पटना मेट्रो का सपना होगा साकार, केन्द्र को फिर प्रस्ताव भेजेगी बिहार सरकार

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पटना, 31 अगस्त, बिहार की राजधानी पटना में परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक बार फिर पटना मेट्रो से संबंधित प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज यहां मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षात्मक बैठक की। समीक्षा बैठक में संबंधित विभाग के सभी बिन्दुओं पर विस्तृत चर्चा की गयी। समीक्षा बैठक की समाप्ति के बाद मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में मुख्मयंत्री ने दो विभागों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने पटना में मेट्रो ट्रेन लाने के लिए एक बार फिर से केन्द्र को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, “ केन्द्र सरकार द्वारा नई मेट्रो नीति बनायी गयी है, उसी आधार पर राज्य सरकार अपने प्रस्ताव में सुधार कर इसे केन्द्र सरकार को भेजेगी। ” उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार ने पिछले साल फरवरी माह में 16960 करोड़ रुपये की लागत वाले पटना मेट्रो रेल परियोजनाओं का कार्यान्वयन एसपीवी मॉडल पर कराने के लिए केंद्र सरकार, जापान इंटरनैशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जीका) तथा एशिआई विकास बैंक (एडीबी) के समक्ष भेजे जाने को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। हालांकि केंद्र ने इस साल जून माह में राज्य को पत्र लिख कर सूचित किया था कि जब तक मेट्रो पॉलिसी तैयार नहीं हो जाती, तब तक किसी भी मेट्रो प्रोजेक्ट के प्रस्ताव की स्वीकृति नहीं दी जा सकती।


श्री सिंह ने बताया कि बिहार में भू-सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। भूमि का हवाई सर्वेक्षण कराया जा रहा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा राज्य का कैडस्ट्रल सर्वे एवं रिविजनल सर्वे से संबंधित सभी राजस्व नक्शे को डिजिटाइज्ड कर दिया गया है। भू-अर्जन से संबंधित राशि के ससमय भुगतान की व्यवस्था विभाग द्वारा की गयी है। उन्होंने कहा कि राशि को खाते में निकालकर रखी जाने वाली परंपरा समाप्त की जायेगी। मुख्य सचिव ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में शवदाह गृहों के संबंध में निर्देश दिया गया कि सभी जगह विद्युत शवदाह गृह के साथ-साथ आवश्कतानुसार पारंपरिक (लकड़ी) तरीके से शव जलाने की व्यवस्था के लिए छोटे-छोटे शेड का निर्माण कराया जाये। इसी तरह कचरा प्रबंधन के लिये दो मॉडल मुजफ्फरपुर मॉडल एवं सिलाव मॉडल बनाये गये हैं। सिलाव मॉडल छोटे स्तर पर कचड़ा प्रबंधन के लिये है, जिसमें हर दुकानदार को दो प्लास्टिक की बाल्टी दी जाती है, जिसमें वो सुखा एवं गीला कचड़ा अलग-अलग रखते हैं। श्री सिंह ने बताया कि शहरों से निकलने वाले नाले के पानी को ट्रिटमेंट करने के बाद उसका उपयोग अब खेती के लिये किया जायेगा। विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। सिवरेज, ड्रेनेज एवं जलापूर्ति योजनाओं में किसी भी सड़क पर ढ़ाई सौ मीटर से आगे कार्य करने के पूर्व कटे हुये रोड का पूर्ण रेस्टोरेशन को अनिवार्य बनाने के लिये दिशा-निर्देश निर्गत करने पर सहमति दी गयी। उन्होंने बताया कि बिहार के तीन शहरों भागलपुर, पटना एवं मुजफ्फरपुर को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल किया गया है। साथ ही बिहारशरीफ भी इस सूची में शामिल होने के कगार पर है। बैठक में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामनारायण मण्डल, नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, प्रधान सचिव मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन आमिर सुबहानी समेत राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के कई वरीय अधिकारी उपस्थित थे। 
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