सीहोर (मध्यप्रदेश) की खबर 31 अगस्त

स्वाईन फ्लू एच1एन1 के बचाव हेतु अलर्ट जारी
  • उपचार, रोकथाम, नियंत्रण एवं जनजागरूकता हेतु कार्यवाही के निर्देश

sehore news
स्वाईन फ्लू एच1एन1 से बचाव हेतु सतत् सतर्कता बरतने सहित उपचार, रोकथाम, नियंत्रण हेतु आवश्यक कार्यवाही के निर्देश जिले के समस्त बीएमओ को जारी किए गए है।जारी दिशा निर्देशों में कहा गया है कि मरीजों की  स्क्रीनिंग, निदान, हेतु राज्य स्तर से प्राप्त दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि सी केटेगिरी के मरीज मिलने पर उनका थ्रोट स्वाब परीक्षण हेतु अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) भोपाल की प्रयोगशाला में भेजे जाने की व्यवस्था की गई है। संभावित रोगियों को भर्ती किए जाने हेतु जिला चिकित्सालय सीहोर में 4 बिस्तरों वाला आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है जिसमें वेंटीलेटर एवं आवश्यक दवाओंकी उपलब्धता की व्यवस्था की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.आर.के.गुप्ता ने बताया कि स्वाईन फ्लू से संभावित ए श्रेणी के रोगियों को सामान्य सर्दी, जुखाम, हल्का बुखार, उल्टी, दस्त एवं बदन दर्द की शिकायत रहती है। इस तरह के लक्षणों पाए जाने पर शासकीय चिकित्सालय के विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह लेकर दवाईयां लेकर घर पर रहकर आराम करना चाहिए। वहीं 24 से 48 घंटों तक निगरानी में रख आराम ने मिलने पर डाक्टर की सलाह ली जावें। ए श्रेणी के लक्षण वाले हाई रिस्क मरीजों जैसे कि 5 साल तक आयु के बच्चों 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, गर्भवती माताएं, फेफडे़, हृदय, लीवर, गुर्दा, मधुमेह, कैंसर जो मरीजों लम्बे समय से ले रहे हो आदि लंबी बीमारियों वाले मरीज तत्काल टेमीफ्लू देवे तथा मरीज घर पर आराम करने की सलाह दी गई है। संभावित मरीजों को  भीड़वाले स्थानों पर नहीं जाना चाहिए। तथा 24 से 48 घंटों तक निगरानी में रहकर आराम करें तथा आराम ने मिलने पर चिकित्सक की सलाह जरूर लें। श्रेणी बी के मरीजों वाले लक्षणों में उपरोक्त श्रेणी ए के लक्षणों के साथ ही तेज बुखार,सांस लेने में तकलीफ हो ऐसे मरीज टेमीफ्लू दी जाकर मरीज को घर पर आराम करना चाहिए वहीं तथा ए एवं बी श्रेणी के मरीजों वाली समस्त सावधानियां बरती जानी चाहिए। डाॅ.गुप्ता ने बताया कि सी श्रेणी वाले मरीजों में ए तथा बी श्रेणी के मरीजों के लक्षण के साथ-साथ सांस लने में तकलीफ छाती में दर्द, खकार में खून आना, नाखून नीले पड़ना, आदि प्रमुख लक्षण है। सी श्रेणी के लक्षण वाले बच्चों में चिड़-चिड़ापन और खाने-पीने से इंकार करना उक्त लंबी बीमारियों का बढ़ना प्रमुख लक्षण है। सी श्रेणी के लक्षण वाले मरीजों को अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती कर स्वाईन फ्लू एच1 एन1 का उपचार टेमीफ्लू व अन्य तकलीफ एवं बीमारी के हिसाब से उपचार होता है। इन रोगियों की स्वाईन फ्लू एच1एन1 की जांच हेतु थ्रोट स्वाब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल के भेजे जाते हैं। उन्होंने बताया कि पीपीई किट्स का उपयोग सभी आवश्यक रूप से करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वाईन फ्लू एच1एन1 के प्रकरणों की विस्तृत रिपोर्ट जिला स्तर पर तैयार करने उक्त रिपोर्ट तत्काल राज्य स्तर पर आईडीएसपी स्वास्थ्य संचालनालय भोपाल को प्रेषित किए जाने के निर्देश जिला आईडीएसपी शाखा को दिए गए हैं । डाॅ.गुप्ता ने बताया कि टेमीफ्लू 75 एमजी.की टेबलेट जिला चिकित्सालय में 500, सिविल अस्पता म में 250,सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 100 टेबलेट एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 50 टेबलेट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

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