मेरी और विधायकाें की हो रही है निगरानी, फिर भी जीत पक्की : पटेल

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आणंद (गुजरात), 07 अगस्त, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव तथा गुजरात में कल होने वाले राज्यसभा चुनाव में पार्टी के इकलौते उम्मीदवार अहमद पटेल ने आज दावा किया कि चुनाव में उन्हें हराने के लिए उनकी तथा पार्टी के विधायकों की केंद्र और राज्य की सरकारी मशीनरी के जरिये निगरानी समेत कई ऐसे काम हो रहे हैं जिनसे लगता है कि भारत एक लोकतंत्र की बजाय एक ‘बनाना रिपब्लिक’ (लचर राजनीतिक व्यवस्था वाला गणराज्य) बन गया है। उन्होंने इसके बावजूद अपनी जीत पक्की बताते हुए आज यहां पत्रकारों से कहा कि उन पर अापराधिक मुकदमा होने संबंधी विरोधियों के आरोप बेबुनियाद है पूरी तरह गलत हैं। वह चुनाव कांग्रेस के एक उम्मीदवार के तौर पर लड रहे हैं न कि श्रीमती गांधी के राजनीतिक सचिव के तौर पर और इससे उनका कोई लेना देना नहीं है। श्री पटेल ने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि शंकरसिंह वाघेला उन्हें वोट देने का अपना वादा पूरा करेंगे तथा पार्टी के अन्य विधायकों के भी वोट उन्हें मिलेगे। उन्होंने अपने 44 विधायकों की कथित प्रतिबद्धता को सलाम किया जिनमें से दो पारिवारिक मौतों के बावजूद अन्य विधायकों के साथ ही बने रहे। इनके अलावा पार्टी के सात और विधायकों का वोट उन्हें मिल सकता है। राकांपा के दो विधायकों ने भी उन्हें वोट देने के संकेत दिये हैं। जदयू के भी विधायक वोटर हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की रणनीति 20 से 25 कांग्रेस विधायकों को तोड कर चुनाव से पहले ही उन्हें मात देने की थी। लगातार पांचवी बार राज्यसभा में जाने के लिए चुनाव लड रहे श्री पटेल ने कहा कि यह तो भाजपा खेमा ही बता सकता है कि वे इस चुनाव को उसने अहमद पटेल बनाम अमित शाह बनाया है अथवा नहीं। उन्होंने कहा कि 1996 के बाद पहली बार चुनाव की नौबत भाजपा ने क्यों आने दी जबकि उनके पास तीसरी सीट के लिए 16 कम विधायक थे। हालांकि उन्होंने चुनाव में नोटा के विकल्प अथवा क्रॉस वोटिंग की संभावना से इंकार नहीं किया। कांग्रेस विधायकों के बाढ के समय में अपने निर्वाचन क्षेत्र से दूर बेंगलोर में मौज करने के बारे में पूछे जाने पर श्री पटेल ने कहा कि इसके कारण के बारे में पहले ही विस्तार से बताया जा चुका है और वह इसे दोहराना नहीं चाहते। उन्होंने हालांकि यह पूछा कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी बाढ प्रभावित बनासकांठा पांच दिन की देरी से क्यों पहुंचे। तीन सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव में भाजपा की ओर से इसके अध्यक्ष अमित शाह तथा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और कांग्रेस छोड कर भाजपा में आये बलवंतसिंह राजपूत तीन उम्मीदवार हैं जबकि कांग्रेस के एकमात्र उम्मीदवार के तौर पर श्रीमती सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल मैदान में हैं। जो जीतने पर पांचवी बार संसद के उच्च सदन के सदस्य बन सकते हैं। 27 और 28 जुलाई को कांग्रेस के 57 में से 6 विधायकों के इस्तीफे के बाद इनमें से तीन भाजपा में शामिल हो गये थे जिनमें से एक श्री राजपूत भी हैं। 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के एक बागी समेत 122, कांग्रेस के 51 (बागी शंकरसिंह वाघेला, जो भाजपा प्रत्याशी श्री राजपूत के निकट रिश्तेदार हैं तथा उनके छह समर्थकों समेत) तथा राकांपा के दो और जदयू का एक विधायक है। श्री शाह और श्रीमती ईरानी की जीत लगभग पक्की है। श्री राजपूत तथा श्री पटेल के बीच मुकाबला है। श्री पटेल ने जीत के लिए जरूरी 45 से अधिक का आंकडा होने का दावा किया है।

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