सजावटी मछली पालन में रोजगार के अवसर

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नयी दिल्ली 30 जुलाई, वैज्ञानिक ढंग से सजावटी मछली पालन से न केवल बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है , बल्कि इसका व्यापक पैमाने पर निर्यात कर विदेशी मुद्रा भी अर्जित की जा सकती है । संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 350 से 400 प्रकार की सजावटी मछलियों का कारोबार किया जाता है । विश्व में 800 किस्म की अलंकारिक मछलियों की पहचान की गयी है , जिनमें से लगभग 250 प्रजातियां देश में पायी जाती है । लगभग 180 किस्म की ये मछलियां अपने आकृति एवं रंगों के कारण लोकप्रिय है । हिन्दू धर्म में मछलियों को बहुत ही शुभ माना गया है जबकि इसाई और बौद्ध धर्म में भी इसका विशेष महत्व है । बंगाली समाज में इसे प्रजनन का प्रतीक माना जाता है । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय नैनीताल के अनुसार सजावटी मछलियों को उनके सुन्दर रंग , आकृति और स्वभाव के कारण “जीवित जेवर ” कहा जाता है । अमेरिका के 72 लाख और यूरोप के 32 लाख घरों में एक्वेरियम हैं जिनमेंं सजावटी मछलियों को रखा जाता है । वास्तुशास्त्र के अनुसार मछलियों को घर में पालने से सुख -सम्पत्ति में वृद्धि होती है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है । दुनिया के 140 से अधिक देशों में सजावटी मछलियों का कारोबार होता है तथा अमेरिका , जापान और यूरोपीय देश इसके व्यापार में अग्रणी हैं । विश्व में सजावटी मछलियों का जो कारोबार होता है उसका मात्र एक प्रतिशत हिस्सा भारत में होता है । समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीडा) की एक रिपोर्ट के अनुसार देश से अमेरिका , जापान , सिंगापुर , चीन , जर्मनी इंगलैंड , थाईलैंड , ताईवान , हांगकांग , नीदरलैंड , श्रीलंका , फ्रांस , बंगलादेश , नेपाल , स्विटजरलैंड तथा कई अन्य देशों को सजावटी मछलियों का निर्यात किया जाता है । नाबार्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार अलंकारिक मछलियों के कारोबार में 20 लाख डालर तक की वृद्धि हो सकती है ।


देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में सबसे अधिक सजावटी मछलियां पायी जाती है । उत्तराखंड की नदियों में भी 15 से अधिक किस्म की सजावटी मछलियां पायी जाती है । विदेशी सजावटी मछलियों में गोल्ड फिश , कोई कार्प , गप्पी ,गम्बूसिया , पिराना , अरोवाना , ऐलिगेटरगार आदि प्रसिद्ध है । गोल्ड फिश और कई सजावटी मछलियों की कीमत 2500 रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार सजावटी मछलियों के पालन और व्यापार की शुरुआत एक से डेढ़ लाख रुपए में की जा सकती हैं। कुछ मुख्य प्रजातियों के मछली जीरा 100 रुपए से 500 प्रति पीस होता है। व्यावसायिक पालन के लिए मादा और नर मछलियों का चार एक के अनुपात को अच्छा माना जाता है । विशेषज्ञों के अनुसार एक्वेरियम में जीरा डालने के बाद चार से छह माह बाद इन्हें बेचा जा सकता है।
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