विशेष : एक ढोंगी बाबा के सामने बेबस सरकार

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करीब तैतीस साल बाद आज फिर समूचा देश एक धार्मिक बाबा की हेकड़ी ,गुंडागर्दी  और उसके अंध भक्तों की अराजकता को चैनलों पर देख रहा है .कई लोगों की जान जा चुकी है .गोली चलाई जा रही है ,स्टेशन जलाए जा रहे है .लूटपाट ,हंगामा और आगजनी हो रही है.और राज्य सरकार की पुलिस खामोश है .ठीक वही हालात है जैसे  तीन जून 1984 को जब खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले ने जब हरमंदिर साहब पर कब्ज़ा कर लिया था और सेना की कार्यवाई को समूचा देश देख रहा था .आज फिना सेना हरियाणा  पंजाब की सड़क पर उतरी जब बाबा गुरमीत सिंह उर्फ़ राम रहीम को बलात्कार के मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुए उन्हें दोषी करार दिया .भिंडरावाले और बाबा राम रहीम में बहुत अंतर है .भिंडरावाले धर्म की राजनीति से निकला और सिखों का नया देश बनाने का सपना देखने लगा .इसके लिए बंदूक उठाने से भी परहेज नहीं किया .पर बाबा राम रहीम तो सत्ता की राजनीति से फलता फूलता रहा और कोई भी कुकर्म नहीं छोड़ा .नाच गाना से लेकर तरह तरह के करतब करने वाला बाबा जो अपनी ही साध्वी की अस्मत लूट चुका हो उसके कितने और कैसे अंध भक्त किस्म के समर्थक बनते गए यह शोध का विषय है .इस किस्म का बाबा अगर दो दो राज्य की कानून व्यवस्था को इस तरह चुनौती देने लगे कि अदालत के आदेश पर सेना को बैरक से निकलना पड़े तो उसकी इस ताकत को भी समझना पड़ेगा .हरियाणा और पंजाब में उसके लाखों समर्थक कल से लाठी डंडे के साथ जमे हुए थे .फैसला सुनने के बाद ये अराजकता पर उतरे और तोड़ फोड़ से लेकर आगजनी की घटनाएं शुरू हो गई .मीडिया पर हमला हुआ तो स्टेशन पर आग लगाईं गई .


ये ढोंगी बाबा अगर मुस्लिम होता या मामला कश्मीर का होता तो देश में अबतक क्या हो चुका होता इसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है .बिहार में एक माफिया डान शहाबुद्दीन जेल से रिहा होता है 100-150 गाड़ियों का काफिला होता है . पूरा देश हंगामा करता है .और जब एक बलात्कारी बाबा की बारी आती है अदालत जाने की तो हरियाणा की सरकार इस तरह आत्म समर्पण कर देती है कि हाई कोर्ट को कहना पड़ता है कि क्यों न डीजीपी को निलंबित कर दिया जाए .यह सिर्फ इसलिए क्योंकि मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमत्री तक इस बाबा का स्तुति गान करते हैं .भिंडरावाले से तो सरकार लड़ रही थी पर बाबा राम रहीम को सरकार संरक्षण देती रही है .यह बाबा किस तरह सैकड़ों गाड़ियों के साथ अदालत जाता है .क्या इस देश में किसी अपराधी को अदालत में पेश होते समय यह सुविधा मिलती है .सरकार का तो पूरा प्रयास था कि मूर्ख किस्म के अंध भक्तों की अराजकता के नाम पर किसी भी तरह इस बाबा का मामला टाल  दिया जाए .पर वह तो हाई कोर्ट अड़ गई और सेना को बैरक से बाहर आना पड़ा वर्ना आज हरियाणा पंजाब में इस बाबा के समर्थक कैसी अराजकता फैला चुके होते इसका अंदाजा नहीं लगा सकते थे .अराजकता तो अभी भी फैला रहे है पर अपने मन की वे नहीं कर पाए .इसके लिए हरियाणा सरकार से लेकर केंद्र सरकार दोनों जिम्मेदार है .इन सरकारों ने ही बाबा राम रहीम को राजनैतिक संरक्षण दिया .पहले की भी सरकारों ने इस बाबा को संरक्षण दिया था .राजनैतिक फायदे के लिए .इस बाबा की ताकत राजनैतिक दलों के नेताओं ने ही बढाई है .चुनावी फायदा जब ये राजनैतिक दल लेंगे तो किसी ढोंगी बाबा के खिलाफ कार्यवाई किस मुंह से करेंगे .इस सबसे बाबा का इतना मन बढ़ गया कि वे विश्व के नक़्शे से भारत का नाम मिटा देने की धमकी देने लगे .राजनैतिक दल जब इस किस्म के बाबाओं को संरक्षण देंगे तो ऐसे हालात बार बार पैदा होंगे .बाबा रामपाल को लोग भूले नहीं है .अभी भी एक नहीं कई ढोंगी बाबा राजनैतिक दलों के संरक्षण के चलते फल फूल रहे हैं .बाबा राम रहीम के इतिहास पर नजर डाले जो किसी माफिया डान से कम नहीं है .ये गुंडागर्दी ,हत्या से लेकर बलात्कार तक में शामिल था .उसे सजा हो सकती है ,मामला बिगड़ सकता है इसके बावजूद राज्य ने कोई प्रयास नहीं किया हालात से निपटने का . कोई ढंग की योजना नहीं बनाई है .दो दिन से हाथ में एक तरह के डंडे लिए लाखों समर्थक सरकार को सीधी चुनौती दे रहे थे .पर सरकार सिर्फ सुरक्षा बल इकठ्ठा कर रही थी .योजना तो कोई थी ही नहीं .नतीजा सामने है .यह राष्टवादी सरकार है .


--अंबरीश कुमार--
साभार : जनादेश 
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