हिन्दी दिवस एंव सुमन स्मृति सम्मान समारोह में रमेश गोयल को किया जाएगा सम्मानित

*प्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन, गुरूग्राम व पं0 फूल चन्द्र सुमन स्मृति ट्रस्ट (रजि.)* के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 10 सितंबर रविवार को *हिन्दी दिवस* के अवसर पर संगोष्ठी व सुमन स्मृति सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। समारोह के प्रथम सत्र में संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। जिसमे वक्ता *(रोटी हिन्दी से, गुणगान अग्रेजी का क्यों। जिम्मेदार कौन)* विषय पर वक्ता अपने-अपने विचार प्रकट करेगें। संयुक्त रूप से प्रस्तावित सम्मान के लिए आमंत्रित प्रविष्टियों के परिणाम निर्णायक मण्ड़ल के विद्वान निर्णायक *डा. विष्णु प्रसाद दीक्षित* इलाहाबाद, *डा. सत्तनारायण पाण्ड़ेय* इलाहाबाद व *डा. सुरेश एस. राव* वर्धा द्वारा प्रथम वर्ष में सभी सम्मान संयुक्त रूप से देने का निर्णय लिया गया है जिसके अन्तर्गत हिन्दी सेवी के रूप में आजकल दिल्ली में कार्यरत सिरसा के *एडवोकेट रमेश गोयल* व दिल्ली केन्द्र सरकार में कार्यरत अधिकारी-लेखक *किशोर श्रीवास्तव* को संयुक्त रूप से दिया जाएगा। 


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प्राप्त अनेक प्रविश्टियों में हिन्दी सेवी के रुप में रमेष गोयल एडवोकेट (आजकल जल स्टार के रुप में राश्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त) के चयन में उल्लेखनीय है कि उन्होंने 1975 में व्यावसायिक कार्य पूर्ण रूपेण हिन्दी में आरम्भ किया और कम्प्यूटर युग में भी अब तक 99 प्रतिषत कार्य हिन्दी में कार्य करते हैं। ट्रस्ट डीड हो या सांझेदारी प्रलेख या अन्य दस्तावेज हिन्दी में पिछले 40 वर्शो से अधिक समय से तैयार कर रहे हैं। आयकर विवरणी व बिक्रीकर/वैट का सब कार्य हिन्दी में किया। आयकर अपीलीय अधिकरण, चण्डीगढ व बिक्रीकर अधिकरण हरियाणा चण्डीगढ (द्वितीय अपील अथारीटी) तथा संयुक्त आबकारी कराधान आयुक्त (अपील) व आयकर आयुक्त (अपील) को हिन्दी में अपील भेजने वाले देष भर में एक मात्र व्यवसायी श्री गोयल फरवरी 1992 में स्थापित हरियाणा बिक्रीकर बार एसोसिएषन की संविधान समिति के चेयरमैन बने और संस्था का संविधान हिन्दी में बनाया जिसे सदस्यों के अनुरोध पर अंग्रेजी में अनुवाद किया गया। वे स्थानीय, प्रान्तीय व राश्ट्रीय स्तर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं और जिस संस्था में भी सक्रीय रहे हैं उसका काम यदि पहले अंग्रेजी में होता था तो उसे हिन्दी भाशा में परिवर्तित कर दिया। आयकर व बिक्रीकर विभाग के अधिकारियों में हिन्दी में काम करने वाले वकील के नाम से एक अलग पहचान रही है। कम्प्यूटर युग में अंग्रेजी के पीछे दौड़ रहे जन मानस के इस समय में भी कम्प्यूटर पर भी अपना सब काम हिन्दी भाशा में ही करते हैं। 

1978 में श्रीमती सुशमा स्वराज की अध्यक्षता में गठित प्रान्तीय कार्यकारिणी में संयुक्त महामन्त्री का दायित्व 1982 तक निर्वहन के बाद श्री गोेयल को 1983 में श्री फूलचन्द सुमन (अध्यक्ष) द्वारा ह0प्रा0 हिन्दी साहित्य सम्मेलन का प्रान्तीय उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। सिरसा षाखा द्वारा 1982 में रमेष गोयल की प्रधानता में एक अनियतकालीन पत्रिका ‘साहित्यिकी’ का प्रकाषन षुरू किया गया जिसमें स्थानीय साहित्यकारों की रचनाएं, कविता, लघुकथा, लेख आदि प्रकाषित होते रहते थे। उन्हें हरियाणा प्रादेषिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन सिरसा द्वारा 14 सितम्बर 1985 को सम्मानित किया गया। प्रादेषिक स्तर पर सिरसा षाखा को 1977-78 व 1982-83 सम्मानित किया गया। पहली बार वे षाखा सचिव व दूसरी बार षाखा प्रधान थे। सम्मेलन द्वारा 1980 में 10 हजार स्टीकर ‘आप भारतीय हैं हिन्दी अपनाइये‘ व हिन्दी अपनाये मत षरमाइये‘ बनवाए थे जिनमें अधिकांष स्टीकर अकेले उन्होंने लगाए थे। हरियाणा राज्य परिवहन की लगभग हर बस में स्टीकर लगे थे। जब भी कहीं जाते थे स्टीकर इनकी जेब व अटैची में होते थे और हर मुख्य स्टैंड पर खड़ी बसों में स्टीकर लगा आते थे। अनेक सरकारी कार्यालयों, बैंकों ,रेलवे स्टेषन व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अपने हाथ से स्टीकर लगाए थे। केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिशद् के आजीवन सदस्य श्री गोयल हरियाणा में सरकारी कार्यालयों में हिन्दी लागु करने हेतु सुमन जी के नेतृत्व में तत्कालिन मुख्यमन्त्री भजन लाल से मिलने वाले प्रतिलिधि मंडल में षामिल थे। देष भर में हिन्दी विरोध करने वालों के विरूद्ध प्रतिक्रिया व्यक्त करते रहते हैं।

