भागलपुर में करोड़ो रूपये के घोटाले के मामले में कल्याण पदाधिकारी जेल भेजे गये

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भागलपुर 16 अगस्त, बिहार के भागलपुर जिले में करोड़ो रुपये की सरकारी राशि के घोटाले के मामले में हिरासत में लिए गए जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार को आज जेल भेज दिया गया । भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने यहां बताया कि करोड़ो रुपये की सरकारी राशि के घोटाले के मामले में दो दिन पूर्व हिरासत में लिए गए जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार को लंबी पूछताछ के बाद आज 14 दिन के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा बैंक कर्मचारी अतुल कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। श्री कुमार ने बताया कि इस मामले में फरार चल रही कल्याण पदाधिकारी की पत्नी इन्दू गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए टीम के सदस्य कई ठिकानों पर आज भी छापेमारी कर रहे हैं । उन्होंने बताया कि इन्दू की गिरफ्तारी के लिए भागलपुर पुलिस की टीम पटना भी गयी हुयी है और संभवत: शीघ्र उन्हें गिरफ्तार कर लिया जायेगा । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) की टीम ने आज बैंक ऑफ बड़ौदा में छापा मारकर कर्मचारी अतुल कुमार को हिरासत में लिया है । अतुल से टीम के सदस्य पूछताछ कर रहे हैं । 


श्री कुमार ने बताया कि करोड़ो रुपये के इस घोटाले में अब तक जहां 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है वहीं कुल नौ प्राथमिकी भी दर्ज की गयी है। उन्होंने बताया कि पूर्व जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को भी इस मामले में नोटिस भेजा गया है । इस घोटाले के मुख्य अभियुक्त स्वयं सेवी संस्था सृजन की सचिव प्रिया कुमार और उसके पति अमित कुमार को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में जिला समाहरणालय से जुड़े विभागों के बैंक खातों और कागजातों की जांच से पता चला है कि सरकारी खाते से घोटाला कर निकाली गयी राशि करीब नौ सौ करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। गौरतलब है कि भागलपुर में सृजन महिला विकास समिति, बैंक और जिला समाहरणालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से करीब 900 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला उजागर हुआ है जिसमें गबन की जाने वाली सर्वाधिक राशि जिला भू-अर्जन एवं जिला कल्याण विभाग की है। इस मामले में गिरफ्तार हो चुके लोगों में जिलाधिकारी के स्टोनो प्रेम कुमार मुख्य अभियुक्त है जिसके संरक्षण में ही जिलाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से सरकारी राशि को सृजन महिला विकास समिति के बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था। इस घोटाले में फर्जी बैंक पासबुक, चेकबुक, अंकेक्षण प्रतिवेदन और जिलाधिकारी के फर्जी आदेश वाले पत्र का इस्तेमाल किया गया है। 
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