ले.कर्नल पुरोहित की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित

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नयी दिल्ली, 17 अगस्त, उच्चतम न्यायालय ने 2008 के मालेगांव विस्फोट कांड के आरोपी ले. कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की जमानत याचिका पर आज फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल की अध्यक्षता वाली दो-सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ता और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। ले. कर्नल पुरोहित की ओर से जाने-माने वकील हरीश साल्वे ने इस मुकदमे के आरोपियों के साथ दोहरे मापदंड अपनाने का एनआईए पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया जा सकता है तो उनके मुवक्किल को क्यों नहीं? श्री साल्वे ने इस मामले के गवाहों के बयानों पर भी सवाल खड़े किये। उन्होंने कहा कि न्याय के हित में कर्नल पुरोहित को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया जाना चाहिए, जबकि एनआईए ने उनके इस अनुरोध का पुरजोर विरोध किया। एनआईए की दलील थी कि कर्नल पुरोहित के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जबकि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। अभियोजन एजेंसी ने कहा कि इस मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय का फैसला बरकरार रखा जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया। कर्नल पुरोहित ने बाॅम्बे उच्च न्यायालय द्वारा जमानत याचिका निरस्त किये जाने को चुनौती दी है, जबकि धमाके के पीड़ितों में से एक के पिता निसार अहमद हाजी सैयद बिलाल ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत पर रिहा करने के उच्च न्यायालय के 25 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी है। हाजी बिलाल ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की जमानत रद्द करने का अनुरोध शीर्ष अदालत से किया है। इनका आरोप है कि साध्वी प्रज्ञा ‘ताकतवर शख्स’ हैं और वह इस मामले में गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के नासिक जिले में साम्प्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील मालेगांव में 29 सितम्बर 2008 को हुए बम विस्फोट में सात लोग मारे गये थे।

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