विशेष : बाबा गुरमीत राम रहीम बन गए सुनारिया जेल की कैदी नम्बर -1997

जज जगदीप सिंह लोहान गुरमीत राम को 10-10 साल की सजा, पूरा सच सांध्य दैनिक में प्रकाशित, किया पत्रकार रामचंद्र छत्रपति, गुरमीत राम रहीम को 20 साल की सजा। 30 लाख जुर्माना।2 साध्वियों के साथ सजा।1 रेप में 10 पूर्ण करने के 2 रेप की सजा शुरू। 14 -14 लाख रू. देना होगा। अभी 50 साल के हैं, तब 77 साल के हो जाएंगे। 2037 में जेल से मुक्त होंगे।




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15 साल पुरानी सच्चाई 20 साल की सजा
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम पर एक साध्वी के साथ बलात्कार का अारोप लगा है। ये आरोप 2002 को एक गुमनाम लैटर के जरिए लगाया गया। तब उच्च न्यायालय ने लेटर का संज्ञान लेते हुए सितम्बर 2002 को मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने जांच में आरोप सही पाए और डेरा प्रमुख के खिलाफ विशेष अदालत के सामने 31 जुलाई, 2007 में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में डेरा मुखी को जमानत तो मिल गई, लेकिन यह मामला लंबे समय से पंचकुला की सीबीअाई अदालत में चल रहा है। यहीं नहीं बाबा राम रहीम पर और भी बहुत से संगीन आरोप हैं। माना जाता है कि गुरमीत सिंह राम रहीम का गुरजंत सिंह जोकि खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का सदस्य है, उससे करीब का संबंध है। राम रहीम पर एक पत्रकार और एक अन्य की हत्या का भी अारोप है। आरोप है कि छत्रपति ने साध्वी बलात्कार मामले को अपने अखबार में छापा तो नवंबर 2002 में उसकी गोली मार कर हत्या कर दी गई। राम रहीम पर ये भी आरोप है कि उन्होंने डेरे के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की भी हत्या करवाई, क्योंकि वो डेरे के कई राज जान चुका था।

रंजीत सिंह की 10 जुलाई 2003 को हत्या कर दी गई थी और तब इन दोनों हत्याओं में डेरा सच्चा सौदा का नाम सामने आया था। साध्वी यौन शोषण मामले पर फैसला 25 अगस्त को आएगा। डेरे के समर्थक ऐसे किसी आरोप को नहीं मानते और अपने गुरू की पेशी पर भड़के हुए हैं। समर्थकों का कहना है कि फैसला चाहे जो भी हो वह राम रहीम को आंच तक नहीं आने देंगे। इसलिए ही सुरक्षा को देखते हुए हरियाणा और पंजाब के चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात है। दोनों प्रदेशों में हाई अर्ल्ड भी जारी कर दिया गया है। 1998में गांव बेगू का एक बच्चा डेरा की जीप तले कुचला गया। गांव वालों के साथ डेरे का विवाद हो गया। घटना का समाचार छापने वाले समाचार पत्रों के नुमाइंदों को भी कथित तौर पर धमकाया गया। डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति व मीडियाकर्मियों की पंचायत हुई। इसमें डेरा सच्चा सौदा की ओर से लिखित माफी मांगी गई और विवाद खत्म हुआ।


पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को गुमनाम पर
2002 मई में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाते हुए डेरे की एक साध्वी ने गुमनाम पत्र प्रधानमंत्री को भेजा। इसकी एक प्रति पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी गई। 10 जुलाई 2002 को डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत की हत्या हुई। आरोप डेरा प्रबंधन पर लगे। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत के पिता ने जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की। 24सितंबर 2002 को हाईकोर्ट ने साध्वी यौन शोषण मामले में गुमनाम पत्र का संज्ञान लेते हुए डेरा सच्चा सौदा की सीबीआइ जांच के आदेश दिए। सीबीआइ ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। 24 अक्तूबर 2002 को सिरसा के सांध्य दैनिक ‘पूरा सच’ के संपादक रामचन्द्र छत्रपति को गोली मारी गई। आरोप डेरा समर्थकों पर लगा।16 नवंबर, 2002 को सिरसा में मीडिया की महापंचायत बुलाई गई और डेरा सच्चा सौदा का बहिष्कार करने का प्रण लिया। 21 नवंबर, 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मृत्यु हो गई। जनवरी 2003 में पत्रकार छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर छत्रपति प्रकरण की सीबीआइ जांच करवाने की मांग की।

