विशेष आलेख : जुगाड़ करके पेट भरने का प्रयास

  • तब चिकेन चिल्ली के बदले राइट चिल्ली की मांग करते, विरोध किये थे शिक्षित मुसहर

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पटना. ये हैं महादलित मुसहर समुदाय के संजय मांझी. हाथ में मकई और पप्पा बिस्कुट रखे हैं.इसको लकड़ी के कंडील में गुथ दिया है. संजय के बच्चे पापा से पप्पा बिस्कुट देने के जिद्द किया, तो पापा ने बच्चे को पप्पा बिस्कुट के बदले में थप्पर दे दिया. इसकी बुनियाद में है बिहार राज्य आवास बोर्ड. बोर्ड द्वारा दीघा क्षेत्र के राजीव नगर में खेती योग्य 1024.52 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर लिया. इस अधिकृत जमीन पर किसान और मजदूरों का भविष्य निर्भर था. तब वर्तमान और अब भविष्य चौपट हो गयी. समाज के हाशिए पर रहने वाले मुसहर समुदाय के लोग अधिग्रहित खेत में एक खेतिहर मजदूर की तरह कार्य करते थे. वहीं किसान कोर्ट के द्वार पर दस्तक देने लगे ताकि अधिग्रहण से मुक्त हो सके. किसानों के रहमोकरम पर जिंदा रहने वाले मुसहर समुदाय वैकल्पित रोजगार की व्यवस्था नहीं करने लगे. सरकार ने महादलितों की सुधि नहीं ली ,तो मनचाही धंधा अपना लिये. बुजुर्ग-नौजवान मजदूरी करने लगे. दैनिक मजदूरी की बजाय ठेका लेकर कार्य करने लगे. महिला-लड़कियां शराब बनाने लगी. स्कूल जाने के बदले बच्चे रद्दी कागज चुनने लगे.


छात्र नेता और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ,1974 आये थे मखदुमपुर,दीघा. मौके पर सभा को संबोधित किया और कहा कि आपलोगों की जमीन को बिहार राज्य आवास बोर्ड ने अधिग्रहण कर लिया है. आपलोग जेपी आंदोलन को सपोर्ट करें और जेल भरों अभियान को सफल करें. भारी संख्या में लोग जेल गये. आज 43 साल के बाद भी किसानों को जमीन मिली और न ही जेल जाने वालों को जेपी सेनानी पेंशन ही. दोनों ठगे गये. इसका बुरा असर खेत/जमीन पर निर्भर मजदूरों पर पड़ा. सर्वाधिक असर पटना नगर निगम अन्तर्गत वार्ड नं.1  में रहने वालों पर पड़ा. दीघा मुसहरी में महादलित मुसहर समुदाय के लोग रहते हैं. यहीं चूहा मारने निकले संजय मांझी. रहते है. ये पूर्णत: आवासहीन व भूमिहीन हैं. सरकारी ऎलान के बाद भी आवासहीनों को भूमि नहीं मिली. सरकारी ऎलान का असर संजय मांझी की तरह सैकड़ों महादलित परिवारों पर नहीं पड़ा.जिसके सह परिवार दीघा-पटना रेलखंड के किनारे झोपड़ी में रहने को बाध्य हैं. कई दशक से सुअर के बखौरनुमा झोपड़ी में रहकर वोट दिये. वोट देकर प्रतिनिधियों की तकदीर बनाने वाले  अपन तकदीर और तस्वीर नहीं चमका सका.

सरकार और जन प्रतिनिधियों से उपेक्षित संजय मांझी कहते हैं हमलोग मिलकर वार्ड नं. 01 की प्रत्याशी स्वजातीय मुसहनी छठिया देवी को बनाया.सभी लोग प्रचार किया. इसके बाद छठिया देवी के पक्ष में मतदान किया. इस बार मुसहर एक चुक्कड़ दारू पर बिके नहीं. धनुषधारी की तरह 'आँख' पर यानी प्रतीक चिन्ह पर बटन दबा दी..इस तरह भारी वोट के अंतर से छठिया देवी विजयी बन गयी. अब देखना है कि वार्ड पार्षद छठिया देवी क्या कदम उठाकर विकास और कल्याण कर पा रही हैं. महादलित मुसहर संजय मांझी बेखौफ कहते हैं कि सरकार और एनजीओ ने हमलोगों को ठगा है. आजादी के 70 साल के बाद भी गरीबी दूर नहीं कर सकी. हमलोगों को हसीन सपना दिखाकर थोक भाव में वोट हासिल कर लेते है. वोट पाकर किस्मत और तकदीर चमका लेते हैं. हमलोग जस के तस रह जाते हैं. आप देखे मजदूरी मिलने से चूहा पकड़ने निकले हैं. जैसे सरकार और एनजीओ हित साधने के लिये प्रलोभन देते हैं. उसी तरह चतुर चूहों को फंसाने की व्यवस्था कर लिये हैं.

इसको देखें, इसे कंडील कहा जाता है.इसमें मकई और बिस्कुट लगा दिया गया है. इसे कुछ गड्ढा खोंदकर खड़ा कर देंगे. लम्बा-चौड़ा गड्ढा बनाकर पुल की तरह ढंक दिया जाता है.ऎसा करने से चूहे आते हैं और कंडील में लगाये मकई और बिस्कुट को खाने के क्रम में कंडील हिलने लगता है, इससे पता चलता है कि चूहे आ गये है. तब निर्मित पुल को चूहामार ध्वस्त कर देते है. इसी में चूहे दबकर मर जाता है. इसी तरह जगह बदल बदल कर रहते रहते हैं . दिनभर मेहनत करने के बाद मारे गये चूहों को घर ले जाते हैं.एक से अनेक साथियों के सहयोग से चूहे मारने पर आपस में हिस्सेदारी कर लेते हैं. अधिक होने पर चूहों को बेचते भी हैं. आजकल प्रति किलो डेढ़ सौ रूपये की दर बेच देते हैं.खरीददार बहुत हैं. मीट मशाला डालकर चूहा मनाते हैं. बड़े चाव से चूहा मिट खाते हैं. चूल्हा पर चूहा चढ़ा नहीं कि बच्चे मिट खाने को मचल जाते हैं. चूहे को रोस्टकर चटनी भी बनायी जाती है. विदेशी चूहे को रोस्टकर खाने लगते हैं.

आई.एस.एस.अधिकारी विजय प्रकाश ने कार्यावधि में चूहा पालन पर जोर देते रहे. इनका कहना है कि खेत की आड़ी में बिल बनाकर चूहे रहते हैं. इनको बिल से निकालने का प्रयास किया जाता है.बिल में धूंआ करके, बिल तक मिट्टी काटकर, कंडील में मकई और बिस्कुट लगाकर आदि तरीके से चूहे पकड़ते हैं. कभी-कभी हाथ भी आ जाना पड़ता हैं. सभा- सम्मेलन में कहा करते घर में चूहा पालन करें. खुद उपयोग करें और व्यापार करें. कुछ मेहनत करने के बाद चिकेन चिल्ली नहीं राइट चिल्ली की मांग होने लगेगी.इसका विरोध शिक्षित मुसहर करने लगे थे.इसके कारण इस अधिकारी की बात को अमल में नहीं आये. अभी विजय प्रकाश रिटायर हो गये हैं मगर टायड नहीं हैं. इस समय बिहार विघापीठ में अंडा को व्यापक व्यापार का रूप देने में लगे हैं.
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