उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना पर पीएमओ गंभीर, और लोगों पर गाज गिरेगी

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नयी दिल्ली, 21 अगस्त, प्रधानमंत्री कार्यालय ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खतौली में शनिवार को हुई रेल दुर्घटना को बहुत गंभीरता से लिया है तथा जल्द ही इस मामले में और बड़े बदलाव देखने में आ सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय में आज सुबह इस दुर्घटना को लेकर एक अहम बैठक हुई जिसमें माना गया कि जिस प्रकार की लापरवाही सामने आयी है, उससे साफ हो गया है कि रेलवे का ज़मीनी तंत्र अंदर ही अंदर बुरी तरह चरमरा चुका है और बीते तीन साल में रेल प्रणाली को दुरुस्त करने के लिये उठाये गये कदम भी सवालों के घेरे में आ चुके हैं। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय के रुख से लगता है कि इस दुर्घटना को लेकर अब तक जो भी कार्रवाई हुई है, वह पर्याप्त नहीं है तथा इस मामले में अभी और बड़े बदलाव देखने में आ सकते हैं। रेल मंत्रालय ने आरंभिक जांच एवं सबूतों के आधार पर रेलवे बोर्ड में सदस्य (इंजीनियरिंग) आदित्य कुमार मित्तल, उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आर एन कुलश्रेष्ठ और दिल्ली के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) आर एन सिंह को छुट्टी पर भेज दिया है। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एम सी चौहान को उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक का तथा रेलवे बोर्ड में कार्यकारी निदेशक (टेलीकॉम) अंशुल गुप्ता को दिल्ली के डीआरएम का कार्यभार सौंपा गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार उत्तर रेलवे के मुख्य ट्रैक अभियंता आलोक अंसल का तबादला कर दिया गया है जबकि दिल्ली के वरिष्ठ मंडल अभियंता आर के वर्मा, सहायक अभियंता मेरठ रोहित कुमार, वरिष्ठ खंड अभियंता मुज़फ्फरनगर इंदरजीत सिंह और कनिष्ठ अभियंता खतौली प्रदीप कुमार को निलंबित किया गया है। रेलवे बोर्ड में सदस्य केन्द्र सरकार में पदेन सचिव होता है जिसे छुट्टी पर भेजा गया है। इस प्रकार से किसी रेल दुर्घटना के मामले में यह अब तक की कठोरतम कार्रवाई करते हुए रेलवे बोर्ड में शीर्षतम स्तर पर जवाबदेही तय की गयी है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ए. के. मित्तल स्वाइन फ्लू से पीड़ित होने के कारण चिकित्सा अवकाश पर हैं। स्वस्थ होकर लौटने पर उनसे भी उच्चस्तर पर जवाब तलब किये जाने की उम्मीद है। राजनीतिक हलकों में हाल में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में भी इस दुर्घटना का असर दिखाई देने की अटकलें लगायीं जा रहीं हैं। इस बीच आॅल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने इस दुर्घटना को लेकर रोष व्यक्त किया है और कहा है कि दुर्घटना के पीछे मूल एवं परोक्ष कारणों की भी जांच पड़ताल की जानी चाहिये जिनमें स्टाफ की कमी, अनुरक्षण कार्य ठेके पर कराना, माैजूदा स्टाफ पर काम का अत्यधिक दबाव, गाड़ियों के परिचालन में समय के अनुपालन का दबाव अादि शामिल हैं। इस बीच रेलवे यूनियनों ने भी रेलवे में स्टाफ की कमी को दूर करने तथा परिचालन एवं संरक्षा संबंधी रिक्त पदों पर तुरंत नियुक्ति करने की मांग की है।

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