याचिका में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह पर हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया। उच्च न्यायालय ने पत्रकार छत्रपति व रणजीत हत्या मामलों की सुनवाई एक साथ करते हुए 10 नवंबर, 2003 को सीबीआइ को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश जारी किए। दिसंबर 2003 में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी। दिसंबर 2003 में डेरा के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जांच पर रोक लगाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया। नवंबर 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने डेरा की याचिका खारिज कर दी। सीबीआई ने डेरा प्रमुख सहित कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया। 31जुलाई 2007 को सीबीआई ने हत्या मामलों व साध्वी यौन शोषण मामले में जांच पूरी कर चालान न्यायालय में दाखिल कर दिया। सीबीआई ने तीनों मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया। -तीनों मामले पंचकूला स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में विचाराधीन हैं। 2007 से लेकर अब तक इन तीनों मामलों की अदालती कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए डेरा सच्चा सौदा ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

यौन शोषण का आरोप
गुफा तक के रास्ते में हर जगह सादे कपड़ों में या फिर बकायदा कमांडो शैली में बंदूक लिए लोग तैनात हैं।राम रहीम की गुफा में शानदार सोफा और चमकदार पर्दों वाला हॉल है। यहां 209 शिष्यायें खास तौर पर चुनी जाती हैं। इन शिष्याओं में से कुछ को ही इस गुफा में आने का अधिकार है। गुफा में जाने के लिए बाकायदा पहचान और बायोमीट्रिक सिस्टम है, तभी दरवाजे खुलते हैं। ये शिष्यायें किसी साध्वी की तरह खास गेरुआ या सफेद रंग के कपड़े पहनती हैं और अक्सर बाल खुले रखती हैं। इसके अलावा ये शिष्याएं बाबा को खाना खिलाने, मुलाकात करवाने, सुबह शाम स्टेज तक लाने का काम करती हैं। बाबा के प्रवचन में भी बाईं तरफ इनके लिए एक खास जगह बनी होती है। प्रवचन वाले हॉल मे यही सब कुछ संभालती हैं और बाहरी हिस्से में दूसरे पुरुष कारसेवक काम करते हैं।

गुरमीत की इस गुफा में बाबा के लिए अलग से तैयार होने की जगह और खास लोगों से मिलने का कमरा भी है. यहीं से गुरमीत के पास कई देशों में सीधे बात करने के लिए हॉटलाइन भी है। इस पूरी गुफा में ऐशो-आराम की हर चीज मौजूद है। झाड़फानूस से लेकर शानदार बाथरुम तक। इसके अलावा जिस गोल स्टेज में बाबा प्रवचन देते हैं उसके नीचे पहिए लगे होते हैं और ऊपर एक हैंडल, जिससे मंच आगे और पीछे जाता है।बाबा भी उसी पर बैठकर सीधे एक चक्कर लगाते और वापस आ जाते। बाबा के कपड़े भी खास डिजाइनर से चंडीगढ़ से बनकर आते हैं। चमकदार और शिफॉन से बने।

टीवी पर गन्दी फिल्म चलाकर रातभर अपनी ही साध्वी का करते रहे बलात्कार
उस रात डेरे में एक आदमी ने कहा -तुम्हें डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने बुलाया है अपने कमरे में। मुझे लगा हो सकता है, कोई जरूरी बात हो। मैं सिर नीचा कर चली गई। बाबा जी को प्रणाम किया। उन्होंने बिस्तर के एक तरफ बैठने का इशारा किया। मुझे बहुत संकोच हो रहा था। पहले कभी बाबा के सामने इस तरह पेश नहीं हुई थी। वो भी रात का वक्त। बाबा के प्रति पूरी श्रद्धा होते हुए भी मन में अजीब सी आशंकाएं उमड़-घुमड़ रहीं थी। आखिर महिला जो मैं ठहरी। जब मेरी नजर कमरे में चल रही टीवी पर पड़ी तो बड़ा झटका लगा। पैरों तले जमीन खिंसक गई। जिसे प्रभु का अवतार मानकर श्रद्धा में सिर झुकाती चली आई, वह बाबाजी गंदी फिल्म चलाए बैठे थे। मेरी तरफ कुटिल मुस्कान फेरकर बाबा ने कुछ यूं इशारा किया कि मेरी नजर बिस्तर पर रखे रिवॉल्वर पर पड़ गई। मैं डरने लगी। अचानक बाबा ने मुझे मेरी मर्जी के विपरीत पकड़ लिया। अश्लील हरकतें करने लगे। मैने चिल्लाने की कोशिश की तो मुंह दबा दिया। रिवाल्वर दिखाकर मुझे व घर वालों को जान से मारने की धमकी दी। पूरी रात गुरमीत राम रहीम ने रेप किया। एक बार बाबा राम रहीम रेप करने में सफल रहे तो फिर कई बार सिलसिला चला।


