बाढ़ राहत कार्य के प्रति बिहार सरकार उदासीन, स्थिति गंभीर : कुणाल

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पटना 14 अगस्त, भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ ने उत्तर बिहार के जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. तमाम दावों के बावजूद सरकार का आपदा प्रबंधन असफल साबित हो चुका है और लाखों लोग बेघर हो गये हैं. अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है व मवेशियों का भी भारी नुकसान हुआ है. लेकिन सरकार अभी भी बाढ़ राहत कार्य के प्रति उदासीन बनी हुई है. हमारी मांग है कि बाढ़ राहत कार्य को सरकार सर्वोपरि कार्यभार समझते हुए युद्ध स्तर पर राहत कार्य चलाए. चंपारण, सीतामढ़ी, मिथिलांचल, सीमांचल आदि के इलाके भयानक रूप से बाढ़ की चपेट में हैं. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र अथवा राज्य सरकार बाढ़ का स्थायी समाधान नहीं करना चाहती है. नीतीश कुमार फरक्का बांध को जिम्मेवार ठहराकर अपनी जिम्मेदारी से भागते रहे हैं. अब केंद्र व पटना में उन्हीं की सरकार है, ऐसे में बाढ़ के स्थायी समाधान से नीतीश जी मंुह नहीं मोड़ सकते. हमने पहले ही कहा है कि फरक्का सहित बागमती व अन्य नदियों पर बन रहे तटबंध से भी लोगों को भारी नुकसान होता है. लेकिन लोगों की इच्छा के विपरीत बागमती पर तटबंध निर्माण कार्य होता रहता है. दरअसल इन सरकारों को बाढ़ का स्थायी समाधान करना ही नहीं है.


चंपारण में बाढ़ का कहर, भाकपा-माले की रिपार्ट
पारण से भाकपा-माले नेता वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने बाढ़ की जो रिपोर्ट भेजी है, वह बेहद गंभीर है. पूरे चंपारण और खासकर नरकटियागंज अनुमंडल में भयंकर बाढ़ से जान-माल की भयानक क्षति हुई है. एक तरफ लोग बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, दूसरी ओर भाजपा-जदयू सरकार संवेदनहीन बनी हुई है. जिसकी वजह से अकेले चंपारण में अब तक दर्जनों लोगों की मौतें हो चुकी हैं.नरकटियांगज अनुमंडल प्रशासन की नाक के ठीक नीचे नन्दपुर मुहल्ले के वार्ड नं 4 के दो लड़के एक महिला को बचाने के क्रम में डूब कर मर गए. जिसमें एक माहताब आलम का शव आज मिल सका है, लेकिन उसके साथ डूबने वाला दूसरा लड़का अजय कुमार की लाश अभी तक नहीं मिल सकी है. जबकि 13 अगसत की सुबह से ही यह साफ हो गया था कि नरकटियागंज और गौनाहा के एक गांव से दूसरे गांव का संपर्क भंग है, एक वार्ड से दूसरे वार्ड में आना जाना बंद है, तब भी अनुमंडल प्रशासन ने तो एनडीआरएफ टीम को लगाया, न नावों के जरिए संपर्क बनाने की कोशिश हुई और न ही हेलीकाप्टर से बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों को राहत प्रदान करने की कोशिश की. शहर के बगल के गांव में लोग फंसे रहे, लेकिन अनुमंडल पदाधिकारी कैंपस में गुहार लगाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर सके. मल्ही गांव का शिवचंद्र साह रात भर पेड़ पर ही रहा, सुबह लोगों ने उसे किसी तरह घर पहुंचाया. नरकटिया गांव के ललन पासवान डूब गये. उनकी लाश का भी अता-पता नहीं चला. अभी तमाम सड़कों पर आवागमन बंद है. जिला प्रशासन का मौसम पूर्वानुमान में घोषणा के बावजूद कोई मदद न कर पाना आपराधिक लापरवाही है. माले नेता ने मृतक परिवारों के परिजनों को 10-10 लाख रुपया मुआवजा देने, बेघर व राशनविहीन लोगों को प्लास्टिक, राशन, किरासन, आदि अविलंब व्यवस्था करने और सभी बाढ़ पीड़ितों को राशन के साथ-साथ जरूरी सामानों के लिए पांच-पांच हजार रुपया देने की मांग की है. उन्होंने ध्वस्त व कटाव पीड़ित लोगों के पुनर्वास की भी मांग की.

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