राजीव गांधी हत्याकांड : न्यायालय ने केंद्र से बम बनाने से जुड़े षड़यंत्र की जांच संबंधी जानकारी मांगी

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नयी दिल्ली, 17 अगस्त,  उच्चतम न्यायालय ने आज केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह उसे उस बम को बनाने के षड़यंत्र से जुड़ी जांच के बारे में सूचित करे जिससे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की वर्ष 1991 में हत्या की गई थी। इस हत्याकांड में दोषी ठहराए गए ए जी पेरारिवालन ने दावा किया था कि बम बनाने के पीछे के षड़यंत्र संबंधी पहलू की उचित जांच नहीं की गई जिसके बाद न्यायालय ने सरकार से इस मामले में की गई जांच के बारे में पूछा। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘इस पहलू की पुन: जांच का या आगे की जांच का क्या परिणाम निकला? कृपया हमें यह बताएं । हम केवल यह जानना चाहते हैं।’’ न्यायालय मामले की आगे की सुनवाई अगले सप्ताह करेगी। दोषी ए जी पेरारिवालन के लिए पेश हुए वकील गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ को बताया कि जिस बम से राजीव गांधी की हत्या की गई थी, उसे बनाने के पीछे के षड़यंत्र समेत कई पहलुओं पर इस मामले में उचित तरीके से जांच नहीं की गई। इससे पूर्व, न्यायालय ने इस मामले में पेरारिवालन की मौत की सजा को उम्र कैद की सजा में बदल दिया था। राजीव गांधी की हत्या करने वाली आत्मघाती हमलावर धनु ने जो बेल्ट बम पहनी थी, पेरारिवालन पर उसके लिए बैटरियां आपूर्ति करने का आरोप था। तमिलनाडु के श्रीपेरूम्बुदूर में 21 मई1991 की रात एक चुनावी रैली में राजीव गांधी की एक आत्मघाती मानव बम ने हत्या कर दी थी। उस समय 14 अन्य लोगों की मौत हो गई थी। यह आत्मघाती बम हमले का शायद पहला ऐसा मामला था जिसमें किसी हाई प्रोफाइल वैश्विक नेता की जान गई थी। न्यायालय इस मामले में पेरारिवालन की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। पेरारिवालन ने आरोप लगाया है कि न तो सीबीआई के विशेष जांच दल और न ही उसकी अध्यक्षता वाली मल्टी डिसिप्लीनरी मॉनिटरिंग एजेंसी (एमडीएमए) ने आरोपियों को न्याय के दायरे में लाने के लिए उचित परिप्रेक्ष्य में जांच आगे बढ़ाई क्योंकि इसमें कई शीर्ष लोग शामिल थे।

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