नीतीश ने सृजन मामले में 14 बार चेक बाउंस होने के बाद भी नहीं की कार्रवाई : लालू यादव

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पटना 12 सितम्बर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने आज कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भागलपुर की स्वयंसेवी संस्था सृजन में बड़े पैमाने पर हुयी सरकारी राशि के घोटाले के साथ ही 14 बार चेक बांउस किये जाने की भी जानकारी होने पर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की जो यह साबित करता है कि इस मामले में उनकी सांठगांठ थी। श्री यादव ने यहां अपने आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सृजन घोटाले से संबंधित दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध कराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री कुमार के संज्ञान में इतना बड़ा घोटाला हुआ है। श्री कुमार को घोटाले की पूरी जानकारी थी इसके बावजूद इसे रोका नहीं गया। उन्होंने कहा कि लोगों की गाढ़ी कमाई को लूटा गया है। राजद अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में जब तक मुख्यमंत्री श्री कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं हो जाती और वह जेल नहीं चले जाते तब तक वह शांत बैठने वाले नहीं हैं। चारा घोटाले के समय उनपर इसी तरह का आरोप लगा था कि उनकी जानकारी में ही हुआ है तो ऐसे में श्री कुमार और श्री मोदी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।


श्री यादव ने कहा कि श्री कुमार को प्रदेश के लोगों को यह बताना चाहिए कि इतनी बड़ी राशि की लूट कैसे हुयी। राज्य के लोग इस सच्चाई को जानना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने पर ही उन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले श्री कुमार को अब तो लोगों के बीच आकर सृजन के सच का खुलासा करना चाहिए। राजद अध्यक्ष ने कहा कि उप मुख्यमंत्री श्री मोदी की भी इसमें संलिप्तता पायी गयी है। श्री मोदी की बहन रेखा मोदी का नाम खुलकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सरकार के समय श्री कुमार अपना चेहरा छिपाने के लिये श्री मोदी का सहारा लेकर उनके खिलाफ आरोप लगवाते थे। इस बात को श्री मोदी ने भी स्वीकार किया था कि सरकार में बैठे हुये लोग ही उन्हें श्री यादव के खिलाफ दस्तावेज उपलब्ध करवा रहे हैं। श्री यादव ने कहा कि एक जुलाई 2014 से सात अगस्त 2017 तक चौदह बार सरकार की ओर से जारी किये गये चेक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण लौटा दिये गये। चेक लौटाये जाने की जानकारी स्थानीय प्रशासन के साथ ही श्री कुमार और श्री मोदी को थी फिर भी इस मामले को छुपा लिया गया। उन्होंने कहा कि जब मामला तूल पकड़ने लगा तब जाकर श्री कुमार स्वयं को बचाने के लिये स्थानीय पुलिस की देखरेख में विशेष जांच दल का गठन कर दिया। 

राजद अध्यक्ष ने कहा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने वर्ष 2008 की अपनी रिपोर्ट में सृजन में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी की जानकारी दी थी। कैग की रिपोर्ट को भी श्री कुमार ने दबा दिया। उन्होंने कहा कि भागलपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी ने भी इसपर आपत्ति जतायी थी बावजूद इसके कार्रवाई नहीं की गयी। उन्होंने कहा कि श्री कुमार ने अपने मनपंसद अधिकारी को भागलपुर का जिलाधिकारी बनाकर भेज दिया जिसके कारण यह सिलसिला जारी रहा। श्री यादव ने कहा कि वर्ष 2008 से ही सृजन का घोटाला होता रहा और इसपर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी। श्री कुमार इस घोटाले के मुख्य आरोपी हैं और इसके लिये उन्होंने जो इंजीनियरिंग की है वह सभी को फेल कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में खुद को फंसता देखकर श्री कुमार ने महागठबंधन छोड़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर सरकार बना ली। राजद अध्यक्ष ने कहा कि महागठबंधन छोड़ने से पहले श्री कुमार बराबर दिल्ली की यात्रा किया करते थे। इस घोटाले में स्वयं को बचाने के लिये श्री कुमार के पास महागठबंधन की सरकार को तोड़ना ही एक मात्र रास्ता बच गया था।उन्होंने कहा कि दस्तावेज के आधार पर श्री कुमार और श्री मोदी इस मामले में अब बच नहीं सकते। 
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