नीतीश ने भागलपुर सृजन घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश की

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पटना 17 अगस्त, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भागलपुर में अरबों रुपये के चर्चित सृजन घोटाला मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की आज सिफारिश की। श्री कुमार ने यहां भागलपुर में सरकारी खाते से राशि की अवैध निकासी के पूरे प्रकरण एवं सभी पहलुओं पर मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक पी. के. ठाकुर, गृह विभाग के प्रधान सचिव आमिर सुबहानी एवं आर्थिक अपराध इकाई के पुलिस महानिरीक्षक जी. एस. गंगवार के साथ समीक्षा के बाद इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में राष्ट्रीयकृत बैंकों के साथ-साथ सरकारी पदाधिकारियों एवं कर्मियों की भूमिका प्रकट हुयी है। इस सिलसिले में दर्ज मामले समेत पूरे प्रकरण की जांच एवं अनुसंधान की जिम्मेवारी सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की है। 


अरबों रुपये की सरकारी राशि गबन के मामले में लगातार नये खुलासे हुये और राशि करीब 1000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि चार अगस्त को भागलपुर में सरकारी राशि के गबन का मामला सामने आया था और इसकी जांच का जिम्मा बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को दिया गया। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जुटाये गये तथ्यों से यह पता चलता है कि 302.70 करोड़ रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया है। श्री सिंह ने कहा कि भागलपुर जिले में विभिन्न बैंकों के सरकारी खाते में भू-अर्जन, नगर विकास और जिला प्रशासन की राशि जमा करायी गयी थी लेकिन इसे फर्जी तरीके से निकासी कर स्वयंसेवी संस्था सृजन महिला समिति के खाते में जमा करा दिया गया। उन्होंने कहा कि चार अगस्त को एक चेक के अमान्य किये जाने पर यह मामला सामने आया और जिला प्रशासन ने इसकी जांच अपने स्तर से करायी थी। मुख्य सचिव ने कहा कि भू-अर्जन के लिए 270 करोड़, नगर विकास योजना के लिए 17.70 करोड़ और नजारत खाते में 15 करोड़ रुपये सरकारी राशि जमा करायी गयी थी। फर्जी तरीके से इस राशि को निकाल कर सृजन के खाते में जमा करा दिया गया। उन्होंने कहा कि मनोरमा देवी इस संस्था की संस्थापक थी जिनका निधन हो गया है और अब उनके पुत्र अमित कुमार एवं पुत्रवधु इसे चला रहे हैं। श्री सिंह ने कहा कि जांच के दौरान बैंक के अधिकारी, बिहार सरकार के अधिकारी और सृजन के लोगों की संलिप्तता इस घोटाले में पायी गयी है। इस मामले में भागलपुर में अलग-अलग तीन प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। उन्होंने कहा कि अमित और उसकी पत्नी तथा सृजन से जुड़े कई अन्य लोग इस मामले के प्रकाश में आने के बाद से फरार हैं। इस घोटाला में 12 अगस्त को नया मोड़ तब आया जब भागलपुर के जिलाधिकारी आदेश तितरमारे ने बताया कि घोटाले की राशि बढ़कर करीब 668 करोड़ रुपये तक हो गयी है। इस मामले में अबतक अलग-अलग सात प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है उनमें जिला भू-अर्जन विभाग का सर्वाधिक 275 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी का भी मामला शामिल है। इस घोटाले में शामिल सात लोगों को अबतक गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है और हिरासत में लिए गए अन्य लोगों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। 

इस मामले में जहां छापेमारी, गिरफ्तारी और सरकारी कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई चलती रही वहीं गबन की गई राशि के आंकड़े बढ़ते-बढ़ते करीब 1000 करोड़ रुपये पर पहुंच गये। इस बीच राज्य के विपक्षी दलों की ओर से मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग भी जोर पकड़ने लगी। राष्ट्रीय जनता दल(राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री श्री कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगाते हुये इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की । वहीं राजद विधायक दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने आज भागलपुर में कहा कि सृजन घोटाला बिहार का अबतक सबसे बड़ा घोटाला है और जिसमें राज्य सरकार की भी संलिप्तता है। ऐसे में आर्थिक अपराध इकाई और विशेष जांच दल (एसआईटी) सिर्फ़ दिखावे के लिए जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि इस घोटाले में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री समेत कई बड़े लोगों के शामिल होने से सरकार की जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि इन लोगों को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। वहीं कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने इस मामले में सवाल खड़े करते हुये सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) से पूछ लिया कि जो भाजपा बिहार की हर सामाजिक से लेकर व्यक्तिगत विषयों पर राजनीतिक रूप से हमलावार रहती थी, वह आखिर सृजन घोटाले पर मौन क्यों हैं। उन्होंने कहा कि जनता के इस सवाल का जवाब भाजपा को तुरंत देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर जीरों टॉलरेंस की बात करती है तो उसे दृढ़ता के साथ सृजन घोटाले की जांच निष्पक्ष एजेंसी से कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने से हिचकना नहीं चाहिए। 

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