नीतिगत दरों में कटौती, ऋण सस्ता होने की बनी उम्मीद

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मुंबई 02 अगस्त, चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में महंगाई के चार प्रतिशत से ऊपर निकलने के जोखिम के बावजूद मानूसन के अब तक बेहतर रहने और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के सफलतापूवर्क लागू होने के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों रेपो और रिवर्स रेपो में एक चौथाई फीसदी की कटाैती करने की आज घोषणा की, जिससे व्यक्तिगत ऋण के साथ ही आवास एवं कार ऋण के भी सस्ते होने की उम्मीद बनी है। एमपीसी ने रेपो दर में इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में 0.25 फीसदी की कटौती की थी। मौद्रिक नीति समिति की दो दिवसीय बैठक के रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल ने जारी बयान में नीतिगत दरों में कटौती की घोषणा की। श्री पटेल सहित पाँच सदस्यों ने कटौती के पक्ष में मतदान किया जिनमें एक सदस्य ने इसमें आधी फीसदी की कटौती की वकालत की। छठे सदस्य ने यथास्थिति बनाये रखने के पक्ष में मत दिया। बयान में श्री पटेल ने कहा कि मानूसन के बेहतर रहने तथा जीएसटी के सही तरीके से लागू हो जाने के मद्देनजर नीतिगत दरों में एक चौथाई फीसदी की कटौती की गयी है। अब रेपो दर 6.25 प्रतिशत से घटकर 6.0 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर 6.0 प्रतिशत से घटकर 5.75 प्रतिशत हो गयी है। यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गयी है। इसी तरह से मार्जिनल स्टैंडिंग फैसेलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक दर भी 6.50 प्रतिशत से घटकर 6.25 प्रतिशत हो गयी है। हालांकि, नकद तरलता अनुपात (सीआरआर) 4.0 प्रतिशत पर यथावत है। इसमें कहा गया है कि महंगाई को ऋणात्मक/घनात्मक दो फीसदी के साथ चार प्रतिशत के दायरे में रखने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुये यह कटौती की गयी है। हालांकि, समिति ने चालू वित्त वर्ष का विकास अनुमान 7.3 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। समिति के अध्यक्ष श्री पटेल के साथ ही डॉ. चेतन घाटे, डॉ़ पमी दुआ और डॉ. विरल वी. आचार्या ने नीतिगत दरों में एक चौथाई कटौती के पक्ष में अपना मत दिया जबकि डॉ. रवीन्द्र एच. ढोलकिया इसमें आधी फीसदी की कटौती चाह रहे थे। हालांकि, डॉ़ माइकल देबब्रत पात्रा यथास्थिति बनाये रखने के पक्ष में थे।

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