बिहार : रेजगारी की फजीयत झेलने वाले भगवान के द्यर में जाकर सिक्का दान करने को बाध्य

  • रेजगारी की जमाखौरी करने वाले 5 से 10 प्रतिशत लेते थे, अब तमाम रेजगारी बाजार में आने से तबाही

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पटना। दुकानदार ग्राहकों से रेजगारी लेते ही नहीं है। दुकानदार भी कहते हैं होल सेलर रेजगारी लेते ही नहीं हैं। होल सेलर  कहते हैं कि बैंक वाले रेजगारी लेते ही नहीं हैं। अब रेजगारी को लेकर लोग किधर को जाये।वर्तमान समय में यक्ष सवाल है? आरबीआई ने नोट के बराबर ही रेजगारी को महत्व दिया है। मजे से एक,दो,पांच,दस,बीस,पचास,सौ आदि का नोट दनादन चल रहा है। केवल सिक्के में परेशानी है। एक, दो, पांच व दस रुपये के सिक्के देख छोटे से बड़े सभी दुकानदारों का आंख लाल-पीला होने लगता है। वे ग्राहकों से किसी सामान के बदले सिक्के ले ही नहीं रहे हैं। लिहाजा न के बराबर महत्व होने के कारण ग्राहकों के लिए ये सिक्के सरदर्द बन कर रह गये हैं। बीते साल नवंबर महीने में नोटबंदी के बाद बैंक व डाकघरों ने लोगों को झोला भर-भर सिक्के दिए थे। नोट के अभाव होने के कारण इन सिक्कों का रोटेशन तो होता रहा। लेकिन ये सिक्के वापस बैंक अथवा डाकघरों में नहीं जा सके। यहां मुट्ठी भर भी जमा नहीं लिया जा रहा है। जिससे यह लोगों व दुकानदारों के पास ही घुमता रह गया।


आज स्थिति यह हो गई है कि न तो ग्राहक दुकानदार से और न ही दुकानदार से ग्राहक सिक्के लेना चाह रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि दुकानदार वापसी में सौ-सौ रुपये के रेजगारी सिक्के थमाने लगे हैं। जिससे उनकी जेब जरूरत से अधिक भारी होने लगी है। इधर दुकानदार का तर्क यह है कि उनके पास ग्राहकों के द्वारा दिए सिक्के काफी जमा हो गए हैं।  वे तो उन्हें ही देकर इसे खपाएंगे।छोटे दुकानदार कहते हैं कि थोक विक्रेताओं (होल सेलर) ने किसी भी तरह के सिक्के लेने से मनाही कर दी है। सिक्के लेकर जाने के बाद उन्हें कोई सामान नहीं दिया जा रहा है।.जबकि होल सेलर का कहना है कि बैंक इन सिक्कों को जमा लेता ही नहीं है। पहले से ही उनके पास बोरा भर-भर सिक्का जमा हो गया है। वे उसे बढ़ा कर क्या करेंगे। कहीं नहीं है सिक्का काउंटिंग मशीन: जिले में लीड बैंक एसबीआइ सहित अन्य किसी बैंकों में सिक्का काउंटिंग मशीन नहीं है। बैंक अधिकारी सहित कई उपभोक्ताओं ने बताया कि यदि बैंकों में  सिक्का काउंटिंग की व्यवस्था कर ली जाए तो सारी समस्याओं का हल हो जायेगा। नोट गिनने वाली मशीन की तरह सिक्के भी पल भर में जमा लिए जा सकेंगे। इस तरह सिक्कों का रोटेशन बाजार के बाद बैंकों तक हो सकेगा और नोट के बराबर राशि का महत्व रखने वाले ये सिक्के किसी को बोझ नहीं लगेंगे।

