कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने गोरखपुर त्रासदी की निष्पक्ष जांच की मांग की

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नयी दिल्ली,14 अगस्त, कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने गोरखपुर अस्पताल त्रासदी की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने की आज मांग करते हुए कहा कि इसके लिए उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह को इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अजय माकन ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक नियमित ब्रीफिंग में कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकारें संवेदनहीन है। गोरखपुर त्रासदी में अभी 65 बच्चों की मौत हो चुकी है लेकिन भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह इसे छोटा मोटा हादसा मानते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत पर दंड संहिता के तहत ईरादतन हत्या से संबंधित धारा में प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और इसके लिए आश्वयक है कि राज्य के मुख्यमंत्री अौर स्वास्थ्य मंत्री अपने पद से इस्तीफा दे दें। उन्हाेंने कहा कि इन दोनों के पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। श्री माकन ने कहा कि भाजपा की सरकारों को गोरखपुर त्रासदी के संबंध में लगातार चेतावनी दी जाती रही लेकिन इन पर ध्यान नहीं दिया गया। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अप्रैल 2016 में लोकसभा में गोरखपुर में बच्चों की मौत का मामला उठाया था और इस पर तत्काल ध्यान देनी की मांग की थी। उन्होंने कहा कि गाेरखपुर के अस्पताल में आक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने के संबंध में श्री आदित्यनाथ को दो पत्र लिखे गए थे जिनपर उन्होंने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा,“ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि वह सबसे पहले गोरखपुर त्रासदी के लिए लोगों से माफी मांगेंगे।” कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें और नेता संवेदनहीन हैं और गोरखपुर त्रासदी के संबंध में लापरवाही बरती गयी है। संबंधित मेडिकल कालेज ने राज्य सरकार से 35 करोड़ रुपए की मांग की थी और इस संबंध में राज्य सरकार को पत्र लिखा था। राज्य सरकार ने इस संबंध में केंद्र सरकार से धन मांगा है लेकिन कालेज को इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) सचिवालय द्वारा आज जारी बयान में कहा गया कि गोरखपुर मामले की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जांच करायी जानी चाहिए और देाषी व्यक्तियों को सजा देने के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार की खामियों का भी पता लगाया जाना चाहिए। पार्टी ने कहा है कि इस घटना को दबाने के लिए इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं कि उस अस्पताल में रोजाना औसतन 20 बच्चे मरते हैं लेकिन इस तरह का दावा गलत है। इस बीच राजधानी के नागरिक समाज ने 16 अगस्त को जंतर मंतर से इंडिया गेट तक मारे गए बच्चों के समर्थन में उत्तर प्रदेश सरकार की विफलता पर एक कैंडल मार्च निकालने का फैसला किया है। नागरिक समाज इस घटना की पुरजोर निंदा करता है।

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