सामरिक सहयोग बढ़ाएंगे भारत जापान, 15 अहम करारों पर हुए हस्ताक्षर

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गांधीनगर, 14 सितंबर, भारत एवं जापान ने प्रशांत-हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता एवं समृद्धि के प्रति वचनबद्धता को दोहराते हुए इस क्षेत्र में अपनी विशेष सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने का आज फैसला किया, दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधोंं में सामरिक क्षेत्र में सेनाओं के बीच आदान प्रदान एवं रक्षा प्रौद्याेगिकी एवं उत्पादन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया, दोनों प्रधानमंत्रियों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के विरुद्ध ठोस कदम उठाये जाने की जरूरत पर बल देते हुए पाकिस्तान का आह्वान किया कि वह मुंबई एवं पठानकोट के हमलों के दोषियों को न्याय के शिकंजे में लाये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अौर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच आज यहां महात्मा मंदिर में हुई 12वीं भारत जापान वार्षिक शिखर बैठक में ये फैसले किये गये। दोनों देशों ने निवेश में तेज़ी लाने और दोनों देशों की जनता के बीच संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से 15 अहम करारों पर भी हस्ताक्षर किये। बाद में एक संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों के बीच सहयोग की दिशाओं को रेखांकित किया गया। दोनों नेताओं ने करीब एक घंटे चली प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक में विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी को मज़बूत करने के उपायों पर विचार किया और द्धिपक्षीय सहयोग के सभी क्षेत्रों की समीक्षा की। दोनों नेताओं उत्तर कोरिया की स्थिति पर गहन चर्चा की और उसके परमाणु एवं मिसाइल कार्यक्रम की निंदा की। उन्होंने हिन्द महासागर एवं प्रशांत महासागर क्षेत्र में राजनीतिक हालात का भी जायज़ा लिया। दोनों देशों ने आतंकवाद की कठोर शब्दों में भर्त्सना की और विश्व समुदाय का संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव संख्या 1267 के तहत आतंकवादी संगठनों को सूचीबद्ध करने आह्वान किया। 


दोनों प्रधानमंत्रियों ने पाकिस्तान का आह्वान किया कि वह मुंबई के नवंबर 2008 और जनवरी 2016 के पठानकोट के हमलों के दोषियों को कानून के शिकंजे में लाये। उन्होंने पाकिस्तान में सक्रिय जैश ए माेहम्मद, लश्करे तैयबा, अल कायदा और दाइश तथा उनसे जुड़े आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगाने में सहयोग का भी आह्वान किया। जिन दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किये गये उनमें पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी बढ़ाने एवं विकास कार्यक्रमों में सहयोग के लिये भारत जापान एक्ट ईस्ट फोरम का गठन करने, भारत में जापानी भाषा में शिक्षा प्रदान करने, आपदा जोखिम कम करने, इंडिया पोस्ट और जापान पोस्ट के बीच भोज्य पदार्थों को एक दूसरे के यहां पहुंचाने के लिये कूल ईएमएस सेवा शुरू करने, भारत जापान निवेश संवर्द्धन रोडमैप तैयार करने, गुजरात के मंडल बेचराज खोराज क्षेत्र में ढांचागत विकास, भारत में जापानी एयरलाइनों की असीमित उड़ानों को इजाज़त देने के करार, बायोटैक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग के दो करार, खेल के क्षेत्र में चार करार एवं अनुसंधानों को साझा करने का एक करार शामिल है। बाद में श्री मोदी ने अपने प्रेस वक्तव्य में कहा कि आपसी विश्वास और भरोसा, एक दूसरे के हितों और चिंताओं की समझ, और उच्च स्तरीय सतत संपर्क, यह भारत जापान संबंधों की ख़ासियत हैं। हमारी विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी का दायरा सिर्फ़ द्विपक्षीय या क्षेत्रीय स्तर तक ही सीमित नहीं है। वैश्विक मुद्दों पर भी हमारा सहयोग घनिष्ठ है। श्री मोदी ने मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेलवे परियोजना के भूमिपूजन को एक बहुत बड़ा क़दम बताते हुए कहा कि यह सिर्फ़ हाईस्पीड रेल की शुरुआत नहीं है। भविष्य में हमारी आवश्यकताओं को देखते हुए वह इस नई रेल परिकल्पना को नए भारत के निर्माण की जीवनरेखा मानते हैं। इस तरह से भारत की अबाध प्रगति का संपर्क अधिक तीव्र गति से जुड़ गया है। उन्होंने भारत एवं परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग के लिए गत वर्ष हुए समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए इसके जापानी संसद में अनुमोदन होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “जापान के जनमानस, जापान की संसद, और ख़ास तौर पर प्रधानमंत्री आबे का ह्रदय से आभार प्रकट करता हूं। 

स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के विषय पर हमारे सहयोग के लिए इस समझौते ने एक नया अध्याय जोड़ा है।” श्री आबे ने अपने वक्तव्य में मेक इन इंडिया, डिजीटल इंडिया आदि कार्यक्रमों का समर्थन किया और वस्तु एवं सेवा कर लागू करने सहित आर्थिक सुधारों की सराहना की। उन्होंने हिन्द प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था की वकालत करते हुए भारत के साथ मिल कर काम करने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने चीन का नाम लिये बिना समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता एवं हिन्द प्रशांत क्षेत्र के देशों में नागरिकों की इच्छा के अनुरूप विकास योजनाओं पर काम करने तथा सैन्यबल के आगे झुके बिना लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के महत्व को रेखांकित किया। श्री मोदी ने कहा कि 2016-17 में भारत में जापान से 4.7 अरब डॉलर का निवेश हुआ है जो पिछले वर्ष की तुलना में 80 प्रतिशत अधिक है। इस प्रकार से जापान भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक हो गया। यह दर्शाता है कि भारत के आर्थिक विकास और सुनहरे कल के प्रति जापान में कितना विश्वास और आशावादी वातावरण है। उन्होंने भारत और जापान के बीच बढ़ते कारोबार के साथ लोगों के परस्पर संबंधों में निकटता आने की उम्मीद जताते हुए कहा कि भारत इंडिया पोस्ट और जापान पोस्ट के सहयोग से एक कूल बॉक्स सर्विस भी शुरू करने जा रहा है ताकि भारत में रह रहे जापानी लोग सीधा जापान से अपने पसंदीदा भोजन मंगा सकें। उन्होंने जापानी कारोबारियों से भारत में अधिकाधिक जापानी रेस्त्रां खोलने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि भारत कई स्तरों पर आमूलचूल परिवर्तन की राह पर चल रहा है। ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस हो या स्किल, कर सुधार हो या मेक इन इंडिया, भारत पूरी तरह बदल रहा हो रहा है। जापान के कारोबार जगत के लिए यह बहुत बड़ा मौका है और मुझे प्रसन्नता है कि जापान की कई कंपनियां हमारे राष्ट्रीय फ्लैगशिप कार्यक्रमों से गहन तौर पर जुड़ रही हैं।
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