विशेष : भाई की कलाई पर उमड़ा बहना का दुलार अटूट रहेगा स्नेह का बंधन

  • ये बंधन तो प्यार का बंधन है, रेशम की डोरी से बांधा संसार 
  • राखी बंधवाने के लिए मुहूर्त का भी किया इंतजार और जब आयी मुहूर्त की बेला तो भाइयों की कलाईयों पर सजी प्रेम के धागे, दिया रक्षा का वचन
  • उपहार पाकर बहनों के चेहरे पर आई मुस्कान
  • मिठाई की दुकानों पर सुबह से ही लग गई थी भीड़, मिलावट की आशंका के चलते लोगों ने चॉकलेट फ्रूटडाई पैकेट भी खरीदे 
  • सावन का आखिरी सोमवार होने के चलते शिवालयों में भी लोगों ने दर्शन-पूजन कर भोलेनाथ को जलाभिषेक किया  



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वाराणसी। भाई और बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर जहां घरों में पूजा पाठ कर बहनों ने भाईयों के माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी, कलाई पर प्यार का राखी बांधी और मिठाई खिलाई। उनके ताउम्र धन-धान्य होने की दुआ की। बहनों के इस महकते प्यार के बदले भाईयों ने रक्षा का संकल्प लिया और राखी बांधने के बाद बहनों को उपहार प्रदान किये। राष्ट्रपति राम कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक ने देशवासियों को रक्षाबंधन की बधाई तो दी ही, नन्हें-मुन्ने बच्चों सहित समाज के अलग-अलग वर्गो की महिलाओं ने भी प्रधानमंत्री के सात रेसकोर्स स्थित सरकारी आवास पर जाकर उनकी कलाई में राखी बांधी। मंदिरों में तो सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। बहन पूजा की थाली में राखी और पूजन सामाग्री लेकर मंदिर पहुंची। भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक करने के साथ भगवान श्रीगणेश की पूजा पर उन्हें राखी बांधी। शहर से लेकर देहात तक चाहे वे बड़े-बूढ़े बुर्जुग रहे हो या युवा या फिर बच्चे, कलाइयों में बंधे रेशम के धागे भाई-बहन के प्रेम को मजबूती दे रहे थे। बच्चे अपने हाथ पर बंधी कार्टून वाली राखी को लेकर काफी खुश दिखाई दिए। खास यह रहा कि जागरुकता के चलते मुहूर्त का इंतजार किया। जब मुहूर्त की बेला आई तो भाईयों ने बहनों से राखी बधवाई। बहनों ने भी बिना राखी बांधे अन्न तक नहीं खाया, वहीं भाइयों ने भी इसमें बहनों का साथ दिया। उन्होंने भी कुछ नहीं खाया। बहनें राखी बंधवाने के बाद उपहार पाकर खुश दिखीं। 


भारतीय त्योहार हो और मिठाई न हो ये होना मुश्किल है। इसके चलते बाजार तो गुलजार थे ही हवा में मिठाई की खुशबू महकती रही। बहनें सुबह से ही राखी बांधने की तैयारी करने लगीं। सुबह 6 बजे से ही गली-कूचों में मिठाई की दुकानों पर लोगों का पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। दिन चढ़ते ही मिठाई की दुकानों पर लोगों को भीड़ नजर आई। इसके चलते बाजारों में खासी चहल पहल दिखी। रंग बिरंगी राखियों से बाजार सजे थे। चाइनीज राखियों को हर किसी ने लेने से इंकार किया। स्कूल और कालेजों की लडकियों ने वाघा सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवानों के हाथ में राखी बांधी। वहीं कुछ लोगों ने मिठाई में मिलावट की आशंका के चलते चॉकलेट खरीदने को महत्व दिया। फिर भी मिठाई के खरीदारों की संख्या अधिक थी। सेल्फी लेना अपनी खुशी को जाहिर करने का फैशन बनता जा रहा है। इसका असर रक्षाबंधन पर भी खूब दिखा। काफी लोगों ने राखी बंधवाने के बाद अपनी बहन के साथ सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर शेयर की। कुछ लोगों ने फेसबुक पर फोटो अपलोड किया। लोगों ने अपने प्रियजनों को त्योहार पर बधाई देने के लिए प्यार भरे संदेश भेजे। लोगों के बीच वीडियो संदेश भी काफी प्रचलित रहे। जो भाई बहन दूरी के कारण एक दूसरे से नहीं मिल पाए उन लोगों ने वीडियों चैट के जरिए अपनी भावनाओं को जाहिर किया। जैसे-जैसे तकनीक विकसित होती जा रही इसका असर भी त्योहार पर दिख रहा है। ऑनलाइन सुविधा का इस्तेमाल करते हुए बहनों ने राखियां भेजीं तो भाइयों ने भी बहनों के लिए उपहार की होम डिलीवरी कराई। त्योहार पर लोगों के बीच परिवार संग फिल्म देखने का भी क्रेज दिखा। शाम के शो में सिनेमाघरों में खासी भीड़ रही। इसके साथ ही रेस्टोरेंट में भी लोग अपने परिवार के साथ पहुंचे। छोटे बच्चों का उत्साह देखते बन रहा था। सभी नए परिधान में थे। दिनभर मस्ती की। शहर की सड़कों पर वाहनों को आवागमन बढ़ गया था। इसके चलते जगह-जगह जाम लग रहा। जाम को खुलवाने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहां रक्षाबंधन का पर्व हमें मानवीय मूल्यों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। आज के इस घोर कलयुग में हमारी बहनें सुरक्षित नहीं है। ऐसे में हमें उनकी रक्षा का संकल्प लेना होगा। इससे हमारे समाज और संस्कृति की रक्षा हो सकेगी। हम सभी को आज नारी के सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिज्ञा करनी होगी, तभी रक्षाबंधनसार्थक होगा। हमें अपने जीवन को सफल बनाने के लिए विकारों को त्यागना होगा, चाहे हमारे जीवन में कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो। हमें उसका मुकाबला करना होगा। रक्षाबंधन पर्व की महत्ता का वर्णन करते हुए बताया गया कि पर्व का अर्थ है पवित्र दिन। जिस किसी भी दिन विशेष के साथ हमारी भावना जुड़ी होती है, वह दिन पवित्र बन जाता है। प्रारंभ में यह ब्राह्मणों का पर्व था। कालांतर में सुरक्षा का पर्व बन गया था। आज भी अनेक प्रांतों में ब्राह्मण लोग अपने यजमानों को रक्षासूत्र बाधकर उनकी मंगल कामना करते हैं। वर्तमान में यह पर्व बहन-भाई के प्रेम का प्रतीक बन गया है। इस मौके पर सभी बहनों को उपहार के रूप में अपने भाइयों से संकल्प कराना चाहिए कि वे प्रत्येक नारी का सम्मान करेंगे। 
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