उच्च न्यायालय ने जय गुरूदेव के चेलों से कब्जा हटाने का निर्देश

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इलाहाबाद, 28 अगस्त, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश के मुख्य सचिव को मथुरा में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी)की भूखंड से बाबा जयगुरूदेव धर्म प्रचार संस्थान का अवैध कब्जा हटाने के लिए पुलिस बल की तैनाती का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा है कि कार्यवाही में भारी सुरक्षा बल तैनात किये जाए ताकि डेरा सच्चा सौदा जैसी घटना की पुनरावृत्ति उत्तर प्रदेश में न हो सके। साथ ही न्यायालय ने यूपी एसआईडीसी के रिजनल डायरेक्टर को भी आदेश दिया है कि रिहायशी कालोनी में औद्योगिक क्षेत्र में स्वीकृत पांच पार्क एवं खाली जमीन पर उद्योगों का आवंटन रद्द कर पार्क बहाल करे। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि उद्योगों के लिए उद्यमियों को अन्य स्थान पर जमीन दे या ब्याज समेत पैसा वापस करे। अदालत ने मुख्य सचिव व रिजनल डायरेक्टर से अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। याचिका की अगली सुनवाई 18 सितम्बर को होगी। न्यायमूर्ति अरूण टंडन तथा न्यायमूर्ति संगीता चन्द्रा की खण्डपीठ ने राजेन्द्र सिंह की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए आज यह आदेश दिया। अदालत ने मुख्य सचिव से कहा है कि एक सप्ताह में संस्थान को कारण बताओ नोटिस दे और उसके एक हफ्ते बाद जितनी भी जमीन पर अवैध कब्जा पाया जाए, हटाकर निगम को कब्जा वापस करे। गौरतलब है कि पन्नापुर, महौली गांवों की जमीन निगम के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकास के लिए अधिगृहीत कर दी गयी। योजना के तहत रिहायशी कालोनी में पांच पार्क छोड़े गये थे। बाद में निगम ने पार्क उद्योग के लिए आंवटित कर दिया और पार्क को शिफ्ट करने का फैसला लिया। पार्क उसी जमीन पर शिफ्ट किया जा रहा है जिस पर जयगुरूदेव के अनुयायियों ने कब्जा कर रखा है। उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा घनी आबादी में ताजा हवा जरूरी है। ताजी हवा अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में शामिल है। कानूनन पार्क जमीन उद्योग के लिए नहीं दी जा सकती। पार्क के स्वरूप के साथ छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने अवैध कब्जे की जमीन को खाली कराकर निगम को सौंप कर मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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