धर्म स्वतंत्र एवं भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पारित, सभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

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रांची 12 अगस्त, झारखंड विधानसभा में झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक 2017 और भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार (झारखंड संशोधन) विधेयक 2017 समेत चार विधायकों को मंजूरी प्रदान करने के साथ ही आज विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी । विधानसभा में भोजनावकाश के बाद झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार संशोधन विधेयक, 2017 और झारखंड मूल्यवर्द्धित कर संशोधन विधेयक, 2017 को मंजूरी प्रदान कर दी गयी। जबकि झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक को प्रवर समिति के विचारार्थ भेजने का आग्रह झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के स्टीफन मरांडी ने किया , लेकिन सभा ने इसे प्रवर समिति को भेजे जाने के आग्रह को अस्वीकार करते हुए बिना कोई संशोधन के इसे पारित कर दिया। भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार (झारखंड संशोधन) विधेयक 2017 को भी प्रवर समिति को सौंपे जाने के लिए झामुमो, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल के 14 सदस्यों की ओर से प्रस्ताव आया, लेकिन सदन ने इसे खारिज करते हुए इस विधेयक को भी पारित कर दिया। हालांकि बाद में इससे नाराज झामुमो विधायकों ने सदन का बहिष्कार किया, वहीं कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के सदस्य अपने-अपने स्थान पर बैठे रहें । इस पांच दिवसीय मॉनसून सत्र के दौरान सात विधेयकों को मंजूरी प्रदान की गयी, जबकि मेडिकल प्रोटेक्शन बिल को विचार के लिए प्रवर समिति को सौंप दिया गया है। सत्र के दौरान पहले दो दिनों तक सदन में प्रश्नोत्तरकाल की कार्यवाही बाधित रही, लेकिन चौथे और पांचवें दिन सदन में कई अल्पसूचित और तारांकित प्रश्नों के अलावा ध्यानाकर्षण सूचना पर सरकार की ओर से जवाब आया। झारखंड विधानसभा के दशम् मॉनसून सत्र में सरकार ने सदन की भावना का सम्मान करते हुए कहा कि राज्य की जनता की आवश्यकता एवं आकांक्षा को पूरा करने की दिशा में हर सम्भव प्रयास कर रही है। 


इससे पहले सदन की कार्यवाही समाप्त होने से पहले मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि सरकार का सिद्धांत है सबका साथ , सबका विकास। उन्होंने कहा कि पारदर्शी शासन, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सरकार का मूलमंत्र है । राज्य सरकार के एक हजार दिन पूरे होने को हैं। झारखण्ड अब विकास की ओर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि देश भर में विकास वृद्धि दर में हम दूसरे स्थान पर हैं। जहां यह राज्य नकारात्मक कारणों से चर्चा में ज्यादा रहता था, वहीं अब हमारे राज्य को एक नई सकारात्मक पहचान मिल रही है। इस बदलते झारखण्ड के लिए सबके साथ और साझा प्रयास को मैं श्रेय देना चाहता हूं । उन्होंने कहा कि मेरा मानना है सत्ता सेवा के लिए और विरोध सुधार के लिए होना चाहिए। वस्तुतः लोकतंत्र में जनता स्वामी है और हम सेवक हैं। हम यहां सिद्धांत की राजनीति कर रहे हैं, सुविधा की नहीं। श्री दास ने कहा कि हमारा लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसमें वसुधैव कुटुम्बकम की भावना निहित है और हमारा संविधान मौलिक अधिकारों के साथ-साथ हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। जनप्रतिनिधि सदन में जनता की आवाज को अभिव्यक्त करते हैं। इस अभिव्यक्ति में जनकल्याण की भावना निहित रहती है। उन्होंने कहा कि हम सबों का एक ही उद्देश्य है, जनता की आशाए आकांक्षा और वेदना को ध्यान में रखते हुए उनकी सेवा करना । लोकतंत्र और संसदीय व्यवस्था देश की अनुभूत जीवन पद्धति है और यह हमारा जीवन दर्शन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समावेशी विकास के लिए वित्तीय प्रबंधन में आमजनों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने समाज को अंत्योदय का मंत्र दिया। यह वर्ष दीन दयाल उपाध्याय जी की जन्म शताब्दी वर्ष भी है, इसलिए सरकार इस वर्ष को गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। उन्होंने कहा कि विकास की किरण समाज के अन्तिम पायदान पर खड़े हर व्यक्ति तक पहुंचे, तभी उसे वास्तविक विकास माना जायेगा। इसलिए मैं सभी माननीय सदस्यों के सकारात्मक सुझावों का स्वागत करता हूं, चाहे वे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के सदस्य । 

श्री दास ने कहा कि सरकार के जन कल्याणकारी कार्य आम जनता तक पहूंचे यह प्रयास सभी माननीय सदस्यों का होना चाहिए। यही राज्य के समग्र विकास का मूलमंत्र है और तभी सम्भव है, जब सभी जनप्रतिनिधि दलगत भावना से आगे बढ़ कर सरकार का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार राज्य के सभी क्षेत्रों में संतुलित विकास एवं सहभागी प्रयास की अवधारणा को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है। सभी सदस्यों ने एक दूसरे को सुनने और बोलने देने की संसदीय परम्परा का निर्वहन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह नेता विरोधीदल एवं सभी दलों के नेता तथा माननीय सदस्यों केआभारी हैं जिनकी लोकहित की चिन्ता एवं सार्थक बहस विविध विधायी प्रक्रियाओं के माध्यम से सामने आई है। सभी माननीय सदस्यों ने सरकार को विभिन्न अवसरों पर सहयोग प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में भी इसी तरह का सहयोग मिलता रहेगा । श्री दास ने कहा कि झारखण्ड विधानसभा के दशम् मानसून सत्र की अवधि में कुल 467 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें से 84 अल्पसूचित, 269 तारांकित और 114 अतारांकित के रूप में स्वीकृत किए गए । सरकार ने सभी प्रश्नों एवं अन्य सूचनाओं का हर सम्भव उत्तर देने का प्रयास किया है। वहीं सदस्यों ने सदन में अनुपूरक बजट पर अपनी सहमति देकर विकास की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सहयोग किया है।  इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने पांच दिवसीय मॉनसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की ।

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