कैबों के बढ़ते इस्तेमाल से घटेगी यात्री कारों की बिक्री : रिपोर्ट

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नयी दिल्ली 09 अगस्त, कैबों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण वर्ष 2030 तक देश में यात्री कारों की बिक्री में डेढ़ फीसदी सालाना की चक्रवृद्धि गिरावट दर्ज की जायेगी। साख निर्धारक एवं बाजार अध्ययन कंपनी क्रिसिल ने आज जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में बताया कि निजी कारों की तुलना में कैब औसतन ज्यादा दूरी तय करते हैं। देश में लोग तकरीबन 10 साल में कारों को पुरानी मान लेते हैं जो महज एक लाख से एक लाख 20 हजार किलोमीटर तक चली होती है। आम तौर पर एक कार की लाइफ एक लाख 80 हजार से दो लाख किलोमीटर मानी जाती है। कैबों के बढ़ते चलन से देश में भी कारों द्वारा तय की गयी औसत दूरी बढ़कर इतनी हो जायेगी। यदि यह मान लिया जाये कि यात्रियों द्वारा तय की जाने वाली औसत दूरी मौजूदा स्तर पर ही रहेगी, वर्तमान कारों को ज्यादा चलाने से कम कारों की जरूरत होगी। इससे नये कारों की माँग कम होगी तथा उनकी रिप्लेसमेंट का समय बढ़ेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि कैबों के ज्यादा इस्तेमाल से पार्किंग की समस्या भी कम होगी, विशेषकर एग्रीगेटर कैबों के इस्तेमाल से। प्रति किलोमीटर लागत घटने से लोग कैबों में यात्रा करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। शेयर वाले एग्रीगेटर कैब 11 रुपये प्रति किलोमीटर तक पर उपलब्ध हैं। क्रिसिल ने कहा है कि देश में बसों, मेट्रो और निजी दुपहिया वाहन पर प्रति किलोमीटर लागत 2.5 रुपये है जबकि तिपहिया वाहन पर लागत 12.5 रुपये प्रति किलोमीटर है जो बहुत बड़ा अंतर है। इसीलिए लोग बचत और आराम के लिए कैब की ओर रुख कर रहे हैं।


रिपोर्ट के अनुसार, यात्री वाहन निर्माता कंपनियों को अपनी रणनीति में बदलाव की जरूरत होगी। कैब एग्रीगेटरों की ओर से आने वाली माँग कुल माँग के 30 प्रतिशत पर पहुँच जायेगी और कंपनियों को अपने वाहन उनके हिसाब से बनाने होंगे जो ज्यादा माइलेज देते हों, ज्यादा चलें और अधिक विश्वसनीय हों। इनमें यात्रियों के साथ चालकों के आराम का भी ध्यान रखना होगा क्योंकि कैबों के चालक ज्यादा लंबे समय तक ड्राइविंग करते हैं। कुलपुर्जों की उपलब्धता बढ़ाकर और सर्विसिंग का समय कम करके बिक्री बाद सेवाओं में सुधार की भी जरूरत होगी।
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