पृथ्वी की रक्षा से आने वाली पीढ़ी की भी रक्षा होगी : नीतीश

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पटना 09 अगस्त, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पृथ्वी की रक्षा को सर्वोपरि बताते हुये आज कहा कि इससे न केवल स्वयं की बल्कि आने वाली पीढ़ी की भी रक्षा होगी। श्री कुमार ने यहां ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुये कहा कि पृथ्वी की रक्षा करने से न केवल स्वयं की बल्कि आने वाली पीढ़ी की भी रक्षा हो सकेगी। उन्होंने कहा कि यदि विश्व में पर्यावरण का संतुलन कायम नहीं किया गया तो पृथ्वी पर रह रहे लोगों के जीवन को खतरा है। उन्होंने मौसम के बदलते रुख पर चिंता जाहिर करते हुये कहा कि बिहार इससे पीड़ित है और यहां वर्षा हो या न हो लेकिन बाढ़ तो आ ही जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड से अलग होने पर बिहार का हरित आवरण नौ प्रतिशत से भी कम हो गया था। हालांकि इस विषय पर अध्ययन के बाद पाया गया कि बिहार की परिस्थिति को देखते हुये यहां अधिकतम हरित आवरण 17 प्रतिशत तक हो सकता है। इसके मद्देनजर वर्ष 2012 से 2017 तक 15 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हासिल करने का संकल्प लिया गया। श्री कुमार ने कहा कि राज्य में अबतक 18 से 19 करोड़ पौधे लगाये जा चुके हैं और उसका सर्वेक्षण भी कराया जा रहा है। उन्हें विश्वास है कि हरित आवरण के 15 प्रतिशत लक्ष्य को हासिल कर लिया जायेगा। इस लक्ष्य में और दो प्रतिशत की बढ़ोतरी करनी होगी। इसके लिये लोगों को जागरूक बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी संस्थानों में पौधे लगाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि वह रक्षाबंधन के दिन वृक्षों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी की अविरलता एवं निर्मलता के लिये केन्द्र और राज्य सरकार दोनों ही प्रतिबद्ध है। गंगा में लगातार जमा हो रही गाद की समस्या पर अध्ययन करने के लिये टीम बनायी गयी है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी में गाद प्रबंधन के लिये गाद हटाने से ज्यादा जरूरी नदी के प्रवाह के साथ गाद का निर्बाध बहना है। नदी में जल का प्रवाह निरंतर होता रहना चाहिये।उन्होंने कहा कि गंगा नदी की अविरलता पर पटना और दिल्ली में सम्मेलन आयोजित की गई थी, जिसमें इस क्षेत्र के देश के जानेमाने विशेषज्ञों ने भाग लिया था। गंगा की निर्मलता को बनाये रखने के लिये जरूरी है कि उसमें गंदे पानी और कचरा को जाने से रोका जाये। उन्होंने कहा कि गंगा के किनारे जैविक कृषि को बढ़ावा दिया जाएगा तथा नाली के पानी का शोधन कर उसका उपयोग खेती के लिये किया जायेगा। श्री कुमार ने लावारिस पशु की चर्चा करते हुये कहा कि ऐसे पशु को पकड़कर गौशाला में रखे जाने के साथ ही उनका भरण पोषण भी किया जा रहा है। पशुओं के गोबर एवं मूत्र का उपयोग जैविक कृषि में किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कृषि रोडमैप में भी जैविक कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा से बचने के लिये भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वज्रपात की बढ़ती घटनाओं के देखते हुये कई राज्यों में इसके पूर्वानुमान पर हो रहे काम की तकनीक को बिहार में भी अपनाने का प्रयास किया जा रहा हैं। इस तकनीक के माध्यम से तीस मिनट पूर्व वज्रपात का पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि भूकम्प के बारे में पूर्वानुमान संभव नहीं है। भूकम्प के दौरान बचाव के लिये विद्यालयों में बच्चों को जागरूक करने के उद्देश्य से ओरिएन्टेशन कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार पहला राज्य है, जिसने डिजास्टर रिस्क रिडक्शन के लिये रोडमैप बनाया है। श्री कुमार ने लोगों से बिजली का दुरूपयोग नहीं करने की अपील करते हुये कहा कि सरकार सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। कजरा एवं पीरपैंती में सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन का संयंत्र लगाया जायेगा। उन्होंने बिहार पृथ्वी दिवस के अवसर पर लिये गये संकल्प पर्यावरण संतुलन के लिये प्रयास, वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाना, तालाब, नदी, पोखर को प्रदूषित नहीं करना, बिजली का सही इस्तेमाल करना, कूड़ा-कचरा इधर-उधर नहीं फेंकना, प्लास्टिक, पाॅलिथिन का उपयोग बंद करना, पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम का भाव रखना, नजदीक का कार्य पैदल या साइकिल से करना एवं कागज का दुरुपयोग नहीं किये जाने पर भी चर्चा की। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती पर सबका अधिकार है। यदि संकल्प के सभी बिन्दुआें को अपना लिया जाये तो जीवन आनंदमय और बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि बादल पेड़ से आकर्षित होते हैं इसलिये वृक्ष लगाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच जागृति पैदा करने के लिये पृथ्वी दिवस और वृक्ष सुरक्षा दिवस का आयोजन किया जाता है। नई पीढ़ी को भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नारे अंग्रेजों भारत छोड़ो की तरह ही ‘लालच भारत छोड़ो’ का नारा अपनाना होगा। इससे समाज में प्रेम, भाईचारा और एकता कायम होगी। श्री कुमार ने 09 अगस्त के महत्व का उल्लेख करते हुये कहा कि वर्ष 1942 को इसी दिन भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुआत हुई थी। गांधीजी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो, करो या मरो का नारा दिया था। राष्ट्रपिता ने एक महत्वपूर्ण बात भी कही थी कि पृथ्वी मनुष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है लेकिन उनकी लालच को नहीं। उन्होंने कहा कि लोगों मेें लालच की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, उस पर रोक लगाने की जरूरत है। इससे पूर्व कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा एवं पर्यावरणविद् डॉ. ज्योति के. पारिख ने भी संबोधित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने डीएफआईडी द्वारा तैयार पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामनारायण मंडल, उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह, वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, मुख्य वन संरक्षक डी. के. शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, वरीय अधिकारी एवं स्कूली बच्चे उपस्थित थे। 
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