द्र ने राज्य सरकार को हर संभव मदद का भी भरोसा दिया। 
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