जेठमलानी का वकालत पेशे से संन्यास

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नयी दिल्ली, 09 सितंबर, जाने-माने वकील राम जेठमलानी ने सक्रिय वकालत के पेशे से संन्यास लेने की आज घोषणा की। देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों, विभिन्न राज्यों के महाधिवक्ताओं और अन्य विधि अधिकारियों तथा विधि छात्रों की उपस्थिति में श्री जेठमलानी ने सक्रिय वकालत के पेशे से संन्यास की घोषणा की। न्यायमूर्ति मिश्रा को सम्मानित करने के लिए भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) की ओर से आयोजित समारोह में उन्होंने कहा, “मैंने वकालत पेशे में अपने जीवन के 76 साल और अध्यापन के क्षेत्र में 77 साल बिताये हैं और अब वक्त आ गया है कि मैं सक्रिय वकालत से संन्यास ले लूं। अब आप मुझे अदालतों में किसी मामले की पैरवी करते नहीं पायेंगे। कुछ और अच्छे काम अधूरे हैं, जिनकी ओर अब मैं अपना ध्यान लगाऊंगा।’’ श्री जेठमलानी ने कहा कि पांच दिन बाद वह 95 वर्ष के हो जायेंगे और अब कुछ समय अन्य कामों में लगाना है। उन्होंने पूर्ववर्ती और मौजूदा सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन सरकारों ने देश को गर्त में पहुंचाया है और इस आेर सोचने का वक्त है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह नया क्या करने जा रहे हैं। उन्होंने न्यायपालिका के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उन्होंने कानून और राजनीति - दोनों क्षेत्रों में अपने जीवन के महत्वपूर्ण पल बिताये हैं और दोनों को ही बहुत करीब से देखा है। वह बड़ी शिद्दत से कहना चाहते हैं कि उनके दिल में राजनेताओं की तुलना में न्यायाधीशों के लिए अधिक सम्मान है। पूर्व कानून मंत्री ने माहौल को खुशनुमा बनाते हुए कहा, “जजों के प्रति सम्मान और आदर की बात करके मैं कोई मक्खनबाजी नहीं कर रहा हूं, क्योंकि संन्यास लेने के बाद अब मुझे मक्खनबाजी की जरूरत नहीं रह गयी है।” इसके बाद सभागार ठहाकों से गूंज उठा।

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