बिहार : नीतीश चाहते हैं कि पटना-दीद्या रेलखंड बंद हो जाये

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पटना। सी.एम.नीतीश कुमार चाहते हैं कि पटना-दीद्या रेलखंड बंद हो जाये और वहां पर फोर लाइन रोड बने। इस तरह की सोच पूर्व की है। जब केंद्र और एन.डी.ए. से नाता तोड़ दिये थे। अब जबकि महागठबंधन से रिश्ता तोड़ एन.डी.ए. से संबंध प्रगाढ़ कर लिये हैं। बतौर संयोजक बन गये हैं। 4  साल के बाद मन मिल गया है। इसके आलोक में पी.एम.नरेंद्र मोदी ने आरा की चुनावी बैठक में द्योषणा किये थे कि बिहार को बनाने में 1.25 करोड़ देंगे। शर्त था कि काम करने वाली सरकार। इस राशि को लेने में नीतीश सरकार सफल नहीं हो सकी. अब पी.एम. द्वारा द्योषित राशि मिलने की संभावना बढ़ गयी है। इसको लेकर अधिकारी कार्यशील हैं। इस माह के अंत तक मिल जाने की संभावना है। पी.एम.द्वारा द्योषित राशि मिलने के बाद 'प्रभु' की दरबार में नीतीश दस्तक देंगे। दीद्या- पटना रेलखंड को बंद कर फोर लाइन रोड बनाने को रेलवे की जमीन देने को कहेंगे। अब तो मुंह खोलना है। एन.डी.ए.के संयोजक की हस्ति से रखेंगे कि माननीय पटना उच्च न्यायालय भी सवाल उठाना शुरू कर दिया है। यहां रेलवे खर्च करती है रोज 30 हजार और आमदनी 500, पटना हाईकोर्ट ने मांगा जवाब। आर ब्लॉक से दीघा तक ट्रेन चलाने में रेलवे को घाटे का सामना करना पड़ रहा है। इस रूट पर ट्रेन चलाने में रेलवे सालाना एक करोड़ से अधिक खर्च करती है। जबकि रोज तीन से पांच सौ रुपए तक के टिकट ही बिकते हैं।


पटना हाईकोर्ट ने पटना से दीघा घाट तक ट्रेन चलाने के औचित्य पर रेलवे से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति डॉ. रविरंजन तथा न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई शुरू की। वही इसके पहले रेलवे के वरीय अधिवक्ता देवेन्द्र कुमार सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि रेलवे ने इस ट्रेन के समय में बदलाव कर दिया है, जिससे पीकआवर में आम नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो। उन्होंने कहा कि इस बात से रेलवे के अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है। कोर्ट ने रेलवे से जानना चाहा है कि पटना-दीघा रेलवे लाइन की शुरुआत कब हुई? इस ट्रेन का परिचालन किस उद्देश्य से किया गया था? इस ट्रेन को पैसेंजर ट्रेन में कब तब्दील किया गया? कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि इस ट्रेन को चलाने पर रेलवे को कितना खर्च करना पड़ रहा है और आमदनी कितनी हो रही है? कोर्ट ने इन सारे सवालों का जवाब देने का निर्देश रेलवे को दिया। कहा कि- इस आदेश की प्रति एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और महाधिवक्ता को भी भेज दी जाए। आर ब्लॉक से दीघा तक ट्रेन चलाने में रेलवे को घाटे का सामना करना पड़ रहा है। इस रूट पर ट्रेन चलाने में रेलवे सालाना एक करोड़ से अधिक खर्च करती है। जबकि रोज तीन से पांच सौ रुपए तक के टिकट ही बिकते हैं। परिचालन पर रोज 30 हजार का खर्च आता है। अभी सुबह में पटना घाट से दीघा घाट पैसेंजर और शाम में पटना जंक्शन से दीघा घाट तक ट्रेन चलती है। दोनों ट्रेनें दीघा पहुंचने के थोड़ी देर बाद ही वापस लौट जाती हैं। इस दौरान हड़ताली मोड़ के पास और आर ब्लॉक के पास सड़क की दोनों तरफ जाम लग जाता है। ट्रेन गुजरने के दौरान गुमटी बंद रहने से दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतार लग जाती है। वहीं शहीद सवारी गाड़ी को लोकल बच्चे खिलौना बना लिये हैं। छुकछुक रूकरूक कर चलने वाली पर बच्चे 'स्टंट' भी करने लगे हैं। एक हाथ लहराकर उतड़ते और चढ़ते हैं। इनको कोई रोकने वाले नहीं हैं। रेलखंड के दोतरफा अतिक्रमण है। दीद्या, राजीव नगर, शिवपुरी,पटेल नगर, हड़ताली मोड़, सचिवालय और हार्डिग पार्क हॉल्टों का नामोनिशान नहीं है। पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव द्वारा उद्घाटित हॉल्टों पर टिकट कटता ही नहीं है।

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