सारण मुख्य तंटबंध सुरक्षित : राजीव रंजन

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पटना 16 अगस्त, बिहार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने गोपालगंज जिले में गंडक नदी के सारण तटबंध के क्षतिग्रस्त हो जाने की अटकलों पर विराम लगाते हुये आज कहा कि यह तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है।  श्री सिंह ने यहां कहा कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी वर्षा से गंडक नदी में बाल्मीकिनगर बराज से 5.35 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे गोपालगंज जिले में बरौली प्रखंड के सलेमपुर छरकी पर पानी का दबाव बढ़ने के कारण परसौनी के निकट सारण तटबंध का ढलान 50 मीटर की लंबाई में क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने कहा कि बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य कराकर इसे सुरक्षित बनाया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि ढलान के क्षतिग्रस्त होने का अर्थ तटबंध का टूटना नहीं होता है। सारण मुख्य तटबंध के एक किलोमीटर के दायरे में कोई गांव नहीं है इसलिए यहां फैला पूरा पानी डुमरी बांध से गंडक नदी में चला जाएगा। हालांकि इस रीच में कुछ स्थानों पर सीपेज हुई थी, जिसे आवश्यक कार्य कराकर नियंत्रित कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “ढलान की मरम्मति के लिए गोपालगंज के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर कैंप कर रहें हैं। वहीं, विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह और मैं स्वयं स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा हूं।” 


श्री सिंह ने अररिया, किशनगंज और कटिहार जिले में आई बाढ़ के कारणों का उल्लेख करते हुये कहा कि पिछले चार दिनों के दौरान इन जिलों में करीब 200 मिलीमीटर और नेपाल के विराटनगर में 476 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के कारण परमार, कनकई और बकरा नदी का जलस्तर इतना अधिक बढ़ गया कि ये जिले पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गये। उन्होंने कहा कि इन तीनों नदियों के महानंदा नदी में मिलने से इसके जलस्तर में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। महानंदा के कारण कटिहार में आई बाढ़ की स्थिति भयावह हो गयी है। उन्होंने कहा कि महानंदा की एक विशेषता रही है कि इसमें जितनी तेजी से पानी आता है उतनी ही तेजी से निकल भी जाता है इसलिए इन जिलों में भी स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाने की उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के कारण कोसी नदी में 11 से लेकर 14 अगस्त लगातार तीन लाख 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। हालांकि अब इस नदी के जलस्तर में कमी हो रही है और इसके सभी तटबंध सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि इस नदी के बांध के भीतर के गांवों में पानी घुसना आम बात है। वैसे तटबंध के बार के इलाकों पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि कोसी से निकलने वालों नहरों पर पानी का दबाव देखा जा रहा है। श्री सिंह ने कमला बलान नदी में उफान से दरभंगा जिले में कई तटबंध टूटने की सूचना पर कहा कि इस नदी में पानी का दबाव बढ़ने से इसका जलस्तर 53.40 मीटर तक बढ़ गया, जो खतरे के निशान से 3.40 सेंटीमीटर अधिक है। इसके कारण जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के बौर गांव के निकट कमला बलान के दायां तटबंध के 73.50 किलोमीटर एवं 74.60 किलोमीटर तथा ताराडीह प्रखंड में विशुनपुर (कैथवार) निकट 57.30 किलोमीटर पर बांध क्षतिग्रस्त हुआ है। उन्होंने तटबंध के टूटने के अन्य कारणों का जिक्र करते हुये कहा कि तटबंध के नदी से काफी दूर होने के कारण वहां रहने वाले लोग अपने अनाजों को वहीं जमा करते है। इससे चूहों के वहीं बिल बनाने के कारण मिट्टी भुरभुरी हो जाती है और बारिश के दिनों में तटबंध पर दबाव बनता है। 

मंत्री ने कहा कि भारी वर्षा के कारण जलस्तर बढ़ने से उत्तर बिहार की अन्य नदियों बागमती और लालबेकिया में इस बाढ़ का उच्च स्तर (एचएफएल) रिकॉर्ड किया गया है। लालबेकिया का एचएफएल 73.80 मीटर पर पहुंच गया, जो पूर्व के स्तर से एक मीटर अधिक है। उन्होंने बताया कि नदी पर निर्मित दायां मार्जिनल बांध बलुआ टोला के निकट, दायां एफलक्स सपही में एवं बैरगेनिया रिंग बांध चार-पांच किलोमीटर के बीच मसहा नरोत्तम के निकट 13 अगस्त को क्षतिग्रस्त हो गया। श्री सिंह ने बताया कि इस वर्ष बागमती का एचएफएल 72.60 मीटर पर पहुंच गया, जो पूर्व के स्तर से 26 सेंटीमीटर अधिक है। नदी में उफान के कारण इसका बायां तटबंध 14 अगस्त को 48-49 किलोमीटर के बीच रुन्नीसैदपुर प्रखंड में भादाडीह गांव के निकट चार स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है। मंत्री ने कहा कि तटबंध के सभी क्षतिग्रस्त भागों का मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न नदियों के अनेकों स्थल पर तटबंध के टूटे हुये भाग तथा इनमें से हो रहे पानी के रिसाव को नियंत्रित कर लिया गया है। 

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