षहर में प्रेरक पट्टिकाएं बनवाकर अपने हाथ से सार्वजनिक स्थानों पर लगवाई तथा हिन्दी प्रयोग सम्बन्धी प्रेरक वाक्यों वाले हजारों पत्रक लोगों को भिजवाने के साथ सिरसा षाखा द्वारा प्रकाषित ‘स्मारिका‘ के व्यवस्थापक रहे श्री गोयल हिन्दी दिवस आयोजनों में अनेक बार मुख्य वक्ता रहे हैं। 18 मार्च 1979 को श्रीमती सुशमा स्वराज के नेतृत्व में अबोहर क्षेत्रीय हिन्दी सम्मेलन में भाग लिया। अप्रैल 1981 में सम्मेलन के छठे अधिवेषन व्यवस्था में सक्रीय भागीदारी व कुरुक्षेत्र में 1-3 जुलाई 1983 को आयोजित अ.भा. हिन्दी साहित्य सम्मेलन की व्यवस्था में सक्रीय भागीदारी की। वे भारतीय साहित्य परिशद् सिरसा षाखा के संस्थापक अध्यक्ष (1980-81) रहे हैं। वर्श 2008 में हिन्दी में निःषुल्क कम्प्यूटर सीखाने की व्यवस्था की और खर्च वहन किया। 1974 से अब तक 40 वर्शो से अधिक समय तक निरन्तर सक्रीय हिन्दी सेवी के रुप में कार्यरत हैं। अनेक सामाजिक संगठनों में सक्रीय श्री गोयल अन्तर्राश्ट्रीय सामाजिक संस्था भारत विकास परिशद् के राश्ट्रीय मन्त्री पर्यावरण रहे हैं तथा राश्ट्रीय संस्था पर्यावरण प्रेरणा के संस्थापक एवं राश्ट्रीय अध्यक्ष हैं।


लघुकथा, कविता, लेख, पत्र आदि राश्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रकाषित होने के अतिरिक्त 2001 में लघु साक्षात्कार, 2008 में ल़घु साक्षात्कार -2, 2010 में ‘‘बिन पानी सब सून‘‘ पुस्तक प्रकाषित। राज्यपाल हरियाणा द्वारा 10 मई 2010 को विमोचन। 6000 प्रतियां प्रकाषित। 2012 में जल संरक्षण निमित ‘‘जल चालीसा‘‘ की रचना। मुख्यमन्त्री हरियाणा द्वारा     अप्रैल 2012 में विमोचन। अब तक 45 हजार प्रतियां प्रकाषित व 8 लाख लोगों को सोषल मिडिया द्वारा प्रेशित  की जा चुकी है। 2017 ‘‘एफिल टावर वाया स्विस‘‘ विदेष यात्रा हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाषन अनुदान हेतु स्वीकृत।‘‘पर्यावरण और जल संरक्षण‘‘  पुस्तक प्रकाषनाधीन है।

उन्होंने  बताया कि हिन्दी गद्य लेखक (कहानी,नाटक व एकांकी)  के लिए गुडग़ांव की लेखिका *डॉ.कृष्ण लता यादव* व  *सुरेखा शर्मा शांति* को संयुक्त रूप से दिया जाएगा। हिन्दी पद्य लेखन क्षेत्र में (छन्द-बद्व कविता, दोहें व मुक्तक) में  *डॉ.घंमडीलाल अग्रवाल* को तथा *सुशीला श्योराण* को संयुक्त रूप से पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होने बताया कि पहले उक्त सभी सम्मानों में पं0 फूल चन्द्र सुमन स्मृति ट्रस्ट (रजि.) 11 हजार रूपए की नकद राशी दी जानी थी, परंतु अब संयुक्त रूप से पुरस्कृत किए जाने के कारण सम्मानित विद्वानो को 55सौ-55सौ रूपए नकद सम्मान पत्र, सम्मान प्रतीक, शॉल व नारियल प्रदान किया जाएगा। 
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