कुछ यही मजमून है दुष्कर्म पीड़िता की उस चिट्ठी का। जिस चिट्ठी के दम पर उत्तर-पश्चिमी भारत में बड़ी ताकत के रूप में खड़ा गुरमीत राम रहीम का डेरा सच्चा सौदा साम्राज्य ढहता नजर आ रहा है। कुछ इसी तरह साध्वी ने डेरे की उस काली रात की दर्दनाक दास्तां अपनी उस गुमनाम चिट्ठी में दर्ज की। यह वही चिट्ठी रही, जिसे साध्वी ने मई 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को लिखकर दुष्कर्म के मामले में इंसाफ की गुहार लगाई थी। यह पत्र हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट को भी भेजा गया था। प्रधानमंत्री ने भले ध्यान नहीं लिया, मगर इसी पत्र को संज्ञान में लेकर हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया। साध्वी ने पत्र में लिखी बातें हुबहू बयान के रूप में भी सीबीआई के सामने दर्ज कराई। जिसके चलते बाबा राम रहीम साध्वी के साथ और कई महिलाओं के यौन शोषण में बुरी तरह फंस गए। अब डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर पंचकूला की सीबीआई अदालत 25 अगस्त को रेप केस में फैसला सुनाने जा रही।

चिट्ठी से खफा बाबा ने करा दी साध्वी के भाई की हत्या
यौन शोषण के खिलाफ चिट्ठी लिखने के बाद मामले की जांच शुरू हुई तो गुरमीत राम रहीम भड़क उठे। चिट्ठी लिखने के बाद साध्वी ने डेरा छोड़ दिया था। बहन के यौन शोषण से खफा होकर डेरा सच्चा सौदा प्रबंध समिति के सदस्य रणजीत सिंह ने गुरमीत के पापों की कलई खोलने की धमकी दी। इस पर गुरमीत का शक पुख्ता हुआ कि यह चिट्ठी रणजीत सिंह ने ही लिखवाई। इससे खफा होकर गुरमीत रहीम के आदेश पर डेरा समर्थकों ने 10 जुलाई 2002 को रणजीत सिंह की हत्या कर दी। डेरे को शक था कि कुरुक्षेत्र के गांव खानपुर कोलियां के रहने वाले रणजीत ने अपनी ही बहन से वह पत्र प्रधानमंत्री को लिखवाया है। रणजीत का उस वक्त मर्डर हुआ, जब वह घर से कुछ ही दूरी पर रोड किनारे अपने खेतों में नौकरों के लिए नाश्ता लेकर जा रहे थे। हत्यारों ने अपने गाड़ी को जीटी रोड पर खड़ा रखा और गोलियों से भूनने के बाद फरार हो गए। यौन शोषण के खुलासे के दो महीने बाद साध्वी के भाई का मर्डर हुआ। चूंकि गुरमीत राम रहीम सियासत में रसूखदार रहे तो पुलिस ने जांच में लीपापोती कर दी। इस पर जनवरी 2003 में रणजीत के पिता व गांव के तत्कालीन सरपंच जोगेंद्र सिंह ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सीबीआई जांच की मांग की। 24 सितंबर 2002 को हाई कोर्ट ने साध्वी यौन शोषण मामले में गुमनाम पत्र का संज्ञान लेते हुए डेरा सच्चा सौदा की सीबीआई जांच के आदेश दिए। सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। अब जबकि उस मामले में 25 अगस्त को फैसला आने वाला है, मगर अफसोस की बात है कि रणजीत सिंह के याची पिता जोगिंद्र सिंह इस दुनिया में नहीं हैं। यौन शोषण के मामले को दबाने के लिए गुरमीत राम रहीम हत्याएं कराने से नहीं चूके। साध्वी से दुष्कर्म के मामले को सिरसा के लोकल सांध्य दैनिक पूरा सच के संपादक रामचंद्र छत्रपति ने प्रमुखता से छापा जिससे हड़कंप मच गया। इतना ही नहीं जब साध्वी के भाई रणजीत सिंह की हत्या हुई तो उस खबर को बड़े अखबारों ने भी ठीक से कवर नहीं किया। मगर रामचंद्र ने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा मुखिया गुरमीत पर हत्या कराने का खुलासा कर तहलका मचा दिया। इस खबर से सिंहासन डोलता नजर आया तो फिर गुरमीत राम रहीम ने एक और हत्या करने का फैसला कर लिया।

