जनधन योजना में निष्क्रिय खातों की संख्या 20 प्रतिशत से कम : जेटली

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नयी दिल्ली 13 सितंबर, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सरकार ने वित्तीय समावेशन की नीति को केन्द्र में ला दिया है और बैंकों की सहायता से वित्तीय समावेशन की पूरी क्षमता के दोहन का प्रयास किया गया है, वित्त मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित वित्तीय समावेशन सम्मेलन में कहा कि सरकार को पिछले तीन वर्षों में राजनीतिक और आर्थिक एजेंडा के केन्द्र में वित्तीय समावेशन को लाने में सफलता मिली है और आने वाले समय में नीति-निर्माताओं को केवल इसी निर्देश का अनुसरण करना होगा, नीति-निर्माता इसमें कोई बदलाव नहीं ला सकते। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें दूसरों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अच्छा काम किया। अगस्त 2014 में जब प्रधानमंत्री ने जनधन योजना लांच की थी तब केवल 58 प्रतिशत लोगों के पास बैंक खाते थे और 42 प्रतिशत लोग बैंकिंग दायरे से बाहर थे। श्री जेटली ने कहा कि अब इस योजना के अंतर्गत खुले खातों की संख्या 30 करोड़ से अधिक हो गई है। सितंबर 2014 में जन धन योजना के तहत जीरो बैलेंस खातों की संख्या 76.81 प्रतिशत से कम होकर अब 20 प्रतिशत से कम रह गई है। इसके अतिरिक्त 5,000 रुपये की ओवर ड्राफ्ट सुविधा के साथ 22 करोड़ से अधिक रूपे कार्ड जारी किये गये हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन के अतिरिक्त सरकार ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के अंतर्गत गरीबों को जीवन बीमा तथा प्रधानमंत्री सुरक्षा जीवन योजना (पीएमएसबीवाई) के अंतर्गत दुर्घटना बीमा के माध्यम से गरीबों को सुरक्षा देने का कदम उठाया है। इस साल 07 अगस्त तक पीएमजेजेबीवाई के अंतर्गत कुल 3.46 करोड़ नामांकन हो चुके थे और पीएमएसबीवाई के अंतर्गत 10.96 करोड़ नामांकन हुये थे। दोनों योजनाओं में शामिल होने वालों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। श्री जेटली ने नोटबंदी का उल्लेख करते हुये कहा कि इससे नकदी लेनदेन में कमी लाने, डिजिटलकरण को बढ़ाने, कर आधार बढ़ाने तथा अर्थव्यवस्था को अधिक औपचारिक रूप देने में मदद मिली है। नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था में नकद की कुल मात्रा को घटाने पर बल दिया जा रहा है। वित्त मंत्री ने आधार का उल्लेख करते हुये कहा कि यह देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और अब हम इसकी क्षमता को समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि 92 प्रतिशत लोगों के पास आधार कार्ड है। वह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि आधार विधेयक संविधान की कसौटी पर खरा उतारेगा। उन्होंने कहा कि आधार से सब्सिडी लक्षित करने और संसाधनों की बर्बादी रोकने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि आधार प्रणाली लागू करने के बाद अब सब्सिडी पात्र गरीब लोगों तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि पात्र व्यक्तियों के खाते में सीधे वित्तीय सहायता पहुंचने से जनधन खातों के संचालन में मदद मिली है और इससे निष्क्रिय खातों की संख्या में कमी आई है।

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