बिहार : कौन लगाएगा भ्रष्टाचार पर लगाम

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पटना। सीसीटीवी लगा है कोई फर्क नहीं पड़ता है.कमरे के अंदर बुलाकर चढ़ावा ले लेते हैं. तब जाकर दाम लेकर काम करते हैं। चाय पिलाने के नाम पर सौ रू.लेते हैं.सीएम नीतीश के राज्य में भ्रष्टाचार बढ़ा है.यहीं हाल देश-विदेश-प्रदेशों में है. ज्ञातव्य है कि भारत के पूर्व पीएम राहुल गाँधी कहा करते थे कि हम ने केंद्र से 100 रूपये छोड़ते हैं जो राज्य में जाते -जाते रास्ते से ही 85 पैसे गायब हो जाती थी और राज्य में केवल 15 पैसे ही पहुंची थी. इसके कारण विकास नहीं हो पा रहा था. इस तरह के भ्रष्टाचार रोकने का प्रयास होते रहा है. फिर भी भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी में भारत पहले नंबर पर है. एक पत्रिका के सर्वे के अनुसार एशिया महाद्वीप के टॉप 5 भ्रष्ट देशों में भारत का स्थान सबसे ऊपर है, जबकि पाकिस्तान चौथे नंबर पर है.एशिया महाद्वीप में भ्रष्टाचार के मामले में भारत प्रथम स्थान पर है. सर्वे में पाया गया है कि भारत में रिश्वतखोरी की दर 69 प्रतिशत है.  भारत को टॉप 5 देशों में पहला स्थान दिया गया है.


भारत के अलावा वियतनाम, पाकिस्तान, थाईलैंड और म्यांमार भी सर्वे के अनुसार टॉप 5 भ्रष्ट एशियाई देशों की सूची में शामिल हैं.भारत में स्कूल, अस्पताल, पुलिस, पहचान पत्र और जनोपयोगी सुविधाओं के मामले जुड़े सर्वे में भाग लेने वाले लगभग आधे लोगों ने कहा कि उन्होंने कभी न कभी रिश्वत दी है. 53 प्रतिशत लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ काम करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि 63 प्रतिशत मानते हैं कि आम लोगों पर उनके प्रयासों से कोई असर नहीं पड़ेगा. इस सर्वे में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है. सर्वे के नतीजों में पाया गया है कि रिश्वतखोरी दर 40 प्रतिशत है. 65 प्रतिशत रिश्वतखोरी दर के साथ वियतनाम दूसरे स्थान पर है, तो वहीं 41 प्रतिशत के साथ थाईलैंड तीसरे स्थान पर है. सर्वे में म्यांमार को पांचवां स्थान प्राप्त हुआ है, जहां रिश्वतखोरी दर 40 प्रतिशत है. औरों की तरह बिहार के स्वास्थ्य विभाग में रिश्वतखोरी का संक्रमण हेल गया है. डेग-डेग पर भष्टाचार का आलम है। हर काम का दाम बटोरा जाता है.  खुद का वेतनादेश को बैंक ले जाने के लिये 50 रूपये लेते हैं.आवटन की जानकारी और उसे लाने वाले को 500 रू. देना पड़ता है. ऐरिएल निकासी में 1000 रू.लेते हैं. इसी के कारण सातवां वेतनमान नहीं मिल पा रहा है. मजे की बात है कि राज्यकर्मियों से रकम बटोरकर आवंटन राशि लाने जाते हैं.
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