ममता के टकरावपूर्ण रवैये से हैरान हैं : जावडेकर

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नयी दिल्ली,14 अगस्त, पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने शिक्षा से जुड़े मसलों पर जिस तरह केंद्र के साथ टकराव का रुख अपनाया है, उस पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने काफी हैरानी जताई है और मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेडकर सुश्री बनर्जी से मिलकर इस टकराव को दूर करने की कोशिश करेंगे। सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी सरकार ने आज़ादी की 70 वीं वर्षगांठ के मौके पर मंत्रालय द्वारा 15 अगस्त को स्कूलों में विभिन्न देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित करने का जो निर्देश दिया था उसे लागू न करने का फैसला कर पहली बार इस तरह के टकराव का परिचय नहीं दिया बल्कि पहले भी पश्चिम बंगाल सरकार ने मंत्रालय के साथ असहयोग का रुख अपनाया और यहां तक कि उसने शिक्षा के बज़ट के लिए राज्य सरकार के आंकड़े तक पेश नहीं किये। सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय के संयुक्त सचिव मुकेश गर्ग ने 25 जुलाई को सभी राज्यों को पत्र लिखा कि इस वर्ष आज़ादी की 70 वीं वर्षगांठ के अवसर पर अाठ अगस्त से 15 अगस्त तक छात्रों एवं लोगों में देशभक्ति की भावना जगाने के लिए 10 तरह के कार्यक्रम करें लेकिन 11 अगस्त को पश्चिम बंगाल सर्व शिक्षा मिशन ने सभी जिला परियोजना अधिकारियों को पत्र लिखकर केंद्र के 25 जुलाई के परिपत्र को न मानने का निर्देश दिया। सूत्रों को इस बात पर गहरी हैरानी हो रही है कि आखिर ममता बनर्जी सरकार ने यह कदम क्यों उठाया जबकि उन 10 कार्यक्रमों में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था। मंत्रालय ने राज्यों को आज़ादी की 70 वीं वर्षगांठ के मौके पर स्कूलों में स्वंतत्रता आन्दोलन को लेकर क्विज लेख और भाषण प्रतियोगिता का आयोजन करने अौर देशभक्ति गीत गाने, चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित करने प्रभात फेरियां निकालने,स्वाधीनता आन्दोलन से जुड़ी सांस्कृतिक गतिविधियां करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा छात्रों को आतंकवाद साम्प्रदायिकता जातिवाद भ्रष्ट्राचार गरीबी दूर करने के लिए संकल्प लेने को कहा गया था। यह कोई राजनीतिक संकल्प तो नहीं था। मंत्रालय ने 20 अगस्त तक इस बारे में रिपोर्ट माँगी थी। सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय ने गुवाहाटी, बेंगुलुरु, भोपाल आदि में चिंतन शिविर में भी पश्चिम बंगाल का कोई प्रतिनिधि आया। इसके अलावा जब भी मंत्रालय ने बज़ट के लिए पश्चिम बंगाल से आंकड़े मांगे तो उसने मुहैय्या नहीं कराये। इसके कारण मंत्रालय को बहुत दिक्कतें हुईं लेकिन उसने इसके बावजूद बज़ट की राशि आवंटित की। सूत्रों का कहना हैकि श्री जावडेकर सुश्री बनर्जी से मिलकर यह पूछेंगे कि आखिर आपकी सरकार ने मंत्रालय के साथ टकराव का रास्ता क्यों अपनाया है।

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