बस फिर क्या था कि डेरा के गुर्गे धमक पड़े रामचंद्र छत्रपति के ठिकाने पर। 24 अक्टूबर 2002 को घर के बाहर बुलाकर पांच गोलियां मारकर छत्रपति को बुरी तरह घायल कर दिया गया। चूंकि छत्रपति सच्चाई लिखने से नहीं चूकते थे, उनकी धारदार पत्रकारिता की तूती बोलती थी। लोकप्रिय थी। इस नाते 25 अक्टूबर 2002 को घटना के विरोध में सिरसा शहर बंद रहा। 21 नवंबर 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई। एक बार फिर पुलिस ने रसूख के आगे घुटने टेक दिए और गुरमीत राम रहीम का नाम केस से बाहर कर दिया। जिस पर दिसंबर 2002 को छत्रपति परिवार ने पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर मुख्यमंत्री से मामले की जांच सीबीआई से करवाए जाने की मांग की। जनवरी 2003 में पत्रकार छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर छत्रपति प्रकरण की सीबीआई जांच करवाए जाने की मांग की। याचिका में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह पर हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया। हाई कोर्ट ने पत्रकार छत्रपति व रणजीत की हत्या में डेरा सच्चा कनेक्शन होने पर एक साथ सुनवाई शुरू की। हाईकोर्ट ने 10 नवंबर 2003 को सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश जारी किए। दिसंबर 2003 में सीबीआई ने छत्रपति व रणजीत हत्याकांड में जांच शुरू कर दी। दिसंबर 2003 में डेरा के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच पर रोक लगाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने उक्त याचिका पर जांच को स्टे कर दिया।

और जब डेरा के गुर्गों की धमकी से डर गए जज, मांगी सुरक्षा
नवंबर 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने डेरा की याचिका खारिज करते हुए सीबीआई जांच जारी रखने को कहा। इस पर सीबीआई ने फिर से मामलों में जांच शुरू कर डेरा प्रमुख सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। जांच में बुरी तरह फंसने पर गुरमीत राम रहीम ने डेरा समर्थकों को खूब उकसाया। जिस पर सीबीआई के अधिकारियों खिलाफ चंडीगढ़ में हजारों की संख्या में डेरावालों ने प्रदर्शन किया। यह देखकर सुनवाई कर रहे जज भी डर गए। जुलाई 2007 को सीबीआई ने हत्या मामलों व साध्वी यौन शोषण मामले में जांच पूरी कर चालान न्यायालय में दाखिल कर दिया। सीबीआई ने तीनों मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया। न्यायालय ने डेरा प्रमुख को 31 अगस्त 2007 तक अदालत में पेश होने के आदेश जारी कर दिया। डेरा ने सीबीआई के विशेष जज को भी धमकी भरा पत्र भेजा जिसके चलते जज को भी सुरक्षा मांगनी पड़ी। न्यायालय ने हत्या और बलात्कार जैसे संगीन मामलों में मुख्य आरोपी डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को नियमित जमानत दे दी जबकि हत्या मामलों के सहआरोपी जेल में बंद थे। तीनों मामले पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में हैं।

क्या है डेरा सच्चा सौदा
उत्तर-पश्चिमी भारत में डेरा सच्चा सौदा की तूती बोलती है। वजह है संख्या बल और सियासी रसूख। यही वजह है कि डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम एक बड़ी ताकत माने जाते हैं। 1948 में शाह सतनाम सिंह मस्ताना ने डेरा सच्चा सौदा की स्थापना की थी। उनकी विरासत को पिछले तीन दशक से गुरमीत राम रहीम संभाल रहे हैं। गुरमीत के कई रूप हैं। कभी वे संत बने नजर आते हैं तो कभी फिल्मस्टार। कभी महंगी कारें दौड़ाते नजर आते हैं तो कभी बिजनेस टायकून की तरह दिखते हैं। देश-विदेश में अरबों का साम्राज्य है।
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