निजता और पारदर्शिता के बीच संतुलन हो : जेटली

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नयी दिल्ली 01 सितंबर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने निजता और पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाये जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुये आज कहा कि उच्चतम न्यायालय ने निजता को मौलिक अधिकार घोषित करने के दौरान जो तर्क दिये हैं वही तर्क उन्होंने भी पिछले वर्ष मार्च में संसद में दिया था। श्री जेटली ने यहां ‘नया भारत- राजनीति में पारदर्शिता’ विषय पर प्रथम चरती लाल गोयल स्मृति व्याख्यानमाला में कहा कि 80 और 90 के दशक में पारदर्शिता पर जोर दिया गया था और उसके लिए कई संस्थान बने थे। राजनीति में भी गोपनीयता का संदर्भ बदल गया है। उच्चतम न्यायालय कहता है चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी को अपनी संपत्तियों के संबंध में हलफनामा देना होगा क्योंकि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति का कोई भी मामला व्यक्तिगत नहीं होता है। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह पहले निजता को मौलिक अधिकार में शामिल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि क्या समाज को अपने निजी मामलों को गुप्त रखने का अधिकार होना चाहिए को लेकर पिछले वर्ष 16 मार्च को संसद में आधार कानून पर चर्चा के दौरान जो तर्क उन्होंने दिये थे शीर्ष अदालत ने भी निजता को मौलिक अधिकार में शामिल करने के दौरान दिये हैं। श्री जेटली ने कहा कि जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने आधार को लाया था तो सिर्फ सरकारी आदेश पर ले आया था। इसके लिए कानून नहीं बनाया था। इसके मद्देनजर कानून बनाने की जरूरत पड़ी और इसमें स्पष्ट किया गया है कि आधार के आंकड़ों को उपयोग सिर्फ उन्हीं कार्याें में किया जायेगा जिनके लिए आंकडे लिये गये हैं। यदि इसका दुरुपयोग होता है तो आपराधिक कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि दो दशकों से अधिक समय तक देश में खुलेपन की बात चल रही थी। अब निजता को मौलिक अधिकार में शामिल कर दिया गया है जो इनके बीच संतुलन बनाने की जरूरत होगी। इनका आपस में संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, अपराध की जानकारी और सामाजिक हित में कोई लाभ बंट रहा है तो निजता आड़े नहीं आयेगी। उन्होेंने कहा कि आगे चलकर राजस्व के मामले और भ्रष्टाचार रोकने के कदम उठाने में भी निजता का मामला आड़े नहीं आयेगा। उन्होंने कहा कि एक समय था जब सरकार का काम फाइल में छुपा रहता था और अंग्रेजों ने इसके लिए गोपनीयता कानून बनाया था। वर्तमान स्थिति में देश में सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा और मंत्रिमंडल की बैठकों के मामले ही गोपनीयता के दायरेे में है। इनको छोड़कर हर तरह की जानकारी सार्वजनिक है या उनके बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हासिल की जा सकती है।

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