अंतराष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर वृक्षारोपण

  • आदिवासी समाज को राष्ट्र की मूलधारा में लाना होगा: गणि राजेन्द्र विजय

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नई दिल्ली, 9 अगस्त 2017, प्रख्यात जैन संत एवं आदिवासी जनजीवन के प्रेरणास्रोत गणि राजेन्द्र विजयजी ने कहा कि भारत को यदि शक्तिशाली एवं समृद्ध बनाना है तो आदिवासी जनजीवन को राष्ट्र की मूलधारा में लाना होगा। विकास की मौजूदा अवधारणा इसलिए विसंगतिपूर्ण है कि उसमें आदिवासी जनजीवन की उपेक्षा एवं उनके अधिकारों की अवहेलना की गयी है। एक संतुलित समाज रचना के लिए आज आदिवासी जनजीवन को प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है।  गणि राजेन्द्र विजयजी आज पंडित पंत मार्ग पर आयोजित एक विशेष समारोह को सम्बोधित करते हुए बोल रहे थे। यह समारोह संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस समारोह में गुजरात के आदिवासी क्षेत्र भरूच के सांसद श्री मनसुखभाई वसावा, छोटा उदयपुर के सांसद श्री रामसिंहभाई राठवा, किसान यात्रा संदेश के संपादक पं. नरेन्द्र शर्मा, सुखी परिवार फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक श्री ललित गर्ग, साधिका नमिताचार्य, मां योगशक्ति निखिलिम्, नेचरव्यू के चेयरमैन श्री योगेश कुमार, पहलवान श्री अभिलाष सिंह आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की जीवनशैली को समर्पित करते हुए वृक्षारोपण किया गया।


सुखी परिवार फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस समारोह में गणि राजेन्द्र विजय ने कहा कि हम लोग सुखी परिवार अभियान के अंतर्गत अनेक आदिवासी उत्थान की गतिविधियां संचालित कर रहे हैं जिनमें आदिवासी बच्चों के लिए एकलव्य आवासीय माॅडल विद्यालय, बालिकाओं के लिए ब्रह्मसुंदरी कन्या छात्रावास, गौशाला आदि हैं। उन्होंने आदिवासी लोगों से आह्वान किया कि अपनी संस्कृति एवं जीवनशैली को अक्षुण्ण रखने के लिए निरंतर प्रयासरत रहें। राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेंकने वाले तथाकथित राजनेताओं के मनसूबों को कामयाब न होने दे। सांसद श्री मनसुखभाई वसावा ने कहा कि देश के आजाद होने के बाद विभिन्न सरकारों ने अपने-अपने तरीके से आदिवासी समस्याओं के समाधान में कुछ न कुछ योगदान दिया है, पूरे देश में आदिवासी शिक्षा, कृषि, रोजगार आदि विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है। फिर भी आज देश में आदिवासी समाज विभिन्न समाजों की तुलना में उपेक्षित है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयीजी ने कहा था कि आज पूरे देश में विभिन्न समस्याओं वाला समाज है तो वह आदिवासी समाज ही है। उसके सम्मुख बहुत सारी समस्याएं हैं फिर भी वह सह लेता हैं, बोल नहीं सकता है। और यह कहते उन्होंने कहा था कि अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए आदिवासी नेताओं को खुद आगे आना होगा। यह दिवस आदिवासी जनजीवन के साथ-साथ आदिवासी नेताओं के जागने का दिवस है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी एक नया भारत निर्मित करने की ओर अग्रसर हैं। निश्चित ही इस नये भारत में आदिवासी समाज को सम्मान एवं गौरव प्राप्त हो सकेगा, ऐसा विश्वास है। 

सांसद श्री रामसिंहभाई राठवा ने कहा कि आज आदिवासी समाज को जागरूक होने की जरूरत है। अक्सर उनका राजनीतिक शोषण होता रहा है। आज सबसे बड़ी अपेक्षा यह है कि आदिवासी अपना मूल्यांकन करना सीखे और खोई प्रतिष्ठा को पुनः अर्जित करे। यह कार्य राजनीति के आधार पर संभव नहीं है। इसके लिए संतपुरुषों एवं संस्कृतिकर्मियों को जागरूक होना होगा और एक सशक्त मंच बनाकर आदिवासी संस्कृति को जीवंत करना होगा। अन्य वक्ताओं ने भी आदिवासी समाज के भारत के विकास में योगदान को उजागर करते हुए उनके समग्र विकास की आवश्यकता व्यक्त की।

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