देश भर की नजर अब भोपाल पर, मीटिंग में ही करेंगे फैसला : आरिफ मसूद

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भोपाल, 22 अगस्त, उच्चतम न्यायालय के तीन तलाक पर आज दिए फैसले के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आगामी 10 सितंबर को भोपाल में बैठक की घोषणा के बीच मध्यप्रदेश में बोर्ड की वर्किंग कमेटी के सदस्य आरिफ मसूद ने कहा कि बैठक की तैयारी शुरु कर दी गई हैं और उसी के बाद कोई फैसला होगा। श्री मसूद ने दूरभाष पर यूनीवार्ता से कहा - बोर्ड उच्चतम न्यायालय के पहले फैसले का स्वागत करता है, जहां तक तीन तलाक को असंवैधानिक करने की बात है, उस पर बोर्ड ने वर्किंग कमेटी की बैठक का ऐलान किया है, 10 सितंबर कोे होने वाली बैठक के बाद ही कोई फैसला होगा। - उन्होंने कहा कि न्यायालय ने छह महीने में कानून बनाने संबंधित जो पहला फैसला दिया, वह स्वागतयोग्य है, अदालत ने कानून की लड़ाई में बोर्ड का साथ दिया, लेकिन अब सबकी नजरें भोपाल पर रहेंगी। श्री मसूद के मुताबिक बोर्ड ने उन्हें इस बैठक की जिम्मेदारी सौंप दी है और उन्होंने इसके लिए तैयरियां भी शुरु कर दी हैं। इसके पहले आज सुबह उच्चतम न्यायालय ने बहुमत के अपने फैसले में तलाक-ए-बिदअत (लगातार तीन बार तलाक कहने की प्रथा) को असंवैधानिक करार दिया था। पांच सदस्यीय संविधान पीठ के तीन सदस्यों (न्यायमूर्ति रोहिंगटन एफ नरीमन, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ) ने तलाक-ए-बिदअत को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह प्रथा गैर-इस्लामिक है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे एस केहर ने पहले अपना फैसला सुनाते हुए सरकार को तीन तलाक के मामले में कानून बनाने की सलाह दी और छह माह तक तलाक-ए-बिदअत पर रोक लगाने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति केहर ने कहा कि यदि सरकार छह महीने में कानून नहीं बना पाती है तो उसकी यह रोक जारी रहेगी, लेकिन पीठ में शामिल तीन अन्य न्यायाधीशों ने बाद में अपना फैसला सुनाते हुए तलाक-ए-बिदअत को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया। तीनों न्यायाधीशों ने इस प्रथा को असंवैधानिक और गैर-इस्लामिक करार दिया। न्यायालय के निर्णय के तत्काल बाद बोर्ड ने कहा कि वह फैसले का विधिक अध्ययन कर 10 सितंबर को भोपाल में बैठक में फैसला करेगा। बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने लखनऊ में “यूनीवार्ता” को बताया कि 10 सितम्बर को भोपाल में होने वाली बैठक में तीन तलाक के सम्बन्ध में मुल्क के कानून को ध्यान में रखते हुए शरीयत के दायरे में कोई फैसला लिया जा सकता है, हांलाकि इससे पहले उच्चतम न्यायालय के निर्णय का विधिक अध्ययन कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रारम्भिक तौर पर बोर्ड का मानना है कि पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिये, लेकिन बोर्ड यह भी चाहता है कि मुल्क के कानून का भी पूरी तरह पालन होना चाहिये। दस सितम्बर को भोपाल में इस्लामिक विद्वान और कानूनों के जानकार बैठेगें। मिल बैठकर कोई निष्कर्ष निकालेंगे।

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