इधर बैंकों की परेशानी इन सिक्कों के गिनने को लेकर है। बैंक के अधिकारियों ने दिसंबर महीने के आखिरी में ही कहा था कि जनवरी से सिक्के बैंक में जमा लिए जाने लगेंगे। लेकिन सितंबर माह तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी है. बैंक के अधिकारी कहते हैं कि उनके पास कर्मियों का अभाव है।जितनी देर में वे एक हजार रुपये के सिक्कों को गिनेंगे. उतनी देर में कतार में लगे दस बैंक उपभोक्ताओं का काम हो जायेगा। बैंक सूत्रों ने बताया कि कुछ दिन पूर्व एक उपभोक्ता ने अनुनय-विनय पर एक हजार रुपये का सिक्का जमा कराया। कैशियर को एक रुपये के एक हजार सिक्के गिनने में एक घंटा का समय लग गया। तब तक कतार में पीछे लगे सात बैंक उपभोक्ता वापस चले गये। बैंक ने बताया कि बैंक में जब तक काउंटर नहीं बढ़ाये जायेंगे या सिक्का जमा लेने का अलग काउंटर नहीं बनाया जाता है तब तक यह परेशानी बनी रहेगी।

सभी जिले जिलाकारी कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान द्वारा प्रचलित भारतीय मुद्रा को स्वीकार नहीं करना अपराध है। इस तरह की शिकायत अब तक लिखित रूप से नहीं मिली है।अगर इस तरह का अपराध प्रतिष्ठान द्वारा किया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। ऐसे लोगों का ट्रेड लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। बैंकों द्वारा सिक्का नहीं लेने की शिकायत नहीं मिली है।बैंकों को पूर्व में ही सभी प्रकार के सिक्के लिये जाने के आदेश हैं। यदि खाते में बीस हजार रुपये जमा कराने जा रहे हों तो 19 हजार के नोटों के अलावे एक हजार के सिक्के भी जमा करायें।इससे उपभोक्ताओं सहित बैंकों को जमा करने व जमा लेने में परेशानी नहीं होगी। लेकिन ऐसे व्यवसायी जिनके पास लाखों रुपये के सिक्के जमा हो गये हैं। वे एक माह में तीन हजार रुपये के सिक्के ही जमा करा पायेंगे।इस तरह जमा सिक्कों को बैंक तक पहुंचाने में उन्हें वर्षों का समय लग जायेगा। क्योंकि रिजर्व बैंक के नियम के अनुसार एक खाता धारक अपने खाते में महीने में तीन बार ही कैश जमा करा सकता है।

इसके कारण अब भी एक रुपये का सिक्का मुसीबत बन गया है।शहर हो या देहात हर तरफ रेजगारी मुसीबत बन कर सामने खड़ी हो गई है। वही एक रुपये के सिक्के जिसके लिए हम दर दर भटकते थे आज वही सिक्के कोई ले नहीं रहा है। जी हाँ एक रुपये का सिक्का न तो दुकानदार ले रहा है और न ही कोई ग्राहक। एक दूकान में अंडा खरीदने महिला पहुंची।तो दुकानदार ने एक रुपये का सिक्का लेने से साफ मना कर दिया। उसका कहना था कि यह सिक्का नहीं लेंगे।  कोई रेजगारी लेता ही नहीं है। और तो और वह एक रूपए का सिक्का न तो कोई व्यापारी ले रहा है और न ही कोई ग्राहक। आम जनता तथा दुकानदारों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।वहीं व्यापारी वर्ग के पास हजारों में रेजगारी है वह सोचता है कि मैं यह रेजगारी कहा ले जाऊंगा। इसलिए वह छोटे दुकानदारों से रेजगारी नहीं ले रहा है। छोटे दुकानदार ग्राहकों से नहीं ले रहे हैं। इसलिए शहर में हाहाकार मचा हुआ है। रेजगारी की वजह से काफी तकलीफ हो रही है लोगों को वस्तुए नहीं मिल पा रही है लोगों को घरेलू चीजें नहीं मिल पा रही है। अब देखना यह है कि कि जिनके पास ये सिक्के हैं वह इसका क्या करेंगे। क्या यह दोबारा चलन में आएंगे या फिर लोगों के पास ही रखे रह जाएंगे।
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