राजीव के हत्यारों की रिहाई को लेकर नहीं लिया गया है कोई निर्णय: तमिलनाडु सरकार

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चेन्नई, 21 अगस्त, तमिलनाडु सरकार ने आज मद्रास उच्च न्यायालय को बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है क्योंकि यह मामला अभी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। उच्च न्यायालय में राजीव गांधी हत्याकांड के दो दोषियों रॉबर्ट पायस तथा जयकुमार की समय पूर्व रिहाई की अर्जी पर सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार ने नया हलफनामा दाखिल कर कहा कि अभी तक इन लोगों की रिहाई को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है क्योंकि यह मामला अभी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। हलफनामे में बताया गया, ' उच्चतम न्यायालय के फैसले के आधार पर ही तमिलनाडु सरकार इस मामले में कोई निर्णय लेगी। ' वर्ष 2012 में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने एक हलनामा दाखिल कर कहा था कि वह इस मामले में हस्तक्षेप अौर दोषियों को माफ नहीं करेगी। राज्य सरकार ने उस समय अदालत में एक नया हलफनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी थी। इसी आधार पर राज्य सरकार ने आज अदालत में यह नया हलफनामा दाखिल किया। राजीव गांधी हत्याकांड के दो दोषियों ने वर्ष 2012 में अदालत में एक अर्जी दाखिल कर राज्य सरकार से यह कहते हुए अपनी रिहाई की अपील की थी कि वे लोग जेल में 20 वर्ष गुजार चुके हैं। इस अर्जी में इन लोगों ने दलील दी थी कि उम्र कैद की सजा पाए कई दोषी 14 वर्ष जेल में रहने के बाद रिहा हो चुके हैं। रॉबर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी को एक चिट्ठी भी लिखी थी जिसमें उसने कहा थी कि अगर सरकार उसे रिहा नहीं कर सकती तो उसे इच्छा मृत्यु दे दे तथा मृत्यु के बाद उसके शव को परिजनों को सौंप दे। रॉबर्ट ने कहा था रिहाई की नाउम्मीदी के बीच वह कई वर्ष जेल में गुजार कर निराश हो चुका है। इस मामले में केंद्र सरकार ने कहा था कि किसी भी स्थिति में इस मामले के दोषियों की रिहा नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार ने कहा था कि अदालत को रॉबर्ट की इच्छा मृत्यु की अपील को खारिज कर देना चाहिए। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा, ' उम्र कैद का मतलब पूरी जिंदगी जेल में गुजारना है। इस मामले में दोषी अपनी रिहाई के लिए दावा नहीं कर सकता तथा वह इस आधार पर भी रिहा नहीं किया जाएगा कि उसने 14 वर्ष का समय जेल में गुजार लिया है। 

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