झारखंड विधान सभा में शोर शराबे के बीच प्रथम अनुपूरक बजट पेश

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रांची 09 अगस्त, झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन आज विपक्षी विधायकों के शोर-शराबे के बीच प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया गया। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ही संसदीय कार्यमंत्री सरयू राय ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 1987.74 करोड़ रुपये के प्रथम अनुपूरक बजट को पेश किया। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू द्वारा सदन से पारित छोटानागपुर काश्तकारी (सीएनटी) और संतालपरगना काश्तकारी (एसपीटी) अधिनियम संशोधन विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेजे जाने संबंधी संदेश से सभा को अवगत कराया। विधानसभा की कार्यवाही आज पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होने के साथ ही विपक्ष के कई सदस्य सीएनटी-एसपीटी संशोधन विधेयक को वापस लेने, विधानसभा में प्रस्तावित धर्म स्वतंत्र विधेयक और भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को निरस्त करने, किसानों की मौत और विधि व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों को लेकर नारेबाजी करते हुए आसन के निकट आ गये। इस दौरान सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने बांग्लादेशी घुसपैठियों और जबरन धर्म परिवर्त्तन किये जाने के मुद्दे को लेकर अपने स्थान पर खड़े होकर बात रखने की कोशिश करने लगे। सत्तारूढ़ गठबंधन के मुख्य सचेतक राधाकृष्ण किशोर ने विपक्षी सदस्यों द्वारा सदन की कार्यवाही बाधित किये जाने के प्रयास पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पिछले तीन सत्र से सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ जा रही है। उन्होंने सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया। विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नोत्तरकाल की कार्यवाही सुचारू रुप से चलने देने का आग्रह किया और सदन के व्यवस्थित नहीं होने पर कठोर कार्रवाई करने के लिए विवश होने की बात कही। श्री उरांव के लगातार प्रयास के बावजूद वेल में आकर हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्य अपनी सीट पर नहीं बैठे, जिसके कारण विधानसभाध्यक्ष ने अपराह्न 11 बजकर 17 मिनट पर सदन की कार्यवाही को अपराह्न 12 बजे तक के लिए स्थगित करते हुए सभी दल के नेताओं की बैठक अपने कक्ष में बुलायी। 


दोपहर 12 बजे सभा की कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन को अपनी बात रखने का मौका दिया।श्री सोरेन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने सदन को हाईजैक करने का प्रयास किया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के गठन के बाद से ही राज्य में लगातार गतिरोध जारी है और लोगों का आक्रोश सड़क से लेकर सदन तक देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इस विधानसभा में कई ऐसी घटनाएं भी हुई, जो अलग झारखंड राज्य गठन के 16-17 वर्ष में पहली बार हुई। उन्होंने कहा कि पहली बार कई विधायक निलंबित किये गये और कई विधायकों को विधानसभा की कोई समिति में स्थान नहीं मिला। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन की गरिमा बनाये रखने में विपक्ष की भी अहम भूमिका है लेकिन अफसोस की बात है कि सदन की कार्यवाही में सरकार की ओर से हस्तक्षेप का प्रयास किया जा रहा है। यही कारण है कि एक बार सत्र आहूत करने संबंधी अधिसूचना जारी हो जाती है और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से प्रश्न लेने की कार्रवाई को भी मंजूरी दे दी गयी लेकिन बाद में सत्र आहूत करने की तिथि ही बढ़ा दी जाती है और अध्यक्ष को फिर से प्रश्न लेने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सदन की कार्यवाही में सरकार के हस्तक्षेप को दर्शाता है। ऐसे में विपक्ष चुप नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि सीएनटी-एसपीटी संशोधन विधेयक को लेकर व्यापक विरोध नहीं होता तो शायद राज्यपाल भी इसे पुनर्विचार के लिए वापस नहीं करतीं। श्री सोरेन ने कहा कि साल भर से सीएनटी-एसपीटी का मुद्दा ज्वलंत बना हुआ है लेकिन राज्यपाल ने इस विधेयक को लौटा दिया और आज की कार्यसूची में इसे रखा गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अब भी यह संदेह है कि चोरी-छिपे कोई दूसरा रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भूमि संशोधन अधिनियम 2013 में संशोधन के प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दी लेकिन अखबारों में प्रकाशित खबरों के अनुसार कई मंत्रियों ने भी इस पर आपत्ति जतायी है। इस संशोधन विधेयक की कोई जरूरत ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये इस कानून में परिवर्तन जनसरोकार के लिए नहीं बल्कि उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। उन्होंने मांग की कि सीएनटी-एसपीटी संशोधन विधेयक सदन में वापस हो तथा प्रस्तावित भूमि संशोधन एवं धर्म स्वतंत्र विधेयक को भी निरस्त किया जाये। 

मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) के अरूप चटर्जी ने कहा कि सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में विधानसभा में कई विधेयक पारित हुए और कुछ ऐसे कानून बनाये गये, जो जनहित में नहीं है। उन्होंने शोरगुल के बीच ही डोमिसाइल, पंचायत स्वयंसेवक सदस्य, कमल क्लब के गठन समेत अन्य पारित विधेयकों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सदन में बहस के बाद ही कोई विधेयक को पारित किया जाना चाहिए। नवजवान संघर्ष मोर्चा के भानू प्रताप शाही ने कहा कि पिछले तीन सत्र से सभा की कार्यवाही बाधित है। जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में छोटे दलों को काफी कठिनाई होती है क्योंकि वे अपनी व्यक्तिगत छवि के आधार पर चुनाव जीत कर आते है। श्री शाही ने बताया कि इस दौरान उनके 42 पत्र सदन में आये लेकिन जवाब नहीं मिल पाया। भाजपा के राधाकृष्ण किशोर ने विपक्ष पर हठधर्मिता के साथ सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुये कहा कि सभी जानते है कि सदन की कार्यवाही कार्यसंचालन नियमावली से चलती है इसलिए सदन में किसी भी मुद्दे पर सार्थक बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को लगता है कि विपक्ष के किसी विधायक को विधानसभा की समिति में स्थान नहीं मिला है तो इस संबंध में वे अध्यक्ष से अलग से बात कर लें लेकिन कार्यवाही को बाधित नहीं करें। श्री किशोर ने भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के मुद्दे पर कहा कि राज्यसभा में बहुमत नहीं रहने के कारण यह संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका था लेकिन केंद्र सरकार ने कहा है कि राज्य सरकार यदि चाहे तो इसमें संशोधन कर सकती है। उन्होंने कहा कि देश के चार-पांच राज्यों में इस कानून में संशोधन भी किया गया है। जय भारत समानता पार्टी की गीता कोड़ा ने कहा कि सदन में किसी भी मुद्दे पर सार्थक पहल जरूरी है। उन्होंने कहा कि सदन में सवाल आने पर क्षेत्र में काम होते हैं। सदन की कार्यवाही बाधित होने से क्षेत्र के लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। नगर विकास मंत्री सी. पी. सिंह और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के साइमन मरांडी ने भी सदन के समक्ष अपनी बात रखी। संसदीय कार्यमंत्री सरयू राय ने झारखंड लोक सेवा आयोग के वित्तीय वर्ष 2015-16 के वार्षिक प्रतिवेदन की प्रति और प्रथम अनुपूरक बजट को सभापटल पर रखा। जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सभा की कार्यवाही को कल 10 अगस्त पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। 

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