रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ाने खिलाफ विपक्ष का बहिर्गमन

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नयी दिल्ली 01 अगस्त, सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलिंडर के दाम प्रति महीने चार रुपये बढ़ाने तथा अगले साल मार्च से इस पर सब्सिडी पूरी तरह समाप्त करने की सरकार की योजना के विरोध में शून्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया तथा इस मुद्दे पर सरकार द्वारा कोई जवाब नहीं मिलने पर सदन से बाहर चले गये। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कई सदस्यों से इस विषय पर बोलने के अनुरोध पर शून्यकाल में कुछ सदस्यों को यह मुद्दा उठाने की अनुमति दी। कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है। सरकार मार्च 2018 तक रसोई गैस सिलिंडर पर सब्सिडी समाप्त करना चाहती है। इससे सिर्फ गृहणियाँ प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा “अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल के दाम में भारी गिरावट हुई है। इसके बावजूद सरकार सब्सिडी समाप्त कर रही है।” उन्होंने सरकार से फैसला वापस लेने की माँग की तथा लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि वह इस संबंध में मंत्री से तत्काल बयान देने के लिए कहें। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि सब्सिडी समाप्त किये जाने से आम लोगों पर काफी बोझ बढ़ेगा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की पी.के. श्रीमथी टीचर और रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन.के. प्रेमचंद्रन ने भी सरकार से अपना फैसला वापस लेने की माँग की। श्री प्रेमचंद्रन ने कहा कि सरकार ने इस साल मार्च में तेल विपणन कंपनियों को रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ाने के निर्देश दिये थे। पहले सब्सिडी वाले सिलिंडर के दाम हर महीने दो रुपये बढ़ाये जा रहे थे जबकि 01 जुलाई से इसमें 32 रुपये की बढ़ोतरी की गयी। अब हर महीने चार-चार रुपये प्रति सिलिंडर दाम बढ़ाने के निर्देश दिये गये हैं। सरकार ने चुपके से बिना लोगों को कोई सूचना दिये यह फैसला किया जा गलत है। इसके बाद जब अध्यक्ष ने पूर्व निर्धारित कार्यसूची के अनुसार अपनी बात रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी के मोहन भाई कुडरिया का नाम पुकारा तो विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे। वे सरकार की ओर से तत्काल बयान की माँग कर रहे थे। श्रीमती महाजन ने कहा कि शून्यकाल होने के कारण वह मंत्री को बयान देने के लिए बाध्य नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा “आप समझने की कोशिश कीजिये। आपका व्यवहार ठीक नहीं है।” इस पर कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तथा अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने पहले “गरीब विरोधी मोदी सरकार शर्म करो” और “महिला विरोधी मोदी सरकार शर्म करो” के नारे लगाये और फिर सदन से बहिर्गमन कर गये।

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