आपातकाल में नाबालिग होने के बावजूद जेल गये थे नकवी

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नयी दिल्ली 03 सितंबर, मोदी सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नति पाने वाले मुख्तार अब्बास नकवी आपातकाल के दौरान जेपी आंदोलन में शामिल होने के कारण नाबालिग होने के बावजूद जेल जाना पड़ा था। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के भादरी में 15 अक्टूबर 1957 को जन्मे श्री नकवी आपातकाल के दौरान 1975 में राजनीतिक गतिविधियों के कारण 17 साल की उम्र में जेल गये। वह तत्कालीन जनता पार्टी की गतिविधियों में शामिल रहे। जनता पार्टी (सेकुलर) के टिकट पर 1980 में वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भी लड़े, लेकिन हार गये। उन्होंने 1980 में अयोध्या सीट से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, लेकिन वहाँ भी सफलता नहीं मिली। पहली बार वह 1998 में 12वीं लोकसभा के लिए चुने गये और वाजपेयी सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री बनाये गये। वर्तमान में राज्यसभा के सदस्य और अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नकवी कला में स्नातक तथा जनसंचार में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। वह बरेली के एफआरआई कॉलेज, इलाहाबाद के एंग्लो-वेर्ना कॉलेज यादगार कॉलेज तथा एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज के छात्र रहे हैं। वह 2002, 2010 और 2016 में तीन बार राज्य सभा के लिए चुने गये हैं। श्री नकवी की अब तक तीन किताबें स्याह (1991), दंगा (1998) और वैशाली (2007) भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

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